फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   GI Tag bihar news what is bawan buti art nalanda bawan buti saree

Bihar: नालंदा की 52 बूटी की होने वाली है जीआई टैगिंग; पद्मश्री तक दिला चुकी बावन बूटी कला के बारे में जानें

Wed, 12 Feb 2025 02:28 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा Published by: आदित्य आनंद Updated Wed, 12 Feb 2025 02:28 PM IST
सार

Bawan Buti Art : वर्ष 2023 में नालंदा के कपिल देव प्रसाद को कला के क्षेत्र में पद्मश्री मिला तो बावन बूटी की चर्चा तेजी से उठी थी। अब बावन बूटी कला को जीआई टैग मिलने वाला है। बावन बूटी कला है क्या और जीआई टैगिंग से क्या होगा फायदा, जानें यहां।

विज्ञापन
GI Tag bihar news what is bawan buti art nalanda bawan buti saree
बावन बूटी कला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय हस्तकला की एक अनमोल विरासत आज विलुप्ति के कगार पर खड़ी है। नालंदा जिले के बिहारशरीफ में स्थित बासवन बिगहा गांव की प्रसिद्ध बावन बूटी साड़ी, जो कभी राष्ट्रपति भवन से लेकर विदेशी राजदूतों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान रखती थी, आज अस्तित्व के लिए जूझ रही है। पिछले साल बावन बूटी कला के महारथी कपिलदेव प्रसाद को पद्मश्री सम्मान दिया गया था। आज फिर से यह कला चर्चा में हैं, क्यों इसे अब जीआई टैग मिलने वाला है। आइए जानते हैं बावन बूटी कला के बारे में...
विज्ञापन


बावन बूटी मूलत: एक तरह की बुनकर कला है। सूती या तसर के कपड़े पर हाथ से एक जैसी 52 बूटियां यानि मौटिफ टांके जाने के कारण इसे बावन बूटी कहा जाता है। बूटियों में बौद्ध धर्म-संस्कृति के प्रतीक चिह्नों की बहुत बारीक कारीगरी होती है। बावन बूटी में कमल का फूल, बोधि वृक्ष, बैल, त्रिशूल, सुनहरी मछली, धर्म का पहिया, खजाना, फूलदान, पारसोल और शंख जैसे प्रतीक चिह्न ज्यादा मिलते हैं। बावन बूटी की साड़ियां सबसे ज्यादा डिमांड में रहती हैं, वैसे इस कला से पूर्व परिचित लोग बावन बूटी चादर और पर्दे भी खोजते हैं। कपिल देव प्रसाद के दादा शनिचर तांती ने इसकी शुरुआत की थी। फिर पिता हरि तांती ने सिलसिले को आगे बढ़ाया। जब 15 साल के थे, तभी इसे रोजगार के रूप में अपना लिया। अब तो बेटा ज्यादा काम संभालता है।
विज्ञापन

 
 

GI Tag bihar news what is bawan buti art nalanda bawan buti saree
पद्मश्री कपिल देव प्रसाद को कई सम्मान मिले। - फोटो : अमर उजाला
एक ही डिज़ाइन को बावन बार उकेरा जाता है
स्वर्गीय कपिल देव प्रसाद की बहू नीलू कुमारी ने बताया कि एक समय था जब हमारी साड़ियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान पाती थीं। जो इस कला को बचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनके ससुर स्वर्गीय कपिल देव प्रसाद ने इस कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई थी। बावन बूटी साड़ी की विशेषता इसकी जटिल कारीगरी में छिपी है। छह गज के सादे वस्त्र पर रेशम के धागों से एक ही डिज़ाइन को बावन बार उकेरा जाता है, जिसमें बौद्ध धर्म के प्रतीक जैसे कमल, पीपल के पत्ते, बोधि वृक्ष और धर्म चक्र समाहित होते हैं। एक साड़ी को पूर्ण करने में कुशल कारीगर को 10-15 दिन का समय लगता है।

कला को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं
वहीं बावन बूटी कला के दिग्गज कारीगर विवेकानंद बताते हैं कि केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। जो अपने पूर्वजों की इस कला को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन आर्थिक चुनौतियों के कारण नई पीढ़ी इस व्यवसाय से दूर होती जा रही है। अब जीआई टैग मिलने की बात से एक उम्मीद की किरण जागी है।

 

GI Tag bihar news what is bawan buti art nalanda bawan buti saree
बावन बूटी कला के कारीगर। - फोटो : अमर उजाला
बूटी साड़ी को जल्द ही जीआई टैग मिल सकता है
वहीं नाबार्ड के सीजीएम विनय कुमार सिन्हा के अनुसार बावन बूटी साड़ी को जल्द ही जीआई टैग मिल सकता है। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री में ऑफलाइन सुनवाई का इंतजार है। यह प्रमाणन इस कला को नया जीवन दे सकता है। एक समय में हजारों कारीगरों की आजीविका का स्रोत रही यह कला आज मात्र 80-100 कारीगरों तक सिमट गई है। सरकारी उदासीनता और बाजार की चुनौतियों के बीच यह प्राचीन कला संरक्षण की प्रतीक्षा कर रही है। क्या यह विलुप्त होती कला फिर से अपनी खोई हुई चमक पा सकेगी? यह समय ही बताएगा।

जानिए क्या होता जीआई टैग
जीआई टैग का मतलब होता है जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी भौगोलिक संकेतक। इसका इस्तेमाल ऐसे उत्पादों के लिए किया जाता है, जिनका एक विशिष्ट भौगोलिक मूल क्षेत्र होता है। किसी प्रोडक्ट को ये खास भौगोलिक पहचान मिल जाने से उस प्रोडक्ट के उत्पादकों को उसकी अच्छी कीमत मिलती है। इसका फायदा ये भी है कि अन्य उत्पादक उस नाम का इस्तेमाल कर अपने सामान की मार्केटिंग भी नहीं कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed