Bihar: चंदौती ब्लॉक प्रमुख-उप प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव; RJD नेत्री समेत इन्होंने BDO को सौंपा आवेदन
Gaya Hindi News: गया जिले के चंदौती प्रखंड और डुमरिया प्रखंड के प्रमुख-उप प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए पंचायत समिति के सदस्यों ने बीडीओ को ज्ञापन सौंपा है। इन गतिविधियों का लोकसभा चुनाव 2024 से कितना संबंध है, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...।
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लोकसभा चुनाव से पहले गया जिले में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अब गया जिला परिषद, डुमरिया समेत विभिन्न प्रखंडों में वर्तमान गांव की सरकार को गिराने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का खेल शुरू हो गया है। इसी सिलसिले में मंगलवार को डुमरिया प्रखंड के साथ-साथ नगर प्रखंड में भी प्रमुख और उप प्रमुख पर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। जानकारी के मुताबिक, गया नगर प्रखंड चंदौती के प्रखंड प्रमुख और उप प्रमुख के खिलाफ विश्वास प्रस्ताव लाने को लेकर कई पंचायत समिति सदस्यों ने एकजुट होकर बीडीओ को एक आवेदन सौंपा है।
पंचायत समिति सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर समय निर्धारित करने की मांग बीडीओ को लिखित आवेदन के माध्यम से की है। इसे लेकर पूर्व प्रमुख सुचिता रंजनी के नेतृत्व में दर्जनों से अधिक पंचायत समिति सदस्यों द्वारा बीडीओ को ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि हम सभी पंचायत समिति सदस्य प्रखंड के प्रमुख-उप प्रमुख के कार्यों से हम लोग असंतुष्ट हैं। वर्तमान प्रमुख और उप प्रमुख के द्वारा नियम संगत कार्य नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण हम लोगों के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाकर इन्हें पद से हटाना चाहते हैं। अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन सौंपने वालों में प्रखंड प्रमुख सह पंचायत समिति क्षेत्र संख्या 8 की सुचिता रंजनी, पंचायत समिति क्षेत्र संख्या 13 की पिंकी देवी, पंचायत समिति क्षेत्र संख्या 14 की आशा देवी, खुशबू देवी, पुनी देवी, शहजादी खातून और मंजू देवी आदि पंचायत समिति सदस्य शामिल रहे।
क्या है अविश्वास प्रस्ताव
संसदीय प्रक्रिया में अविश्वास प्रस्ताव या विश्वासमत (वैकल्पिक रूप से अविश्वासमत) अथवा निंदा प्रस्ताव एक संसदीय प्रस्ताव है। इसे पारंपरिक रूप से विपक्ष द्वारा सदन में एक सरकार को हटाने या कमजोर करने की उम्मीद से रखा जाता है। यह प्रक्रिया तब अपनायी जाती है, जब जिला परिषद चेयरमैन और प्रखंड प्रमुख के कार्यकाल के दो साल बीत जाते हैं। विपक्ष के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का ज्ञापन सौंपने के बाद जिलाधिकारियों सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तिथि तय की जाती है। उसके बाद दो पक्षों की ओर से सदन में अपनी-अपनी बातों को रखा जाता है। उसके बाद अविश्वास प्रस्ताव के लिए प्रत्याशियों के पक्ष और विपक्ष में पार्षद व प्रखंड में पंचायत समिति सदस्य वोट देते हैं। उस दौरान जिनके पक्ष में मतों की संख्या आधे से अधिक होती है, वही फिर कुर्सी पर काबिज हो जाता है।
डुमरिया ब्लॉक प्रमुख व उप प्रमुख पर 10 सदस्यों ने हस्ताक्षरयुक्त अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सौंपा ज्ञापन
इस बार देश में होने वाले लोकसभा चुनाव का असर गया जिले से लेकर प्रखंडों तक पहुंच गया है, जहां जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। यहां जिला परिषद अध्यक्ष पद पर काबिज नैना कुमारी और उपाध्यक्ष डॉ. शीतल प्रसाद यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए ज्ञापन सौंपा है। वहीं, मंगलवार को गया जिले के डुमरिया प्रखंड में भी देखने को मिला। जानकारी के मुताबिक, डुमरिया प्रखंड प्रमुख संतोष कुमार गुप्ता और उप प्रमुख पलीता देवी पर पंचायत समिति सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर समय निर्धारित करने के लिए मंगलवार को डुमरिया प्रखंड विकास पदाधिकारी को 10 पंचायत समिति सदस्य ने प्रखंड प्रमुख और उप प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है।
अविश्वास प्रस्ताव लाने को लेकर 10 सदस्य एकजुट हो गए हैं। इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बताया कि डुमरिया पंचायत समिति के 16 सदस्यीय सदन के 10 सदस्यों ने प्रखंड प्रमुख संतोष गुप्ता और उप प्रमुख पलीता देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। अभी अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक की तिथि तय नहीं की गई है। जल्द ही तिथि निर्धारित कर सदस्यों को सूचना दी जाएगी।
वहीं, इस संबंध में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सेवरा पंचायत के सदस्य आशा देवी, नंदई के सदस्य पूर्व प्रमुख रामचंद्र सिंह, नारायणपुर पंचायत के सदस्य जितेंद्र दास, अर्जुन प्रसाद, अजय कुमार, रविंद्र सिंह, काचर के सदस्य नीतू देवी, छकरबंधा के सदस्य ललिता देवी, सुनैना देवी मंझौली के सदस्य ममता देवी ने अविश्वास प्रस्ताव लाया है।
फोन पर समिति ने बताया कि प्रमुख और उप प्रमुख सदस्यों द्वारा मान सम्मान न दिया जाना, पंचायत समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के प्रस्ताव को जिला परिषद की बैठक में नहीं लिखवाना, अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करना, 15 वित्त और छठी वित्त राशि से विकास योजना को वंचित रखने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि साथ ही सदस्यों को मान सम्मान न दिए जाने और विकास योजना में रुचि नहीं लिए जाने का आरोप लगाया गया है। वहीं, सही समय पर बैठक नहीं बुलाना, बैठक की सूचना सभी सदस्यों को नहीं दिए जाना मुख्य कारण है।