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Bihar: गया के वीर सपूत का शौर्य सलाम, आतंकियों से लोहा लेने वाले मेजर आशीष को मिला शौर्य पदक
Wed, 10 Jun 2026 08:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 08:27 AM IST
सार
बिहार के गया जिले के कोच बाजार निवासी मेजर आशीष कुमार को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान असाधारण वीरता और नेतृत्व का परिचय देने पर शौर्य पदक से सम्मानित किया गया है।
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मेजर आशीष
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार के गया जिले के लिए गर्व की बड़ी खबर सामने आई है। गया के कोच बाजार की गलियों से निकलकर भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स में सेवा दे रहे मेजर आशीष कुमार ने अपने साहस, नेतृत्व और पराक्रम से पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए एक बेहद चुनौतीपूर्ण अभियान में असाधारण वीरता दिखाने के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान शौर्य पदक से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इस उपलब्धि के बाद पूरे गया जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।
कोच बाजार से राष्ट्रपति भवन तक का प्रेरणादायक सफर
गया जिले के कोच बाजार निवासी और मेडिकल व्यवसायी देवीशंकर प्रसाद अग्रवाल के पुत्र मेजर आशीष कुमार वर्तमान में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 7 पैरा स्पेशल फोर्स में तैनात हैं। अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर उन्होंने सेना में एक खास पहचान बनाई है। अब उनकी बहादुरी और नेतृत्व क्षमता को देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों में से एक शौर्य पदक के रूप में सम्मान मिला है। यह सम्मान उनके साथ-साथ पूरे बिहार और गया जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है।
अनंतनाग ऑपरेशन में दिखाई असाधारण वीरता
जानकारी के अनुसार, नवंबर 2024 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग क्षेत्र में आतंकवादियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया गया था। इस अभियान का नेतृत्व मेजर आशीष कुमार कर रहे थे। ऑपरेशन के दौरान हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे और हर कदम पर खतरा मौजूद था। इसके बावजूद मेजर आशीष कुमार ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने जवानों का नेतृत्व किया और पूरे अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया। उनकी सूझबूझ, त्वरित निर्णय क्षमता और साहसिक नेतृत्व के चलते सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली। इस अभियान में दो आतंकवादियों को मार गिराया गया था। सेना ने उनके असाधारण साहस और नेतृत्व को देखते हुए उन्हें शौर्य पदक के लिए अनुशंसित किया था।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित
नई दिल्ली में आयोजित रक्षा स्पेशल फोर्सेज अलंकरण समारोह-2026 के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मेजर आशीष कुमार को शौर्य पदक प्रदान किया। यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत साहस और वीरता का प्रतीक नहीं है, बल्कि भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना का भी सम्मान है।
गया और बिहार में खुशी की लहर
मेजर आशीष कुमार को शौर्य पदक मिलने की खबर जैसे ही गया के कोच बाजार पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजन, रिश्तेदार, मित्र, शुभचिंतक और स्थानीय लोग उनके घर पहुंचकर परिवार को बधाई देने लगे। ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसे पूरे गया जिले और बिहार के लिए गौरव का क्षण बताया। लोगों का कहना है कि मेजर आशीष की यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
ये भी पढ़ें: दहेज में नहीं मिली कार तो ली जान? पूर्णिया में विवाहिता की मौत; शरीर पर मिले चोट के निशान, पति गिरफ्तार
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेजर आशीष कुमार ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों और कस्बों से निकलने वाले युवा भी अपने साहस, समर्पण, अनुशासन और कड़ी मेहनत के दम पर देश के सर्वोच्च सम्मानों तक पहुंच सकते हैं। उनकी सफलता न केवल गया बल्कि पूरे बिहार के युवाओं को देश सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करेगी।
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कोच बाजार से राष्ट्रपति भवन तक का प्रेरणादायक सफर
गया जिले के कोच बाजार निवासी और मेडिकल व्यवसायी देवीशंकर प्रसाद अग्रवाल के पुत्र मेजर आशीष कुमार वर्तमान में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 7 पैरा स्पेशल फोर्स में तैनात हैं। अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर उन्होंने सेना में एक खास पहचान बनाई है। अब उनकी बहादुरी और नेतृत्व क्षमता को देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों में से एक शौर्य पदक के रूप में सम्मान मिला है। यह सम्मान उनके साथ-साथ पूरे बिहार और गया जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है।
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अनंतनाग ऑपरेशन में दिखाई असाधारण वीरता
जानकारी के अनुसार, नवंबर 2024 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग क्षेत्र में आतंकवादियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया गया था। इस अभियान का नेतृत्व मेजर आशीष कुमार कर रहे थे। ऑपरेशन के दौरान हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे और हर कदम पर खतरा मौजूद था। इसके बावजूद मेजर आशीष कुमार ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने जवानों का नेतृत्व किया और पूरे अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया। उनकी सूझबूझ, त्वरित निर्णय क्षमता और साहसिक नेतृत्व के चलते सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली। इस अभियान में दो आतंकवादियों को मार गिराया गया था। सेना ने उनके असाधारण साहस और नेतृत्व को देखते हुए उन्हें शौर्य पदक के लिए अनुशंसित किया था।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित
नई दिल्ली में आयोजित रक्षा स्पेशल फोर्सेज अलंकरण समारोह-2026 के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मेजर आशीष कुमार को शौर्य पदक प्रदान किया। यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत साहस और वीरता का प्रतीक नहीं है, बल्कि भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना का भी सम्मान है।
गया और बिहार में खुशी की लहर
मेजर आशीष कुमार को शौर्य पदक मिलने की खबर जैसे ही गया के कोच बाजार पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजन, रिश्तेदार, मित्र, शुभचिंतक और स्थानीय लोग उनके घर पहुंचकर परिवार को बधाई देने लगे। ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसे पूरे गया जिले और बिहार के लिए गौरव का क्षण बताया। लोगों का कहना है कि मेजर आशीष की यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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युवाओं के लिए बने प्रेरणा
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेजर आशीष कुमार ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों और कस्बों से निकलने वाले युवा भी अपने साहस, समर्पण, अनुशासन और कड़ी मेहनत के दम पर देश के सर्वोच्च सम्मानों तक पहुंच सकते हैं। उनकी सफलता न केवल गया बल्कि पूरे बिहार के युवाओं को देश सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करेगी।