बिहार न्यूज: समस्तीपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर, फिर मंडराया बाढ़ का खतरा
समस्तीपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 45.50 मीटर से करीब एक मीटर ऊपर पहुंच गया है। मोहनपुर, मोहिउद्दीननगर और विद्यापतिनगर के निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है। किसानों को रबी की बुआई प्रभावित होने की चिंता सता रही है।
विस्तार
जिले के मोहनपुर, विद्यापतिनगर और मोहिउद्दीननगर प्रखंडों में बाढ़ का संकट एक बार फिर गहराने लगा है। करीब एक पखवाड़े पहले बाढ़ का पानी उतरने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन अब गंगा के जलस्तर में दोबारा तेजी से वृद्धि होने लगी है। नदी का पानी खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर पहुंच गया है।
बाढ़ नियंत्रण विभाग के सरारी स्थल से मिली जानकारी के अनुसार, गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 45.50 मीटर से करीब एक मीटर ऊपर पहुंच गया है। जलस्तर में अभी भी वृद्धि की प्रवृत्ति बनी हुई है। इसके चलते नदी किनारे के निचले इलाकों और खेतों में दोबारा पानी फैलने लगा है। इससे किसानों और तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
सितंबर के मध्य में भी गंगा के उफान के कारण मोहिउद्दीननगर, विद्यापतिनगर और मोहनपुर के दियारा क्षेत्रों के कई गांव प्रभावित हुए थे। कई स्थानों पर आवागमन और जनजीवन प्रभावित हुआ था। पानी उतरने के बाद लोग धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे थे, लेकिन गंगा का जलस्तर बढ़ने से एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
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खेतों में पानी बढ़ा तो पिछड़ सकती है रबी की बुआई
दियारा क्षेत्र के दर्जनों गांवों के हजारों किसानों के लिए गंगा के जलस्तर में दोबारा वृद्धि परेशानी बढ़ाने वाली है। खरीफ के मौसम में बाढ़ और जलजमाव से खेत प्रभावित होने के बाद किसान खेतों से पानी निकलने और जमीन सूखने का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच नदी का पानी फिर बढ़ने लगा है।
किसानों को आशंका है कि यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा तो रबी की प्रमुख फसलों गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन की समय पर बुआई प्रभावित हो सकती है। खेतों में अधिक नमी रहने से जुताई और बुआई का काम आगे खिसक सकता है। इससे अगली फसल की पैदावार पर भी असर पड़ने की चिंता है।
पानी उतरने के बाद फिर बढ़ी चिंता
गंगा के जलस्तर में पहले कमी आने के बाद लोगों को राहत की उम्मीद जगी थी। हालांकि, कई दियारा क्षेत्रों में बाढ़ का पानी पूरी तरह नहीं निकल पाया था। अब जलस्तर में दोबारा वृद्धि होने से उन इलाकों में चिंता बढ़ गई है, जहां लोग सामान्य स्थिति की ओर लौटने की तैयारी कर रहे थे। निचले इलाकों में पानी का फैलाव बढ़ने पर घरों, पशुओं, चारे और खेती पर असर पड़ सकता है। पहले बाढ़ से प्रभावित रहे ग्रामीण दोबारा जलस्तर बढ़ने के कारण नदी की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
तटवर्ती गांवों में बढ़ी बेचैनी
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ मोहिउद्दीननगर, विद्यापतिनगर और मोहनपुर के दियारा क्षेत्रों में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। सितंबर में जलस्तर बढ़ने के दौरान इन क्षेत्रों के कई निचले इलाकों में पानी पहुंचा था। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन को नाव परिचालन और निगरानी बढ़ानी पड़ी थी। अब दोबारा जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों को घर और खेती के साथ पशुओं और चारे की चिंता भी सताने लगी है।
अभी और बढ़ सकता है पानी
बाढ़ नियंत्रण विभाग के सरारी स्थल के अनुसार, गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 45.50 मीटर से करीब एक मीटर ऊपर है और इसमें वृद्धि की प्रवृत्ति बनी हुई है। ऐसे में आने वाले घंटों में पानी और बढ़ने पर निचले इलाकों में इसका असर बढ़ सकता है।
फिलहाल किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता रबी की बुआई को लेकर है। यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा तो बुआई में देरी हो सकती है। इससे खरीफ के बाद रबी की फसल की तैयारी भी प्रभावित होने की आशंका है।