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Bihar : नीतीश कुमार सरकार को तीन यादव, एक कुर्मी मंत्री हटाना पड़ेगा; राहुल गांधी और लालू यादव का फॉर्मूला यही

सार

Bihar Caste Census : बिहार की जातीय जनगणना का आंकड़ा जारी होने के बाद कांग्रेस के नंबर वन नेता राहुल गांधी और राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव ने साफ कहा- जिसकी जितनी आबादी, उतनी भागीदारी। नीतीश सरकार मंत्रिमंडल में यह फॉर्मूला लाए तो क्या हो?

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CM Nitish Kumar Cabinet reshuffle on the basis of bihar caste census as per rahul gandhi, lalu yadav formula
लालू प्रसाद, नीतीश कुमार और राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गांधी जयंती पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा हुआ। जातीय जनगणना का रिकॉर्ड जारी किया गया। इसके जारी होने के तत्काल बाद कांग्रेस के नंबर वन नेता राहुल गांधी ने आवाज लगाई- "जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी भागीदारी।" राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भी यही आवाज दी। बाकी जगहों पर यह कब होगा, लेकिन बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में नीतीश सरकार इसे लागू कर दे तो प्रयोग भी हो जाएगा। प्रतिभा या अनुभव की जगह नीतीश सरकार अगर जाति के हिसाब से मंत्रिमंडल को पटरी पर लाना चाहे तो उसे बड़ा उलटफेर करना होगा। मंत्रिमंडल का पुनर्गठन करना होगा। इसमें राजद की आधार जाति को ही सबसे बड़ा झटका लगेगा। कैसे, समझिए।

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पहले जानिए, विधानसभा में मंत्रीपद का गणित
बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं। इनमें 15 प्रतिशत अधिकतम मंत्री हो सकते हैं। मतलब, 36 मंत्री बन सकते हैं। अभी 31 मंत्री हैं। कांग्रेस अपने 19 विधायकों के लिए चार मंत्रीपद मांग रही है। उसके दो मंत्री हैं। 23 जून को विपक्षी एकता की बैठक के पहले उसे आश्वासन मिला था कि इस तारीख के बाद विस्तार करेंगे, लेकिन आजतक हुआ नहीं। राजद के दो मंत्री हटे या हटाए जा चुके हैं। मतलब, चार मंत्रीपद तो यही हो गए। बचा एक तो वह राजद-जदयू खुद में फैसला कर सकती है। बस, देखना होगा कि जिस जाति के मंत्री की हिस्सेदारी बनती है- उसके विधायक पार्टी में हों। 
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मुसलमानों को एक मंत्रीपद और मिलना चाहिए
बिहार की जातीय जनगणना और सत्तारूढ़ दल के विधायकों के धर्म को देखें तो सिर्फ हिंदू और मुसलमान में ही मंत्रीपद का बंटावारा संभव है। इस जनगणना ने दिखाया है कि बिहार में मुस्लिम धर्म के लोगों की आबादी 17.7 प्रतिशत हैं। उस हिसाब से 36 में से छह मंत्रीपद इनके पास होना चाहिए। अभी पांच हैं। मतलब, एक मंत्रीपद तो इन्हें देना ही चाहिए। नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में अगड़ा मुस्लिम का प्रतिनिधित्व मो. जमा खान और डॉ. शमीम अहमद कर रहे हैं। जमा खान बसपा से जीतकर जदयू में आए हैं। डॉ. शमीम अहमद राजद से हैं। अब मुसलमानों के पिछड़ा वर्ग की बात करें तो कांग्रेसी अफाक आलम मंत्री हैं, जबकि असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम छोड़कर राजद में आए शाहनवाज आलम भी मंत्री हैं। राजद के ही मो. इसराइल मंसूरी भी हैं।

CM Nitish Kumar Cabinet reshuffle on the basis of bihar caste census as per rahul gandhi, lalu yadav formula
बिहार जाति जनगणना रिपोर्ट - फोटो : AMAR UJALA

लालू की बात मानें तो यादवों की ताकत घटेगी
बिहार की जातीय जनगणना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जाति कुर्मी की आबाद 2.87 प्रतिशत है। अब 36 मंत्रीपद का 2.87 प्रतिशत हिस्सेदारी निकालें तो एक ही मंत्रीपद इस जाति के पास होना चाहिए। मुख्यमंत्री पद पर कायम रहें तो मंत्री श्रवण कुमार को बाहर करना होगा। धानुक अलग जाति दिखाई गई है और इसकी आबाद 2.13 प्रतिशत है। आबादी के हिसाब से पूरे एक मंत्रीपद की हिस्सेदारी इसके पास नहीं है, हालांकि शीला कुमारी मंडल इस जाति से मंत्री हैं। भूमिहार जाति को नफा-नुकसान नहीं है, क्योंकि आबादी के हिसाब से इस जाति का एक ही मंत्री होना चाहिए और विजय कुमार चौधरी हैं। सबसे बड़ा नुकसान राजद के आधार वोट को नजर आ रहा है। बिहार में 14.26 प्रतिशत यादव बताए गए हैं और इस हिसाब से 36 में से पांच मंत्री इस जाति की हिस्सेदारी है, जबकि आठ मंत्री हैं- उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, बिजेंद्र प्रसाद यादव, तेज प्रताप यादव, सुरेंद्र प्रसाद यादव, डॉ. रामानंद यादव, ललित कुमार यादव, डॉ. चंद्रशेखर यादव और जितेंद्र कुमार राय। आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी में तीन यादव मंत्रियों को हटाना होगा। नीतीश कुमार के लव-कुश समीकरण में कुश, यानी कोइरी मंत्रियों की संख्या दो है, जबकि आबादी के हिसाब से डेढ़ मंत्री की हिस्सेदारी है। आलोक मेहता और जयंत राज में से दोनों को कायम भी रखा जा सकता है।

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बिहार जाति जनगणना रिपोर्ट - फोटो : AMAR UJALA

दुसाध को लाना पड़ेगा, चमार-पासी को हटाना होगा
सरकार ने खुद जाति बताई है और आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी की बात हो रही है। ऐसे में उसी का हिसाब देखें तो महज 0.98 आबादी वाली पासी जाति के इकलौते मंत्री डॉ. अशोक चौधरी को कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। क्योंकि, गणित के हिसाब से 0.35 मंत्रीपद की हिस्सेदारी बन रही है। नीतीश मंत्रिमंडल में दो राजपूत मंत्री हैं- लेशी सिंह और सुमित कुमार सिंह। आबादी के हिसाब से सवा मंत्री बन सकते हैं, मतलब एक ही रखना चाहिए। मल्लाह की आबादी 2.6 फीसदी है तो इसे 0.93 मंत्रीपद, यानी अधिकतम एक दिया जा सकता है। मदन सहनी इस हिस्सेदारी के साथ मंत्रिमंडल में हैं। मुसहर की आबादी भी 3.08 प्रतिशत है और इसे एक मंत्रीपद की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। जदयू ने रत्नेश सदा को यह दे रखी है। ब्राह्मण की आबादी 3.65 फीसदी है और उसकी हिस्सेदारी के मंत्रीपद पर संजय झा विराजमान हैं। बनिया की आबादी 2.31 है और इसे भी अधिकतम एक मंत्रीपद मिलना चाहिए। समीर कुमार महासेठ बने हुए हैं। दुसाध की आबादी 5.21 प्रतिशत है, यानी मंत्रीपद पर उसकी हिस्सेदारी 1.87 फीसदी है। कुमार सर्वजीत के अलावा एक और मंत्री बनाए जा सकते हैं। नोनिया की आबादी 1.91 है और हिस्सेदारी तो 0.68 मंत्रीपद की है। ऐसे में इसे एक मंत्रीपद दिया जा सकता है और अनीता देवी हिस्सा ले चुकी हैं। नुकसान उठाने वाली जातियों में चमार है, जिसकी आबादी 5.25 है। आबादी के हिसाब से उसकी हिस्सेदारी 1.89 पद की बनती है। मतलब, दो मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस जाति से सुनील कुमार, सुरेंद्र राम और मुरारी प्रसाद गौतम हैं। इनमें से किसी एक को हटाना पड़ेगा।

लालू-राहुल के फॉर्मूले से 10 सीटें खाली होंगी तो...
जिसकी जितनी आबादी, उतनी ही हिस्सेदारी- राहुल गांधी और लालू प्रसाद यादव के इस फॉर्मूले के बाद छह मंत्रीपद मुसलमान और 30 मंत्रीपद हिंदू में बंटेंगे। अभी हिंदु की विभिन्न जातियों से जो मंत्री हैं या जो खाली पद है, उस हिसाब से 10 मंत्रियों के पद अंतिम तौर पर खाली दिख रहे हैं। इसमें एक सीट तो निश्चित तौर पर दुसाध जाति को मिलनी चाहिए। शेष नौ में एक प्रतिशत से ज्यादा आबादी वाली जातियों को मौका दिया जाना चाहिए, जैसे- तेली (2.81% आबादी), कानू (2.21% आबादी), पान (1.7% आबादी), चंद्रवंशी (1.64% आबादी), नाई  (1.59% आबादी), कुम्हार (1.4% आबादी), बढ़ई  (1.4% आबादी) आदि को। इसके बाद भी एक-दो सीट बचे तो एक फीसदी से कम आबादी वालों की ओर नजर डालना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी एक प्रतिशत नहीं बल्कि एक सीट से भी सरकार रह या गिर जाती है।

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