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Bihar: व्यास कुंड की गर्म जल धारा सूखी; अच्छी बारिश न होने का असर, अन्य जल धाराओं के वेग में भी आई कमी

Tue, 12 Sep 2023 04:13 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगीर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगीर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Tue, 12 Sep 2023 04:13 PM IST
सार

Rajgir News: नालंदा में इस बार मानसून की अच्छी बारिश नहीं हो सकी। इसकी वजह से राजगीर स्थित व्यास कुंड में गिरने वाला गर्म जल अब बूंद-बूंद टपक रहा है या यूं कहें कि बंद हो गया है। वहीं, अन्य जलधाराओं का वेग भी कम हो गया है।

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Hot water stream of Vyas Kund in Rajgir dried up; Impact of lack of good rains
राजगीर स्थित व्यास कुंड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऐतिहासिक नगरी राजगीर में 22 कुंड और 52 धाराएं हैं। सभी कुंडों का और सभी धाराओं का अपना-अपना धार्मिक महत्त्व है। साथ ही यहां के सभी कुंडों का नाम भी है। सभी कुंडों के नाम देवी-देवताओं के नाम पर रखे गए हैं। इनमें मुख्य कुंड ब्रह्म कुंड और सप्त धारा इसके अलावा गंगा, यमुना, सावित्री, राम, लक्ष्मण, सीता कुंड, सूर्यकुंड, चंद्रकुंड, व्यास कुंड, अनंत कुंड, मार्कणर्ड कुंड, सरस्वती कुंड प्रमुख हैं।

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इस बार नालंदा में मानसून ने साथ नहीं दिया, जिसके कारण अच्छी बारिश नहीं हो सकी। यही वजह है कि व्यास कुंड में गिरने वाला गर्म जल अब बूंद-बूंद टपक रहा है या यूं कहें कि बंद हो गया है। वहीं, अन्य जलधाराओं का वेग भी कम हो गया है। ब्रह्म कुंड परिसर में व्यास कुंड महिलाओं के लिए आरक्षित है।
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कहां से आती है गर्म जल की धारा
राजगीर के गर्म कुंडों में यहां सप्तकर्णी गुफाओं से पानी आता है। जो वैभार गिरी पर्वत पर स्थित भेलवाडोव तालाब है। उससे ही जल पर्वत से होते हुए यहां पहुंचता है। इस पर्वत में कई तरह के औषधीय गुण मौजूद हैं, जिनमें से सोडियम, गंधक और सल्फर शामिल हैं। इसकी वजह से पानी गर्म होकर विभिन्न जल धाराओं के माध्यम से कुंडों में गिरता है।
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कैसे हुई गर्म पानी की उत्पत्ति
राजगीर में प्राकृतिक रूप से निर्मित गर्म कुंडों के बारे में कहा जाता है कि ब्रह्मपुत्र राजा वासु ने एक बार माघ महीने में यहां यज्ञ का आयोजन किया था। सभी 33 कोटि देवी-देवता यज्ञ में शामिल होने आए थे। माघ महीने में भीष्म शीतलहरी से देवी देवताओं ने भगवान ब्रह्मा से प्रार्थना की कि उन्हें इस भीषण ठंड से निजात दिलाने के लिए गर्म जल की व्यवस्था की कृपा करें।


देवी-देवताओं के इस अनुरोध पर भगवान ब्रह्मा ने कुंडों का निर्माण कराया, जिनमें गर्म जल धाराएं फूट पड़ीं। इनका तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस रहता है। यहां स्नान करने वाले लोगों की कई बीमारियां भी जड़ से खत्म हो जाती हैं। वहीं, गर्म पानी के सेवन करने से भी पेट की कई बीमारियां दूर हो जाती हैं।

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