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बिहार: पानी के बीच दो हजार जिंदगियां कैद! उफनती नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण, भतीजी को खाट पर ले गए अस्पताल
Wed, 02 Sep 2026 06:54 PM IST
मगध ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,गया
Published by: मगध ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 06:54 PM IST
सार
गया के इमामगंज विधानसभा क्षेत्र का भगहर गांव भारी बारिश के बाद एक बार फिर टापू बन गया है। करीब दो हजार लोग चारों ओर पानी से घिरे हैं। 10 दिन से स्कूल बंद है और राशन-गैस की आपूर्ति ठप है। बीमार लोगों को खाट पर लादकर उफनती मोरहर नदी पार करानी पड़ रही है।
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भगहर गांव भारी बारिश के बाद एक बार फिर टापू बना
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
नेपाल में आई बाढ़ और झारखंड में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब मगध प्रमंडल में भी साफ दिखने लगा है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से गया जिले के इमामगंज विधानसभा क्षेत्र का भगहर गांव एक बार फिर टापू बन गया है। करीब दो हजार की आबादी चारों ओर पानी से घिरी हुई है। गांव तक पहुंचने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा है। लोग जान जोखिम में डालकर उफनती मोरहर नदी पार कर रहे हैं। स्कूल में पिछले 10 दिनों से ताला लटका है, गैस और राशन की आपूर्ति ठप है और कोई बीमार पड़ जाए तो उसे खाट पर लादकर नदी पार कर अस्पताल ले जाना मजबूरी बन गई है।
नदी पार करना रोज की मजबूरी, बीमार भतीजी को खाट पर ले गए
गांव के युवा अंदीप कुमार बताते हैं कि गांव की स्थिति बेहद खराब है। आने-जाने का कोई साधन नहीं है। पिछले 10 दिनों से स्कूल बंद है। राशन और गैस गांव तक नहीं पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि उनकी भतीजी बीमार हो गई थी। हालत बिगड़ने पर उसे खाट पर लादकर उफनती नदी पार कर इमामगंज ले जाया गया, तब जाकर उसका इलाज हो सका। अब हर जरूरी सामान जान जोखिम में डालकर लाना पड़ रहा है।
स्कूल पर ताला, बच्चों की पढ़ाई ठप
ग्रामीण अंकित कुमार कहते हैं कि गांव का स्कूल पिछले 10 दिनों से बंद है। शिक्षक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। बच्चे घरों में कैद हैं। सब्जी और अन्य जरूरी सामान भी मुश्किल से मिल रहा है। लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
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बेटी बहने लगी, ग्रामीणों ने बचाई जान
गांव के अजय प्रसाद बताते हैं कि उनकी बेटी बैंके बाजार में एडमिशन कराने गई थी। लौटते समय मोरहर नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और वह बहने लगी। गांव के लोगों ने किसी तरह उसकी जान बचाई।अजय कहते हैं कि वह राजमिस्त्री का काम करते हैं और रोज इसी नदी को पार करना उनकी मजबूरी है। उन्होंने बताया कि 1976 से हर साल बाढ़ देख रहे हैं, लेकिन आज तक पुल नहीं बना।उन्होंने कहा कि पहले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने पुल का आश्वासन दिया था। गांव के एक ही परिवार के चार लोग नदी में बह गए थे, लेकिन आज तक न मुआवजा मिला और न ही स्थायी समाधान हुआ।
ये भी पढ़ें- बिहार: बॉर्डर पर दबोचा गया हवाला कैरियर, अस्पताल के पास से ली रकम; दुकान पहुंचाने से पहले एसएसबी के हत्थे चढ़ा
आजादी के बाद भी गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित
ग्रामीण वीरेंद्र प्रसाद कहते हैं कि भगहर गांव चारों तरफ से पानी में घिर चुका है। पहले जो वैकल्पिक रास्ता था, वह भी इस बार बंद हो गया है। बच्चों की पढ़ाई हर साल कई महीने प्रभावित होती है। खाना बनाने के लिए गैस नहीं है, लोग लकड़ी जलाकर भोजन बना रहे हैं। गांव की एक बच्ची दो दिन तक बीमार रही। इसके बाद उसे पानी के बीच से बाहर निकालकर स्थानीय डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पिछले साल सांसद अभय कुशवाहा गांव आए थे और समस्या लोकसभा में उठाने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। वहीं, वर्तमान विधायक दीपा मांझी के भी गांव नहीं आने का आरोप लगाया।
हर साल चार महीने यही हाल रहता है
इमामगंज नगर पंचायत के अध्यक्ष प्रतिनिधि भवानी सिंह ने कहा कि भगहर गांव हर साल करीब चार महीने तक टापू बन जाता है। नदी में पानी बढ़ते ही शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरी सुविधाएं पूरी तरह ठप हो जाती हैं। गैस सिलेंडर तक गांव नहीं पहुंच पा रहा है।उन्होंने कहा कि नगर पंचायत गैस एजेंसियों से बात कर रही है और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक मदद भी दी जाएगी।
पुल ही स्थायी समाधान, अधिकारियों को भेजा गया प्रस्ताव
इमामगंज नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी आशुतोष रंजन पाण्डेय ने बताया कि भगहर गांव की सबसे बड़ी जरूरत पुल निर्माण है। इसकी जानकारी गया के जिलाधिकारी, आपदा विभाग, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन और विधायक दीपा मांझी को दी गई है। गांव के लोगों का ज्ञापन भी उच्च अधिकारियों तक भेजा गया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य टीम को गांव में लगाया गया है। शिक्षकों के गांव में ठहरने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। गैस एजेंसियों से भी बात चल रही है। साथ ही, लोगों के आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था कराने की मांग भी उच्च अधिकारियों से की जाएगी।
पुल नहीं बना तो हर बारिश बनेगी आफत
भगहर गांव की कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों ग्रामीण इलाकों की हकीकत है, जहां हर बारिश के साथ लोगों की जिंदगी पानी में घिर जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि राहत सामग्री से ज्यादा उन्हें एक मजबूत पुल चाहिए, ताकि हर साल बाढ़ के साथ आने वाली यह त्रासदी हमेशा के लिए खत्म हो सके।
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नदी पार करना रोज की मजबूरी, बीमार भतीजी को खाट पर ले गए
गांव के युवा अंदीप कुमार बताते हैं कि गांव की स्थिति बेहद खराब है। आने-जाने का कोई साधन नहीं है। पिछले 10 दिनों से स्कूल बंद है। राशन और गैस गांव तक नहीं पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि उनकी भतीजी बीमार हो गई थी। हालत बिगड़ने पर उसे खाट पर लादकर उफनती नदी पार कर इमामगंज ले जाया गया, तब जाकर उसका इलाज हो सका। अब हर जरूरी सामान जान जोखिम में डालकर लाना पड़ रहा है।
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स्कूल पर ताला, बच्चों की पढ़ाई ठप
ग्रामीण अंकित कुमार कहते हैं कि गांव का स्कूल पिछले 10 दिनों से बंद है। शिक्षक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। बच्चे घरों में कैद हैं। सब्जी और अन्य जरूरी सामान भी मुश्किल से मिल रहा है। लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
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बेटी बहने लगी, ग्रामीणों ने बचाई जान
गांव के अजय प्रसाद बताते हैं कि उनकी बेटी बैंके बाजार में एडमिशन कराने गई थी। लौटते समय मोरहर नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और वह बहने लगी। गांव के लोगों ने किसी तरह उसकी जान बचाई।अजय कहते हैं कि वह राजमिस्त्री का काम करते हैं और रोज इसी नदी को पार करना उनकी मजबूरी है। उन्होंने बताया कि 1976 से हर साल बाढ़ देख रहे हैं, लेकिन आज तक पुल नहीं बना।उन्होंने कहा कि पहले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने पुल का आश्वासन दिया था। गांव के एक ही परिवार के चार लोग नदी में बह गए थे, लेकिन आज तक न मुआवजा मिला और न ही स्थायी समाधान हुआ।
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आजादी के बाद भी गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित
ग्रामीण वीरेंद्र प्रसाद कहते हैं कि भगहर गांव चारों तरफ से पानी में घिर चुका है। पहले जो वैकल्पिक रास्ता था, वह भी इस बार बंद हो गया है। बच्चों की पढ़ाई हर साल कई महीने प्रभावित होती है। खाना बनाने के लिए गैस नहीं है, लोग लकड़ी जलाकर भोजन बना रहे हैं। गांव की एक बच्ची दो दिन तक बीमार रही। इसके बाद उसे पानी के बीच से बाहर निकालकर स्थानीय डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पिछले साल सांसद अभय कुशवाहा गांव आए थे और समस्या लोकसभा में उठाने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। वहीं, वर्तमान विधायक दीपा मांझी के भी गांव नहीं आने का आरोप लगाया।
हर साल चार महीने यही हाल रहता है
इमामगंज नगर पंचायत के अध्यक्ष प्रतिनिधि भवानी सिंह ने कहा कि भगहर गांव हर साल करीब चार महीने तक टापू बन जाता है। नदी में पानी बढ़ते ही शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरी सुविधाएं पूरी तरह ठप हो जाती हैं। गैस सिलेंडर तक गांव नहीं पहुंच पा रहा है।उन्होंने कहा कि नगर पंचायत गैस एजेंसियों से बात कर रही है और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक मदद भी दी जाएगी।
पुल ही स्थायी समाधान, अधिकारियों को भेजा गया प्रस्ताव
इमामगंज नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी आशुतोष रंजन पाण्डेय ने बताया कि भगहर गांव की सबसे बड़ी जरूरत पुल निर्माण है। इसकी जानकारी गया के जिलाधिकारी, आपदा विभाग, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन और विधायक दीपा मांझी को दी गई है। गांव के लोगों का ज्ञापन भी उच्च अधिकारियों तक भेजा गया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य टीम को गांव में लगाया गया है। शिक्षकों के गांव में ठहरने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। गैस एजेंसियों से भी बात चल रही है। साथ ही, लोगों के आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था कराने की मांग भी उच्च अधिकारियों से की जाएगी।
पुल नहीं बना तो हर बारिश बनेगी आफत
भगहर गांव की कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों ग्रामीण इलाकों की हकीकत है, जहां हर बारिश के साथ लोगों की जिंदगी पानी में घिर जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि राहत सामग्री से ज्यादा उन्हें एक मजबूत पुल चाहिए, ताकि हर साल बाढ़ के साथ आने वाली यह त्रासदी हमेशा के लिए खत्म हो सके।