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बिहार में दिमागी बुखार से 104 बच्चों की मौत, मंत्रियों के खिलाफ अदालत पहुंचा मामला

Mon, 17 Jun 2019 07:14 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 17 Jun 2019 07:14 PM IST
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case registered against dr harshvardhan and Mangal pandey in CJM Court of Muzaffarpur
दिमागी बुखार को लेकर समीक्षा बैठक करते डॉक्टर हर्षवर्धन - फोटो : Twitter

बिहार में इन दिनों एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) अपना कहर बरपा रहा है। इसे बीमारी को दिमागी बुखार और जापानी बुखार के नाम से भी जाना जाता है। अबतक 100 बच्चे इसकी चपेट में आकर दम तोड़ चुके हैं। टीवी रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरपुर की सीजेएम अदालत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ मुकदमा दायर हुआ है।

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सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी ने उनके खिलाफ शिकायत दी है जिसपर 24 जून को सुनवाई होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को मुजफ्फरपुर का दौरा किया था। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे भी मौजूद थे। जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने मंत्रियों को बताया कि हालात का जायजा लेने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक समीक्षा बैठक की।
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वहीं, मौतों का आंकड़ा बढ़कर 104 हो गया है।




आज बिहार के मंत्री श्याम रजक से जब पूछा गया कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज (एसकेएमसीएच) अस्पताल आएंगे जहां 80 से ज्यादा मरीजों की दिमागी बुखार के कारण मौत हो चुकी है तो उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री हर चीज पर नजर रख रहे हैं। क्या जरूरी है? निगरानी करना या मरीजों का इलाज करना या उनसे यहां मिलने के लिए आना?'
 

 

इसी बीच सोमवार को संसद भवन से बाहर निकले हर्षवर्धन से जब पत्रकारों ने बिहार में दिमागी बुखार के कारण बढ़ते मौत के आंकड़ों को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि नहीं, नहीं आज मैं कोई बाइट नहीं दूंगा। यह कहते हुए वह सीधे अपनी कार की तरफ गए और उसमें बैठकर रवाना हो गए।


बता दें कि बिहार के एसकेएमसीएच और केजरीवाल अस्पताल में रोजाना दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों के आने का सिलसिला जारी है। इस बुखार के कारण सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में ही हुई हैं। इस बुखार पर रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।

वहीं, भाजपा नेता डॉ. सीपी ठाकुर ने एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम के कारण हुई मौत के मुद्दे पर बिहार सरकार और सीएम नीतीश कुमार पर सवाल उठाए हैं। अपनी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि सरकार को बिमारी के इस प्रकोप पर समय रहते ही सक्रिय मोड में आना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए और अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी बीमारियां लोगों को प्रभावित न करें। उन्होंने कहा कि यदि लीची के सेवन के कारण ऐसा हुआ है तो उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए।



 

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