Bihar: संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार महारैली में उपेंद्र कुशवाहा ने भरी हुंकार, विकास के मुद्दे पर कही ये बात
Bihar: सभा को संबोधित करते हुए कुशवाहा ने कहा कि परिसीमन का मुद्दा सीधे जनता के हक से जुड़ा हुआ है। संविधान के अनुसार हर दस साल पर जनगणना के बाद परिसीमन होना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर
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राष्ट्रीय लोक मोर्चा के संयोजक उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि क्षेत्र के समग्र विकास और न्यायसंगत संसदीय प्रतिनिधित्व के लिए परिसीमन सुधार बेहद जरूरी है। वह रविवार को गया के गांधी मैदान में आयोजित संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार महारैली को संबोधित कर रहे थे।
रैली में गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, नवादा, अरवल, नालंदा, शेखपुरा, जमुई, लखीसराय समेत बाढ़ से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। गांधी मैदान पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने फूल-माला पहनाकर उपेंद्र कुशवाहा का जोरदार स्वागत किया। दीप प्रज्ज्वलन कर उन्होंने सभा का उद्घाटन किया।
सभा को संबोधित करते हुए कुशवाहा ने कहा कि परिसीमन का मुद्दा सीधे जनता के हक से जुड़ा हुआ है। संविधान के अनुसार हर दस साल पर जनगणना के बाद परिसीमन होना चाहिए, लेकिन 1976 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान इसे 25 वर्षों के लिए स्थगित कर दिया था, जिसे बाद में और आगे बढ़ा दिया गया। इसका नुकसान बिहार समेत पूरे उत्तर भारत को भुगतना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में जहां औसतन 21 लाख की आबादी पर एक सांसद है, वहीं बिहार में 31 लाख लोगों पर एक सांसद है। इससे न तो सही प्रतिनिधित्व मिल पा रहा है और न ही विकास का पैसा न्यायपूर्ण तरीके से आबंटित हो रहा है। इसलिए 2026 में हर हाल में परिसीमन में सुधार की लड़ाई लड़नी होगी।
कुशवाहा ने कहा कि लोगों को ‘फोटो कॉपी’ नेताओं से सावधान रहना होगा। ये लोग तरह-तरह के षड्यंत्र रचते रहते हैं। पहले भी षड्यंत्र किए गए थे, लेकिन इस बार सभी को सतर्क रहना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे विधानसभा में उनके हाथ मजबूत करें। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों को उठाने में वह कभी पीछे नहीं हटेंगे और कोर्ट की गलत प्रक्रिया पर भी सवाल उठाएंगे क्योंकि उनके हाथ साफ हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के जिलाध्यक्ष बंटी कुशवाहा, अशोक मेहता, माधव आनंद, मदन चौधरी, रामेश्वर महतो सहित कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।
राजद के लोग कभी नहीं सुधरेंगे
सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में सभी को पूरी सतर्कता बरतनी होगी। यह बहुत जरूरी है कि बिहार में एनडीए की ही सरकार बने। महागठबंधन के लोग फिर से सत्ता में आने की कोशिश में जुटे हैं। कई लोग कहते हैं कि अब लगता है राजद के लोग सुधर गए हैं, लेकिन भैया! सचेत रहिएगा राजद के लोग कभी नहीं सुधरने वाले हैं।
हमारा तो मानना है कि अगर किसी की गलती या चूक की वजह से महागठबंधन की सरकार बन गई तो बिहार की हालत 2005 के पहले से भी खराब हो जाएगी। इसलिए किसी भी हालत में महागठबंधन को सत्ता में वापस नहीं आने देना है।
दिल्ली में भी काम करने वाली सरकार है और पटना में भी हमें काम करने वाली सरकार चाहिए। इसलिए बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में फिर से एनडीए की सरकार बनानी है। आप सभी लोग इसमें पूरा सहयोग करें। पिछले लोकसभा चुनाव में जो कुछ गलतियां हुई थीं, उन्हें दोहराना नहीं है।