बिहारः भाजपा के 'सीएम उम्मीदवार' का विरोध
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बिहार विधानसभा के दूसरे चरण के मतदान के बीच लोगों का विरोध भी सामने आने लगा है। इस विरोध का सबसे पहला सामना करना पड़ा है भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कहे जा रहे प्रेम कुमार को।
गया से छह बार विधायक रह चुके प्रेम कुमार जब वोट डालने पहुंचे तो लोगों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि छह बार से विधायक प्रेम कुमार ने क्षेत्र में कुछ काम नहीं कराया है। इसको लेकर लोगों में नाराजगी दिखी।
गुस्साए लोगों ने उनके सामने ही नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि मामले की नजाकत को देख प्रेम कुमार तो शांत ही रहे लेकिन उनके साथ आए समर्थकों को यह नागवार गुजरा। उन्होंने भी मोर्चा संभालते हुए नारेबाजी के बदले प्रेम कुमार के पक्ष में नारेबाजी शुरू कर दी।
काफी देर तक दोनों ओर से जिंदाबाद मुर्दाबाद के नारे लगते रहे। हालांकि अपने परिवार के साथ वोट डालने आए प्रेम कुमार चुपचाप अपना वोट डालकर बूथ से निकल गए।
छह बार के विधायक प्रेम कुमार पर काम न कराने का आरोप
बता दें कि गया विधायक प्रेम कुमार को भी भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री उम्मीदवार की सूची में माना जा रहा है। वो वहां से छह बार विधायक रह चुके हैं और सातवीं बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं अगर वह जीत दर्ज करते हैं तो मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी और मजबूत हो जाएगी।
हालांकि भाजपा ने अभी अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है लेकिन दावेदारों ने खुद ही नाम आगे बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में प्रेम कुमार खुद भी मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी जता चुके हैं।
राजग में हालांकि पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ही अभी इस पद के लिए सबसे बड़े दावेदार हैं लेकिन पिछले कुछ से से मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम सामने आ चुके हैं।
मुख्यमंत्री उम्मीदवारों की लिस्ट में प्रेम कुमार भी
जिनमें राजेन्द्र सिंह के अलावा प्रेम कुमार का भी नाम है। मोदी के अलावा सामने आ रहे अन्य नामों को इसलिए भी खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि भाजपा ने बीते कई चुनावों में अचानक अंजाने से चेहरों को ही सत्ता की बागडोर सौंप कर एक नया राजनीतिक ट्रेंड शुरू किया है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने देवेन्द्र फडनवीस कुछ ऐसे ही चेहरे हैं जिन पर चुनावों से पहले शायद ही किसी ने दांव लगाया हो।
चुनावों में जीत के बाद भाजपा ने सभी को चौंकाते हुए नए नामों को तरजीह दी। ऐसे में बिहार में भी इस बार कुछ इसी तरह के समीकरणों की उम्मीद की जा रही है।