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बोधगया में पर्यटन कारोबार को झटका: नेपाल की त्रासदी से थमीं बुकिंग्स, होटल और ट्रैवल कारोबारियों की चिंता बढ़ी

Tue, 01 Sep 2026 05:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 01 Sep 2026 05:08 PM IST
सार

नेपाल में आई भीषण आपदा का असर बोधगया के पर्यटन और होटल कारोबार पर दिखाई देने लगा है। नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने होटल बुकिंग रद्द करनी शुरू कर दी है। कारोबारियों को पितृपक्ष मेला और दलाई लामा के प्रस्तावित दौरे से बड़ी आमद की उम्मीद थी, लेकिन अब इस पर्यटन सीजन में कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।

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Bihar Bodh Gaya Tourism Suffers as Nepal Disaster Triggers Mass Booking Cancellations
नेपाल में आई भीषण त्रासदी का असर बोधगया के पर्यटन पर दिखने लगा है - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

नेपाल में आई भीषण त्रासदी का असर अब भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हर साल सितंबर में पितृपक्ष मेला और इसके बाद शुरू होने वाले बौद्ध पर्यटन सीजन को लेकर यहां के होटल, ट्रैवल्स और अन्य व्यवसायी तैयारी में जुट जाते हैं। इस बार तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के प्रस्तावित आगमन से कारोबारियों को अच्छी आमद की उम्मीद थी, लेकिन नेपाल में आई तबाही ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं ने होटल बुकिंग रद्द करनी शुरू कर दी है, जिससे स्थानीय कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

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नेपाल में आई भीषण त्रासदी का असर बोधगया के पर्यटन पर दिखने लगा है।

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श्रद्धालुओं की संख्या जरूर घटेगी
ऑल इंडिया भिक्षु संघ के महामंत्री प्रज्ञादीप ने कहा कि नेपाल में बेहद भीषण त्रासदी आई है और इसका असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में भारत सरकार ने नेपाल की हर संभव मदद की है, जिससे राहत और बचाव कार्य को गति मिली है। उन्होंने लोगों से एक-दूसरे की मदद करने की अपील करते हुए कहा कि ऐसे समय में सहयोग ही सबसे बड़ा सहारा है। प्रज्ञादीप ने कहा कि सितंबर में पिंडदान के लिए बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालु बोधगया आते हैं, लेकिन इस बार उनकी संख्या कम रहने की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि यदि दलाई लामा बोधगया आते भी हैं तो नेपाल और तिब्बत से श्रद्धालुओं का पहुंचना मुश्किल होगा, क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और संसाधनों की भारी कमी है।

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नेपाल में आई भीषण त्रासदी का असर बोधगया के पर्यटन पर दिखने लगा है।



बिहार और भारत सरकार राहत कार्य में जुटी 
बोधगया और गया के फंसे लोगों को लेकर उन्होंने कहा कि भारत सरकार और बिहार सरकार लगातार राहत कार्य में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि सूचना मिली है कि बोधगया के ईशा फाउंडेशन से जुड़े कुछ लोग भी वहां फंसे थे, जिन्हें सुरक्षित वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है।


 

 




होटल बुकिंग रद्द होने लगी

बोधगया होटल एसोसिएशन के महासचिव एवं होटल व्यवसायी सुदामा ने बताया कि नेपाल की त्रासदी का सीधा असर बोधगया के होटल कारोबार पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष के दौरान नेपाल से बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु आते हैं, जबकि दलाई लामा के आगमन के समय नेपाल और तिब्बत से बौद्ध अनुयायियों की भी अच्छी संख्या रहती है। उन्होंने बताया कि नेपाल के कई पर्यटकों ने पहले से कराई गई होटल बुकिंग रद्द कर दी है। कई लोगों ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य लापता हैं या इस आपदा में जान गंवा चुके हैं। ऐसे में उनके लिए यात्रा करना संभव नहीं है। सुदामा ने कहा कि दलाई लामा के आगमन से हर बार कारोबार को बड़ा सहारा मिलता है, लेकिन इस बार प्रभावित इलाकों से श्रद्धालुओं के नहीं आने की आशंका है, जिससे होटल व्यवसाय को भारी नुकसान होगा

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टूर एंड ट्रैवल्स कारोबार पर भी संकट

टूर एंड ट्रैवल्स सदस्य एवं बस मालिक दीपक कुमार ने कहा कि बोधगया का बड़ा हिस्सा बौद्ध देशों से आने वाले पर्यटकों पर निर्भर करता है और नेपाल उनमें सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि नेपाली श्रद्धालु आमतौर पर 10 से 15 दिनों तक बोधगया में ठहरते हैं, जिससे स्थानीय कारोबार को काफी लाभ मिलता है। दीपक कुमार ने कहा कि अक्टूबर से पर्यटन सीजन शुरू होता है और अभी बुकिंग आने का समय था, लेकिन नेपाल की त्रासदी के कारण इस बार बुकिंग लगभग रुक गई है। उनका कहना है कि पर्यटन से जुड़े हर व्यक्ति को नुकसान होगा। किसी को 10 लाख, किसी को 20 लाख तो किसी को 25 लाख रुपये तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिल रही है कि गया और आसपास के कुछ लोग अभी भी नेपाल में फंसे हुए हैं।

इस सीजन में कारोबारियों की उम्मीदें कम

बोधगया के होटल, ट्रैवल्स, टैक्सी, गाइड, रेस्टोरेंट और छोटे दुकानदारों की बड़ी कमाई सितंबर से शुरू होने वाले पर्यटन सीजन पर निर्भर रहती है। लेकिन नेपाल में आई भीषण आपदा के कारण इस बार कारोबारियों को उम्मीद से काफी कम पर्यटक आने की आशंका है। ऐसे में धार्मिक पर्यटन पर आधारित बोधगया की अर्थव्यवस्था पर भी इस आपदा का असर साफ दिखाई देने लगा है।

(इनुपट- रंजन सिन्हा, गयाजी)
 

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