बिहार: पितरों की स्मृति में पौधे लगा रहे पिंडदानी, गयाजी की पितृ वाटिका में अब तक 500 से अधिक पौधे रोपे
गयाजी में पितृपक्ष मेले के दौरान ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना है। पिंडदानी अपने पूर्वजों की स्मृति में निःशुल्क पौधे लगा रहे हैं। पितृ वाटिका में अब तक 500 से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें
गयाजी में पितरों के मोक्ष की कामना से होने वाले पिंडदान के बीच इस बार श्रद्धा का एक नया रूप देखने को मिल रहा है। पिंडदानी अपने पूर्वजों की स्मृति में पौधे लगा रहे हैं। आने वाले वर्षों में यही पौधे पेड़ बनकर न केवल पर्यावरण को संवारेंगे, बल्कि अपने नाम से जुड़े पूर्वजों की याद को भी जीवित रखेंगे।
जिला प्रशासन और नगर निगम की पहल पर पितृपक्ष मेला 2026 में ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत पिंडदानी अपने पूर्वजों की स्मृति में पौधे लगाकर उन्हें धरती से जोड़ रहे हैं। यह पहल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है। ब्रह्मयोनि पहाड़ के निचले हिस्से खटकाचक से लेकर गांधी मैदान की टेंट सिटी तक पितृ वाटिका विकसित की जा रही है। यहां लगाया जा रहा प्रत्येक पौधा किसी न किसी परिवार के पूर्वज की स्मृति से जुड़ा है।
मुफ्त पौधा, रजिस्ट्रेशन से लेकर निगरानी तक
पिंडदानियों को पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके लिए श्रद्धालुओं को गांधी मैदान टेंट सिटी में रजिस्ट्रेशन कराकर कूपन लेना होता है। इसके बाद उन्हें पौधा उपलब्ध कराया जाता है, जिसे वे अपने पूर्वज की स्मृति में निर्धारित स्थान पर लगाते हैं।
पौधा लगाने के बाद श्रद्धालु को एक विशेष कोड दिया जाता है। इसके जरिए वेबसाइट पर अपने पूर्वज के नाम से लगाए गए पौधे की स्थिति देखी जा सकती है। यानी गयाजी से लौटने के बाद भी श्रद्धालु अपने लगाए पौधे से जुड़ा रह सकता है।
आज पौधा, कल पूर्वजों की जीवित याद
गयाजी में पिंडदान और तर्पण के जरिए सदियों से लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते आए हैं। अब इसी भावना को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। पिंडदानी जब अपने पूर्वज के नाम पर पौधा लगाता है तो उसके लिए यह सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि स्मृति और श्रद्धा का प्रतीक बन जाता है।
आने वाले वर्षों में जब ये पौधे बड़े होकर पेड़ों का रूप लेंगे, तब उनकी छांव में हरियाली के साथ उन पूर्वजों की याद भी मौजूद होगी, जिनके नाम पर उन्हें लगाया गया है। इस तरह ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ पहल धार्मिक आस्था को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़कर ऐसी विरासत तैयार करने की कोशिश है, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिलेगा।
पढ़ें: बिहार: अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा विद्या भवन, एक जगह से संचालित होंगी शिक्षा विभाग की गतिविधियां
एक लाख पौधे लगें तो बदल सकती है गयाजी की तस्वीर
पितृ वाटिका काउंटर प्रभारी विपिन बिहारी ने बताया कि गया के गांधी मैदान स्थित टेंट सिटी में पितृ वाटिका का काउंटर बनाया गया है। यहां देश-दुनिया से आने वाले पिंडदानियों का रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है और उन्हें पितृ वाटिका भेजा जा रहा है, जहां वे अपने पूर्वजों के नाम पर एक पौधा लगा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वन प्रमंडल विभाग की ओर से पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं और उनकी देखरेख भी की जा रही है। अब तक देश-विदेश से आए 600 से अधिक श्रद्धालु पितृ वाटिका में अपने पूर्वजों के नाम पर पौधे लगा चुके हैं। अभियान में 25 सदस्यीय टीम काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि पौधे लगाने वाले श्रद्धालु घर बैठे वेबसाइट के माध्यम से अपने पौधे की स्थिति देख सकेंगे। प्रत्येक पौधे को एक बारकोड से जोड़ा जाएगा और जिला प्रशासन समय-समय पर वेबसाइट पर उसकी जानकारी अपडेट करेगा। रजिस्ट्रेशन के दौरान दिए गए मोबाइल नंबर के माध्यम से भी श्रद्धालु अपने पौधे की जानकारी देख सकेंगे।
विपिन बिहारी ने कहा कि पितृपक्ष मेले के दौरान 25 से 30 लाख श्रद्धालु गयाजी पहुंचते हैं। अगर इनमें से एक लाख श्रद्धालु भी अपने पूर्वजों के नाम पर एक-एक पौधा लगाते हैं, तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में यह बहुत बड़ी पहल साबित हो सकती है।
एक हजार पौधे लगाने का लक्ष्य
पितृ वाटिका के मॉडल पदाधिकारी देवेश कुमार ने बताया कि पितृ वाटिका बनाने का उद्देश्य दो स्तरों पर है। पहला धार्मिक उद्देश्य है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और गयाजी के स्थानीय लोग इस पावन धरती पर अपने पूर्वजों के नाम पर एक पौधा लगा सकें। दूसरा वैज्ञानिक और पर्यावरणीय उद्देश्य है। इससे गयाजी में पेड़ों की संख्या बढ़ेगी और पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि पितृ वाटिका में एक हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक 500 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। अपने पूर्वजों के नाम पर पौधा लगाने को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। पहाड़ के नीचे से लेकर पहाड़ के ऊपर तक अलग-अलग स्थानों पर पौधे लगाए जा रहे हैं। इन पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी वन विभाग की है।
जिला प्रशासन पितृ वाटिका के नाम से एक ऐप/वेबसाइट विकसित करने की योजना पर भी काम कर रहा है। रजिस्ट्रेशन के दौरान मोबाइल नंबर दर्ज कराने वाले श्रद्धालु उसी नंबर के माध्यम से अपने पूर्वजों के नाम पर लगाए गए पौधे की जानकारी घर बैठे देख सकेंगे।
‘ऐसा लग रहा है कि पिता जी को यहां स्थापित कर दिया’
गयाजी की रहने वाली अमृता कुमारी ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली कि जिला प्रशासन की ओर से लोगों को अपने पूर्वजों के नाम पर पौधा लगाने की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने अपने पिताजी की याद में यहां एक पौधा लगाया। अमृता ने कहा, “ऐसा लग रहा है कि हम सिर्फ एक पौधा नहीं लगा रहे, बल्कि अपने पिताजी की स्मृति को यहां स्थापित करके जा रहे हैं।”
मां की याद में लगाया पौधा
नीरज कुमार ने बताया कि उनके छोटे भाई ने जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान के बारे में बताया। इसके बाद उन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया और अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाया।
नीरज ने कहा कि जिला प्रशासन की यह बहुत अच्छी पहल है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने बताया कि लगाए गए पौधे की अच्छी तरह देखरेख की जाएगी और वेबसाइट के माध्यम से घर बैठे पौधे की स्थिति भी देखी जा सकेगी। पितृपक्ष के दौरान गयाजी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचते हैं। प्रशासन की यह पहल इसी धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की कोशिश है।