यह है बिहार जीतने के लिए बीजेपी का मेगा प्लान
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बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी ने अपनी कमर कस ली है। इसके लिए वह जल्द ही चुनावी 'रथ यात्रा' की शुरुआत करने वाली है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का रथ 1990 में लालू यादव ने समस्तीपुर जिले में रोक लिया था, लेकिन इस बार बीजेपी पूरी तरह तैयार नजर आ रही है। इसके लिए वह कुल 160 हाईटेक रथ चलाएगी जो जीपीएस प्रणाली से लैस होगा और पूरे बिहार में बीजेपी के परिवर्तन संदेश का प्रचार करेगा।
'परिवर्तन रथ' जैसे हाइ टेक संसाधनों के जरिए बीजेपी का लक्ष्य महज 100 दिन में एक लाख विधानसभा बैठकों के माध्यम से 6.5 करोड़ मतदाताओं तक अपनी पहुंच बनाना है।
100 अतिरिक्त वोटरों की मांग
पिछले चुनावों में 9,300 ऐसे बूथ थे जहां महज 50 वोटों के अंतर से बीजेपी की हार हुई थी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बिहार के पार्टी इकाई को यह संदेश दिया है कि इन 160 'परिवर्तन रथों' का प्रयोग रोजाना 1000 से 1200 सभाओं का आयोजन करने में किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि पार्टी को जिताने के लिए 100 अतिरिक्त वोटर लाइए। अमित शाह पटना में 16 जुलाई से बिहार के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का शंखनाद करेंगे। इसके साथ वह 25 जुलाई को मुजफ्फरपुर में होने वाले नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को भी जुटाने के लिए तैयारियां करेंगे।
हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद चुनावों में बीजेपी को मिली सफलता के कारण यह उम्मीद की जा रही है कि इसका असर विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। बिहार में दो समीकरणों के तहत चुनाव लड़ने की तैयारियां कि जा रही हैं जिनमें जाति और विकास के मुद्दे शामिल हैं।
हर बूथ पर रहेंगे 20 कार्यकर्ता
बीजेपी सिलसिलेवार तरीके से लालु के 'जंगल राज' और नीतीश के पार्टी जद(यू) से बीजेपी के अलग होने के बाद हुए प्रशासनिक स्तर पर क्षति को भी मुद्दा बनाएगी।
अमित शाह ने अपने पहले रणनीति के तहत पार्टी के राज्य इकाई को यह निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के कुल 62,779 बूथों में से प्रत्येक पर पार्टी के कम से कम 20 सदस्य मौजूद रहेंगे।
इससे पहले 5 से 10 सदस्य ही एक बूथ पर होते थे। इस बार बिहार चुनावों के मद्देनजर पार्टी ने अपने पुराने स्लोगन 'अबकी बार मोदी सरकार' को बदलकर 'अबकी बार बीजेपी सरकार' कर दिया है।