सियासत: यूपी चुनाव के बहाने बिहार की राजनीति को साधना चाहते हैं जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी, विधान परिषद और 'यूपी में गठबंधन' है लक्ष्य
हम (HAM) की तरफ से आधिकारिक बयान आया कि जीतन राम मांझी की पार्टी और वीआईपी (VIP) दोनों मिलकर उत्तर प्रदेश में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेंगे। माना जाता है यूपी में निषाद समाज का ठीक-ठाक वोट बैंक है और इसे मुकेश सहनी प्रभावित कर सकते हैं।
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बिहार की मौजूदा राजनीति में किंग मेकर की भूमिका निभा रहे पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (हम) प्रमुख जीतन राम मांझी और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) प्रमुख मुकेश सहनी उत्तर प्रदेश की राजनीति के जरिए बिहार की राजनीति को साधना चाहते हैं। इसके लिए जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी ने हाथ मिला लिया है।दोनों नेताओं ने शुक्रवार को लगभग एक घंटे तक बंद कमरे में बातचीत की।
हम (HAM) की तरफ से आधिकारिक बयान आया कि जीतन राम मांझी की पार्टी और वीआईपी (VIP) दोनों मिलकर उत्तर प्रदेश में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेंगे। माना जाता है यूपी में निषाद समाज का ठीक-ठाक वोट बैंक है और इसे मुकेश सहनी प्रभावित कर सकते हैं। मुकेश सहनी लगातार भाजपा पर दबाव बना रहे हैं कि वह यूपी में भाजपा के साथ गठबंधन के साथ चुनाव लड़े ताकि कुछ सीटों पर उन्हें जीत हासिल हो सके। वहीं जीतनराम मांझी ने अब तक तो यूपी में चुनाव लड़ने का मन नहीं बनाया था, लेकिन जैसे ही मुकेश सहनी का साथ मिला तो, वह भी चुनाव लड़ने को तैयार हो गए। दोनों नेता बिहार के सत्तारूढ़ एनडीए में शामिल हैं और यूपी के बहाने बिहार की राजनीति को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
बिहार विधान परिषद की 24 सीटों पर चुनाव
आने वाले महीनों में बिहार विधान परिषद की 24 सीटों पर चुनाव होने हैं। ऐसे में दोनों पार्टियां चाहती है कि इनको इन 24 विधान परिषद की सीटों में ठीक-ठाक हिस्सेदारी मिले। जबकि इन 24 विधानसभा क्षेत्र की सीटों में ज्यादातर भाजपा, जेडीयू और आरजेडी का कब्जा था और उन्होंने इन सीटों पर दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
जीतन राम मांझी अपने परिवार के लिए सीट चाहते हैं, जिसमें उनके छोटे पुत्र, पुत्रवधू और दामाद शामिल हैं। वही, मुकेश सहनी का पूरा ध्यान यूपी चुनाव पर है। वह चाहते हैं कि भाजपा के सहारे यूपी चुनाव की वैतरणी पार कर ली जाए। जैसे बिहार में चार सीटें उन्होंने भाजपा के सहारे जीती थी, वैसे ही यूपी में भी कुछ ऐसी ही जीत मिल जाए ताकि उनकी पार्टी का विस्तार हो सके। इसको लेकर वह लगातार यूपी में कैम्प भी कर रहे हैं।
यूपी में निषाद समुदाय का गहरा असर
यूपी में निषाद समुदाय की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता कि इसी के चलते 2018 के लोकसभा उपचुनाव में भाजपा 25 साल बाद गोरखपुर सीट हार गई थी। जिसके बाद निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को अगले ही साल 2019 में भाजपा ने संत कबीरनगर सीट से लोकसभा का टिकट दे दिया था और वर्तमान में वह लोकसभा सांसद हैं। निषाद समुदाय में केवट, बिंद, मल्लाह, कश्यप, नोनिया, मांझी, गोंड समेत 22 उप जातियां आती हैं, जो पूर्वांचल की करीब 60 सीटों को बेहद प्रभावित करता है।
बिहार सरकार में किंग मेकर की भूमिका
माना जाता है कि मांझी और सहनी बिहार की मौजूदा राजनीति में किंग मेकर की भूमिका में हैं। बिहार विधान सभा के गणित को देखा जाए तो जेडीयू के पास 45 और एक निर्दलीय का समर्थन प्राप्त कुल 46 विधायक हैं। भाजपा के पास कुल 74 विधायक हैं। वहीं, चार विधायक हम के हैं और तीन विधायक वीआईपी के हैं, एक का निधन हो चुका है। अभी सत्तारूढ़ एनडीए के पास 127 विधायक हैं। वहीं, महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां मिलाकर 110 विधायक है। पांच विधायक आईएमआईएम के हैं, जिन्होंने किसी को समर्थन नही दिया है।
बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में मांझी और मुकेश सहनी यदि पाला बदलते हैं तो एनडीए सरकार संकट में आ जाएगी। इसी बात का फायदा जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी उठा रहे हैं।