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Bihar: बिस्फी विधानसभा में चौपाल विवाद. विधायक हरिभूषण ठाकुर जनता के सवालों से घिरे, कार्यक्रम छोड़कर भागे
Sat, 30 Aug 2025 02:36 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मधुबनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मधुबनी
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Sat, 30 Aug 2025 02:36 PM IST
सार
मधुबनी जिले के बिस्फी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित चौपाल कार्यक्रम में जनता ने विधायक हरिभूषण ठाकुर से उनके पांच साल के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों पर सवाल उठाए।
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विकास के सवाल पर विधायक ने छोड़ा चौपाल कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मधुबनी जिले के बिस्फी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत रहिका में आयोजित चौपाल कार्यक्रम में जनता ने विधायक हरिभूषण ठाकुर से उनके पांच वर्षों के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को लेकर सवाल पूछे। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, शिक्षा व्यवस्था में गिरावट, सिंचाई समस्याएं और रोजगार सृजन में विफलता जैसी शिकायतों के बाद विधायक कार्यक्रम बीच में छोड़कर चले गए।
जनता ने आरोप लगाया कि विधायक का मुख्य फोकस विकास पर नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम के धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों पर रहा। हाल ही में उन्होंने मिथिला राज्य की मांग को “मुस्लिम राज्य बनाने की साजिश” बताकर विवाद खड़ा किया था, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास योजनाओं का लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंचा और भ्रष्टाचार के कारण आम जनता की समस्याएं जस की तस बनी हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की कमी, स्कूलों में शिक्षक की अनुपस्थिति और सिंचाई योजनाओं में लापरवाही से किसानों और युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ये भी पढ़ें: भोजपुरी गानों को मिलेगी अब पहचान, अश्लील गीत गाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होने की उठी मांग
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विशेषज्ञों का कहना है कि बिस्फी विधानसभा का यह प्रसंग केवल एक क्षेत्रीय घटना नहीं है, बल्कि भारतीय राजनीति की उस प्रवृत्ति का प्रतीक है जिसमें विकास के मुद्दों को दरकिनार करके सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को प्राथमिकता दी जाती है। जनता ने चौपाल में यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब धार्मिक नारों से प्रभावित नहीं होगी और ठोस विकास कार्यों की मांग करेगी।
कार्यक्रम के दौरान विधायक के बॉडीगार्ड की उपस्थिति के बावजूद जनता की नाराजगी और तीव्र सवालों के कारण विधायक को कार्यक्रम बीच में ही छोड़ना पड़ा। रहिका की चौपाल में यह घटना दर्शाती है कि जनता अब सिर्फ धार्मिक या सांप्रदायिक राजनीति से संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि विकास और सामाजिक सुधार की मांग करेगी।
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जनता ने आरोप लगाया कि विधायक का मुख्य फोकस विकास पर नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम के धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों पर रहा। हाल ही में उन्होंने मिथिला राज्य की मांग को “मुस्लिम राज्य बनाने की साजिश” बताकर विवाद खड़ा किया था, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास योजनाओं का लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंचा और भ्रष्टाचार के कारण आम जनता की समस्याएं जस की तस बनी हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की कमी, स्कूलों में शिक्षक की अनुपस्थिति और सिंचाई योजनाओं में लापरवाही से किसानों और युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि बिस्फी विधानसभा का यह प्रसंग केवल एक क्षेत्रीय घटना नहीं है, बल्कि भारतीय राजनीति की उस प्रवृत्ति का प्रतीक है जिसमें विकास के मुद्दों को दरकिनार करके सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को प्राथमिकता दी जाती है। जनता ने चौपाल में यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब धार्मिक नारों से प्रभावित नहीं होगी और ठोस विकास कार्यों की मांग करेगी।
कार्यक्रम के दौरान विधायक के बॉडीगार्ड की उपस्थिति के बावजूद जनता की नाराजगी और तीव्र सवालों के कारण विधायक को कार्यक्रम बीच में ही छोड़ना पड़ा। रहिका की चौपाल में यह घटना दर्शाती है कि जनता अब सिर्फ धार्मिक या सांप्रदायिक राजनीति से संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि विकास और सामाजिक सुधार की मांग करेगी।