मोदी के भरोसे बिहार में बिहारी बाबू
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बिहारी बाबू भाजपा उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा और भोजपुरी सितारे कांग्रेस राजद गठबंधन के कुणाल सिंह के दिलचस्प मुकाबले वाली पटना साहिब लोकसभा सीट पर जनता दल(यू) के डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा और आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार परवीन अमानुल्लाह भी मैदान में हैं।
मौजूदा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की आम लोगों से दूरी और विकास कार्यों में सांसद प्रतिनिधि की मनमानी व पक्षपात यहां एक बड़ा मुद्दा है। जिसे भुनाने के लिए बाकी तीनों उम्मीदवार जुटे हुए हैं।
लेकिन अपने सांसद से दूरी को लेकर खफा होने के बावजूद भाजपा कार्यकर्ता उन्हें जिताने को मजबूर हैं। इसलिए भाजपा कार्यकर्ता घर घर जाकर यह नारा दे रहे हैं कि शत्रुघ्न सिन्हा मजबूरी है, नरेंद्र मोदी जरूरी है।
एक सीट जहां मुकाबला चतुष्कोणीय
वहीं कांग्रेस उम्मीदवार कुणाल को कांग्रेस कार्यकर्ताओं से ज्यादा राष्ट्रीय जनता दल और लालू प्रसाद यादव के जन बल पर भरोसा है और उनके प्रचार में सोनिया और राहुल से ज्यादा अहमियत लालू प्रसाद यादव के पोस्टर व झंडे की होती है।
बिहार में हालांकि आम आदमी पार्टी ने करीब 38 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन उसकी मजबूत उपस्थिति अगर कहीं दिखाई देती है तो वह पटना साहिब ही है। शायद यही एक सीट है जहां मुकाबला चतुष्कोणीय दिखाई देता है।
जहां परवीन के मैदान में होने से कांग्रेस राजद गठबंधन उम्मीदवार कुणाल का गणित गड़बड़ा सकता है, तो वहीं डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा की मैदान में मौजूदगी से भाजपा उम्मीदवार और मौजूदा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की मुश्किल बढ़ गई है।
बिहारी बाबू एक दूसरे का पर्याय
हालांकि शत्रुघ्न कहते हैं कि पटना के लोग और बिहारी बाबू एक दूसरे का पर्याय हैं, इसलिए उन्हें पूरा भरोसा है कि इस बार भी उन्हें जनता का विश्वास और प्यार मिलेगा।
वहीं अमर उजाला से बातचीत करते हुए कुणाल कहते हैं कि उनका पटना से पारिवारिक रिश्ता है। उनका परिवार परंपरागत कांग्रेसी है और उनके पिता बुद्धदेव बाबू पटना और बिहार में बेहद सम्मानित नेता रहे हैं।
कुणाल के मुताबिक पटना की जनता अपने सांसद से मिलने को तरसती है, वह इस दूरी को पाट देंगे और हर समय लोगों के लिए उपलब्ध रहेंगे। वहीं चुनाव प्रचार के दौरान अमर उजाला से बातचीत में परवीन अमानुल्ला का दावा है कि लोग भाजपा, कांग्रेस, राजद, जद(यू) की परंपरागत सत्ता की राजनीति से आजिज आ गए हैं, इसलिए सियासत की नई इबारत लिखने के लिए आम आदमी पार्टी को समर्थन देंगे। इसलिए उन्हें हर वर्ग और तबके का साथ मिल रहा है। वहीं डॉ. गोपाल प्रसाद नीतीश सरकार के दौरान हुए बिहार के विकास और कानून व्यवस्था में सुधार को मुद्दा बना रहे हैं।
सबसे सुरक्षित सीट
पूरे बिहार में अगर भारतीय जनता पार्टी की सबसे सुरक्षित कोई सीट मानी जाती है तो वह पटना साहिब है जिसमें पटना शहर का करीब तीन चौथाई हिस्सा और फतुहा से लेकर बख्तियारपुर तक का देहाती इलाका शामिल है।
परिसीमन से पहले इस सीट का नाम पटना था और यह यादव बहुल थी, इसलिए राजद की ताकत खासी थी।
वर्ष 2009 में परिसीमन के बाद इसका नाम पटना साहिब हो गया और सामाजिक गणित भी बदल गया। कुल 18 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में शहरी मोहल्ले भी हैं और देहाती इलाके भी।
वोटों का गणित
यहां सबसे ज्यादा कायस्थ मतदाता करीब साढ़े सात लाख हैं। इसके बाद यादवों की तादाद करीब ढाई से तीन लाख है। फिर करीब दो लाख वैश्य, एक लाख राजपूत, सवा लाख मुसलमान एवं शेष अन्य वर्गों के हैं।
कायस्थों, राजपूतों और वैश्यों के समर्थन के बल पर भाजपा अपने उम्मीदवार की जीत का दावा कर रही है। शत्रुघ्न सिन्हा भी इस जातीय गणित की वजह से खासे आश्वस्त दिखते हैं और अगर कोई कसर बाकी रही तो भाजपा और मोदी की कथित लहर पूरी कर देगी।
लेकिन जद(यू) के डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा अपनी स्थानीयता और जातीयता दोनों को मिलाकर खामोशी से अपना रास्ता बनाने में जुटे हैं तो चुनाव जीतने के लिए अभिनेता कुणाल सिंह अब यादव बन गए हैं।
लालू यादव के चित्र के साथ कांग्रेस के निशान वाले उनके प्रचार रथ पटना में घूम रहे हैं। जबकि नीतीश सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देकर आप में शामिल हुई परवीन अमानुल्ला घर घर घूम रही हैं। कभी मुस्लिम राजनीति के शिखर नेता रहे पूर्व सांसद सैयद शहाबुद्दीन की बेटी होने की वजह से वह किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं।
परिवार भी मैदान में
अंतिम में सोनाक्षी भी करेंगी प्रचार
चर्चा है कि अंतिम समय में शत्रुघ्न अपने पक्ष में वोट मांगने के लिए अपनी पुत्री और मशहूर अदाकारा सोनाक्षी सिन्हा को भी मैदान में उतार सकते हैं।
किसका क्या है मुद्दा
भाजपा- मोदी फॉर पीएम
आप- राजनीतिक व्यवस्था में आमूल चूल बदलाव
जदयू और कांग्रेस- सांप्रदायिकता और स्थानीय मुद्दे