Bihar : पटना में धंसने पर नीतीश सरकार ने खुद तोड़ा फ्लाईओवर; सात महीने में क्या बना, यह देखिए
Bihar : बिहार सरकार गंगा नदी के बीच गिरे विक्रमशिला सेतु के हिस्से को तीन महीने में बनाने का दावा कर रही है। वहीं पटना में अपनी इज्जत बचाने के लिए जानबूझकर ध्वस्त किए गए पुल को 7 महीने में भी सरकार बना नहीं पाई।
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विस्तार
बिहार सरकार भागलपुर के क्षतिग्रस्त विक्रमशिला पुल को तीन महीने में दुरुस्त करने का दावा कर रही है, जबकि उस पुल के नीचे अभी भी पानी की तेज धार है। वहीं दूसरी तरफ सूखी जमीन पर पटना में फ्लाईओवर का निर्माण कराया जा रहा है। सरकार ने अपनी इज्जत बचाने के लिए फ्लाईओवर को पूरी तरह तोड़ दिया और फिर नए सिरे से उसका निर्माण करा रही है। फ्लाईओवर पर आवागमन बंद होने, पुल को तोड़ने और फिर से काम शुरू करने में सात महीने लग गए, लेकिन काम अब तक पूरा नहीं हो पाया। 'अमर उजाला' ने इसकी पड़ताल की, तो जो तथ्य सामने आए वह भी चौंकाने वाले थे। महज 6 से 10 मजदूरों के जिम्मे इस ओवरब्रिज के निर्माण की जिम्मेदारी है।
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कब से बंद है फ्लाईओवर ?
4 अक्टूबर 2025 से मीठापुर फ्लाईओवर पर आवागमन बंद है, जिससे आमलोगों की परेशानी बेहिसाब बढ़ी हुई है। मीठापुर स्थित फ्लाईओवर करबिगहिया से दानापुर जाने के लिए लाइफलाइन के रूप में थी, जो लगभग 6 महीने से बाधित है। स्थानीय लोगों में इसको लेकर नाराजगी और आक्रोश दोनों है। लोगों का आरोप है कि काम में शिथिलता बरती जा रही है, इस वजह से काम की रफ्तार चींटी की चाल में चल रही है।
मीठापुर फ्लाईओवर पर आवागमन बंद के क्या हैं कारण?
4 अक्टूबर 2025 को पटना के मीठापुर फ्लाईओवर के पास भारी बारिश के कारण सब्जी मंडी रोड अचानक धंस गई। इस घटना में दो वाहन फंस गए। यह घटना अहले सुबह हुई थी जिसमें सड़क में लगभग 30 फीट का गहरा गड्ढा बन गया। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इस घटना से इलाके में ट्रैफिक जाम की स्थिति हो गई थी।घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने इस घटना की मुख्य वजह लगातार मूसलाधार बारिश बताया था, जिस बारिश ने मीठापुर फ्लाईओवर की पोल खोल दी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के कारण फ्लाईओवर के नीचे से नाले का पाइप क्षतिग्रस्त हो गया था जिस वजह से यह घटना हुई। इस घटना में 30-40 फीट लंबा सड़क का हिस्सा ढह गया था, जिसमें एक पिकअप वैन और एक ऑटो फंस गया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन भी घटनास्थल पर पहुँच गई और उसी समय राहत और निर्माण को लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। साथ ही मीठापुर फ्लाईओवर पर आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया, जो अब तक बंद है।
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तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था उद्घाटन
मीठापुर-करबिगहिया फ्लाईओवर के मुख्य हिस्से का उद्घाटन जून 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। करबिगहिया से मीठापुर मंडी की ओर के उस हिस्से के निर्माण की लागत लगभग 23 करोड़ रुपये थी। इस फ्लाईओवर के शुरू हो जाने से पटना बाईपास, बेली रोड, कंकड़बाग इलाके से मीठापुर जाना आसान हो गया था। वहीं कंकड़बाग से अनीसाबाद, फुलवारी शरीफ, पटना एम्स जाना भी काफी सुलभ हो गया था।
होने लगी थी राजनीति
4 अक्टूबर 2025 को फ्लाईओवर के लेन का सड़क धंसने पर विपक्ष के साथ भाजपा नेता भी इस मामले पर सवाल उठाया था। वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी सरकार पर सवाल उठाया था, जिसका पलटवार करते हुए तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने तेजस्वी यादव को नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था कि तेजस्वी यादव को बयानवीर की जगह कर्मवीर बनने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि मैं उनको स्थल निरीक्षण करने की चुनौती देता हूँ ताकि आपकी अज्ञानता दूर हो सके।
भाजपा नेता ने कंपनी को ब्लैकलिस्टेड करने की मांग की थी
तत्कालीन भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य कृष्ण सिंह कल्लू ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि यह घटना अपने आप में चिंताजनक है। भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य कृष्ण सिंह कल्लू ने कहा था कि मीठापुर के स्थानीय सड़क का अचानक धंस जाना आश्चर्यजनक तो था ही, लेकिन इसमें अब भ्रष्टाचार और बंदर-बांट की बू आ रही है। उन्होंने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी। साथ ही यह भी मांग की थी कि जिस कंपनी के द्वारा इस कार्य को किया गया उस कंपनी को त्वरित ब्लैकलिस्टेड किया जाए। उन्होंने निर्माण संबंधित ठेकेदार, इंजीनियर, पदाधिकारी सहित सभी लोगों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी, लेकिन उनकी मांग धरी की धरी रह गई। उन्होंने कहा कि निर्माण के महज तीन साल के भीतर ऐसी बड़ी घटना ने इंजीनियरिंग और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
लोगों की परेशानी
आज की तारीख में स्थानीय लोग काफी परेशान हैं। फ्लाईओवर के पास स्थित कई दुकानदार हैं, जिनका कहना है कि अब उनकी दुकान चलती नहीं हैं। आलम यह है कि दुकान में काम करने वाले स्टाफ तक को उनलोगों ने हटाना पड़ गया। इतना ही नहीं वहां धूल-मिटटी के हवा के साथ उड़ने से आसपास के लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। सड़क के किनारे जिनके घर हैं वे लोग अपने घर के दरवाजे और खिड़कियां हमेशा बंद रखते हैं।
स्थानीय लोगों ने लगाया था सड़क निर्माण में लापरवाही का आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि सरकार की लापरवाही के कारण सड़क निर्माण की गुणवत्ता में कमी हुई थी, जिसका खामियाजा आज जनता भुगत रही है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में सड़क निर्माण से लेकर पुल पुलिया के निर्माण में लापरवाही बरती जा रही है। लोगों ने कहा कि ठेकेदार और अधिकारी मिलीभगत करके सारा पैसा खा जाते हैं। यही वजह है कि एक बारिश भी सड़कें नहीं झेल पा रही हैं। बिहार में कई पुलों के गिरने के बाद भी सरकार गंभीर नहीं है।
काम की रफ्तार पर भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि 4 अक्टूबर 2025 को जांच टीम और अधिकारियों के द्वारा कहा जा रहा था कि फ्लाईओवर के नीचे स्थित नाले का पाइप क्षतिग्रस्त होने के कारण सड़क धंसने की घटना हुई है। इससे फ्लाईओवर को कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन उसी समय से फ्लाईओवर पर आवागमन को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। फिर पूरे एक हिस्से के फ्लाईओवर को तोड़ दिया गया। छह महीने बीत गए लेकिन काम अब तक पूरा नहीं हुआ। इसकी वजह के संबंध में स्थानीय लोगों का कहना है कि काम कभी भी लगातार होता ही नहीं है। 'अमर उजाला' ने जब इसकी पड़ताल की तो निर्माण स्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण कार्य में 4 से 6 मजदूर दिखते हैं और कागज़ पर 60 से 70 मजदूर दिखाए जाते हैं। तो जब इस रफ्तार में निर्माण कार्य होगा तो ऐसे में कब तक फ्लाईओवर बनकर तैयार हो पाएगा यह कहना मुश्किल है।
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अलग-अलग संख्या बताते हैं अलग-अलग कर्मी
'अमर उजाला' ने निर्माण स्थल का भौतिक निरीक्षण किया तो पाया कि वहां अक्सर 6 से 8 मजदूर ही काम करते हैं। कभी कम, कभी ज्यादा। फिर भी वहां काम करने वाले मजदूरों, सुपरवाईजर, गार्ड, ठीकेदार, इंजीनियर एवं अन्य स्टाफ से बात करने पर हर किसी ने अलग-अलग संख्या बताई। निर्माणस्थल पर काम करने वाले मजदूरों की संख्या को लेकर 'अमर उजाला' ने हर किसी ने अलग-अलग बात की, जिसमें मजदूरों की संख्या भी अलग-अलग बताई गई। निर्माणस्थल पर मौजूद एक शख्स ने खुद का परिचय रंजीत कुमार के रूप में दी। पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि ओवरऑल सभी कामों को देखता हूं। काम करने वाले लोगों के संबंध में उन्होंने बताया कि इंजीनियर, सुपरवाईजर सहित लगभग 46 लोग यहां काम करते हैं। चार शिफ्ट में काम चलता है। दिन में कुल 30 मजदूर काम करते हैं।
मजदूर और सुपरवाईजर की बातों में जमीन-आसमान का अंतर
वहीं एक मजदूर ने बताया कि अभी यहां 8-9 मजदूर काम कर रहे थे। उस मजदूर ने आगे बताया कि अभी सभी लोग भोजन करने गए हैं। अब भोजन करने के बाद दो तीन घंटा सो जाएंगे, फिर आएंगे तब आगे का काम होगा। विकास रंजन नाम के शख्स ने पहले ऑफ कैमरा बताया कि वह सुपरवाईजर है, फिर कैमरा पर बोला कि मैं कुछ नहीं हूं। पूछने पर उसने कहा कि यहां टीम के तहत काम किया जाता है। उन्होंने बताया कि 60-70-80 मजदूर काम करते हैं। एक शिफ्ट में कम से कम 30-40 आदमी काम करता है। अभी यहां 20 आदमी काम कर रहा था।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग ?
वहीं मजदूरों की संख्या के संबंध में दुकानदार विकास मिश्रा बताते हैं कि निर्माणस्थल पर मजदूर, सुपरवाईजर, ठीकेदार और इंजीनियर सहित कुल 7-8 लोग ही अक्सर देखे जाते हैं। यही संख्या हमेशा रहती है। वहीं रिजवान बताते हैं कि 8-10 लोग ही दिखाई पड़ते हैं। सुबोध कुमार बताते हैं कि 5 से 6 लोग ही काम करते ही दिखाई पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि जिस तरह से काम हो रहा है कम से कम एक से डेढ़ साल लग ही जाएंगे। शैलेश कुमार बताते हैं कि रुक-रूककर जब भी काम होता है, 5 से 6 लोग ही काम करते दिखाई पड़ते हैं। एक गार्ड है जो उपर फ्लाईओवर से देखते रहता है। उन्होंने बताया कि काम रुक-रूककर किया जाता है।