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Bihar Assembly Election 2025 : निर्दलीय को मिला ओवैसी का समर्थन, फिर भी उनके लालू भगवान, जाने क्यों?
Thu, 30 Oct 2025 03:05 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Thu, 30 Oct 2025 03:05 PM IST
सार
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में औरंगाबाद की नबीनगर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी मृत्युंजय यादव को असदुद्दीन ओवैसी, चंद्रशेखर रावण और स्वामी प्रसाद मौर्य का समर्थन मिला है।
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मृत्युंजय यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में औरंगाबाद के नबीनगर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे मृत्युंजय यादव को अब कई बड़े नेताओं का समर्थन मिल गया है। उन्हें एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, दलित नेता चंद्रशेखर रावण, और उत्तर प्रदेश के पिछड़े वर्ग के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का समर्थन मिला है। तीनों नेताओं के राजनीतिक दलों का गठबंधन ग्रांड डेमोक्रेटिक अलायंस (GDA) या लोकतांत्रिक महागठबंधन है। इसी गठबंधन की ओर से यह ऐलान किया गया कि नबीनगर से मृत्युंजय यादव को उनका समर्थन मिलेगा।
आसपा (कांशीराम) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जौहर खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मृत्युंजय यादव ने पार्टी को लिखित में कहा था कि वे बहुजन समाज की विचारधारा में विश्वास रखते हैं और गठबंधन का समर्थन चाहते हैं। चूंकि नबीनगर से जीडीए का कोई उम्मीदवार नहीं था, इसलिए पार्टी ने उनके अनुरोध पर विचार किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष की सहमति के बाद मृत्युंजय यादव को समर्थन देने का फैसला लिया गया।
जौहर खान ने दावा किया कि अब नबीनगर में समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज और मृत्युंजय यादव की जीत तय है। उन्होंने यह भी कहा कि असदुद्दीन ओवैसी, चंद्रशेखर रावण, और स्वामी प्रसाद मौर्य खुद नबीनगर आकर मृत्युंजय यादव के लिए प्रचार करेंगे ताकि उनकी जीत सुनिश्चित हो सके।
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बिहार में 55 सीटों पर क्यों लड़ रही जीडीए
जौहर खान ने कहा कि अगर लालू यादव और तेजस्वी यादव टिकट सही तरीके से बांटते, तो आज बहुजनों की सरकार बन जाती। उन्होंने राजद का नाम लिए बिना कहा, “कोई जेल से बचने के लिए सुलह कर रहा है, कोई घोटाले से बचने के लिए और कोई अपनी जायदाद बचाने के लिए सुलह कर रहा है। इससे अपने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई है। 20% में से 18% को किनारे लगा दिया गया है। इससे उनकी विचारधारा खत्म हो गई है और अब राजद भी खत्म होती दिख रही है।” फिर भी उन्होंने कहा कि हमारी लालू से कोई दुश्मनी नहीं है।
इसी वजह से जीडीए ने राज्य की सिर्फ 55 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और बाकी सीटें महागठबंधन के लिए छोड़ी हैं ताकि बाद में यह न कहा जा सके कि हमारी वजह से राजद हारी और भाजपा जीत गई।
जीडीए के पास होगी सत्ता की चाबी
उन्होंने कहा कि इस बार किसी भी गठबंधन से “ढाई प्रतिशत आबादी वाला मुख्यमंत्री” नहीं बनेगा, क्योंकि GDA ज्यादा सीटें जीतकर सत्ता की चाबी अपने पास रखेगा। उन्होंने घोषणा कि, “हम दलित और मुसलमानों को मुख्यमंत्री बनाएंगे, ढाई साल दलित मुख्यमंत्री और ढाई साल मुस्लिम मुख्यमंत्री रहेगा।”
“मुस्लिम और यादव वोटर अब स्मार्ट हो गए हैं”
जौहर खान ने कहा कि अब मुस्लिम और यादव वोटर बहुत समझदार हो गए हैं। उन्होंने कहा, “लालू-तेजस्वी को अब ‘माय समीकरण’ भूल जाना चाहिए, क्योंकि अब वोटर पार्टी नहीं, उम्मीदवार देखते हैं। नबीनगर में यादव, मुस्लिम और बहुजन समाज के लोग मृत्युंजय यादव को समर्थन दे रहे हैं। तेजस्वी लाख कोशिश कर लें, लेकिन यहां के लोग अब अपने ‘बेटे’ मृत्युंजय यादव को विधानसभा भेजने जा रहे हैं।”
पढे़ं: 'पीएम मोदी का दिल अहमदाबाद में, नीतीश का राजगीर में और लालू का बेटे में बसता है', ओवैसी का तंज
“लालू मेरे भगवान हैं”
GDA का समर्थन मिलने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी मृत्युंजय यादव ने कहा, “लालू यादव मेरे भगवान हैं, और मैं अपने भगवान से जरूर मिलूंगा, लेकिन तब, जब जीतकर पूरी ताकत के साथ उनके सामने जाऊंगा। तब वह मेरी पीठ थपथपाएंगे। वह पल मेरे जीवन का सबसे यादगार होगा।”
जब उनसे पूछा गया कि “क्या इसका मतलब है कि जीतने के बाद आप लालू के साथ चले जाएंगे?”, तो उन्होंने जवाब दिया , “मैं आज भी भगवान की पार्टी में हूं, लेकिन भगवान की कोई पार्टी नहीं होती। मेरे लिए जनता ही भगवान है और वही मेरे लिए सबसे अहम है।”
उन्होंने आगे कहा, “अब यादव जाति के लोग परिपक्व और समझदार हो गए हैं। वे अब सिर्फ नाम पर वोट नहीं देंगे, बल्कि अच्छे उम्मीदवार को चुनेंगे। नबीनगर के यादव, मुसलमान और बहुजन समाज अब तेजस्वी नहीं, बल्कि अपने बेटे मृत्युंजय को जीताने जा रहे हैं, इसका नतीजा चुनाव परिणाम में दिखेगा।”
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आसपा (कांशीराम) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जौहर खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मृत्युंजय यादव ने पार्टी को लिखित में कहा था कि वे बहुजन समाज की विचारधारा में विश्वास रखते हैं और गठबंधन का समर्थन चाहते हैं। चूंकि नबीनगर से जीडीए का कोई उम्मीदवार नहीं था, इसलिए पार्टी ने उनके अनुरोध पर विचार किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष की सहमति के बाद मृत्युंजय यादव को समर्थन देने का फैसला लिया गया।
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जौहर खान ने दावा किया कि अब नबीनगर में समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज और मृत्युंजय यादव की जीत तय है। उन्होंने यह भी कहा कि असदुद्दीन ओवैसी, चंद्रशेखर रावण, और स्वामी प्रसाद मौर्य खुद नबीनगर आकर मृत्युंजय यादव के लिए प्रचार करेंगे ताकि उनकी जीत सुनिश्चित हो सके।
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बिहार में 55 सीटों पर क्यों लड़ रही जीडीए
जौहर खान ने कहा कि अगर लालू यादव और तेजस्वी यादव टिकट सही तरीके से बांटते, तो आज बहुजनों की सरकार बन जाती। उन्होंने राजद का नाम लिए बिना कहा, “कोई जेल से बचने के लिए सुलह कर रहा है, कोई घोटाले से बचने के लिए और कोई अपनी जायदाद बचाने के लिए सुलह कर रहा है। इससे अपने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई है। 20% में से 18% को किनारे लगा दिया गया है। इससे उनकी विचारधारा खत्म हो गई है और अब राजद भी खत्म होती दिख रही है।” फिर भी उन्होंने कहा कि हमारी लालू से कोई दुश्मनी नहीं है।
इसी वजह से जीडीए ने राज्य की सिर्फ 55 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और बाकी सीटें महागठबंधन के लिए छोड़ी हैं ताकि बाद में यह न कहा जा सके कि हमारी वजह से राजद हारी और भाजपा जीत गई।
जीडीए के पास होगी सत्ता की चाबी
उन्होंने कहा कि इस बार किसी भी गठबंधन से “ढाई प्रतिशत आबादी वाला मुख्यमंत्री” नहीं बनेगा, क्योंकि GDA ज्यादा सीटें जीतकर सत्ता की चाबी अपने पास रखेगा। उन्होंने घोषणा कि, “हम दलित और मुसलमानों को मुख्यमंत्री बनाएंगे, ढाई साल दलित मुख्यमंत्री और ढाई साल मुस्लिम मुख्यमंत्री रहेगा।”
“मुस्लिम और यादव वोटर अब स्मार्ट हो गए हैं”
जौहर खान ने कहा कि अब मुस्लिम और यादव वोटर बहुत समझदार हो गए हैं। उन्होंने कहा, “लालू-तेजस्वी को अब ‘माय समीकरण’ भूल जाना चाहिए, क्योंकि अब वोटर पार्टी नहीं, उम्मीदवार देखते हैं। नबीनगर में यादव, मुस्लिम और बहुजन समाज के लोग मृत्युंजय यादव को समर्थन दे रहे हैं। तेजस्वी लाख कोशिश कर लें, लेकिन यहां के लोग अब अपने ‘बेटे’ मृत्युंजय यादव को विधानसभा भेजने जा रहे हैं।”
पढे़ं: 'पीएम मोदी का दिल अहमदाबाद में, नीतीश का राजगीर में और लालू का बेटे में बसता है', ओवैसी का तंज
“लालू मेरे भगवान हैं”
GDA का समर्थन मिलने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी मृत्युंजय यादव ने कहा, “लालू यादव मेरे भगवान हैं, और मैं अपने भगवान से जरूर मिलूंगा, लेकिन तब, जब जीतकर पूरी ताकत के साथ उनके सामने जाऊंगा। तब वह मेरी पीठ थपथपाएंगे। वह पल मेरे जीवन का सबसे यादगार होगा।”
जब उनसे पूछा गया कि “क्या इसका मतलब है कि जीतने के बाद आप लालू के साथ चले जाएंगे?”, तो उन्होंने जवाब दिया , “मैं आज भी भगवान की पार्टी में हूं, लेकिन भगवान की कोई पार्टी नहीं होती। मेरे लिए जनता ही भगवान है और वही मेरे लिए सबसे अहम है।”
उन्होंने आगे कहा, “अब यादव जाति के लोग परिपक्व और समझदार हो गए हैं। वे अब सिर्फ नाम पर वोट नहीं देंगे, बल्कि अच्छे उम्मीदवार को चुनेंगे। नबीनगर के यादव, मुसलमान और बहुजन समाज अब तेजस्वी नहीं, बल्कि अपने बेटे मृत्युंजय को जीताने जा रहे हैं, इसका नतीजा चुनाव परिणाम में दिखेगा।”