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बिहार टॉपर्स घोटाले में अब आया पूर्व जेडीयू एमएलए का नाम, 12 साल की उम्र में ही कर ली थी ग्रेजुएशन

Mon, 13 Jun 2016 01:06 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Jun 2016 01:06 PM IST
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Bihar topper scam: lalkeshwar's wife usha singh was also mastermind of scam

बिहार के टॉपर्स घोटाले में एक और नया खुलासा हुआ है, अभी तक बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह को ही इस घोटाले का मुख्य सूत्रधार मानकर चल रही पुलिस को अब उसकी पूर्व विधायक पत्नी के खिलाफ भी पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं। 

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जेडीयू के टिकट पर गया जिले की हिलसा सीट से दो बार विधायक रही लालकेश्वर ‌की पत्नी उषा सिंह अपने करीबियों के माध्यम से बोर्ड परीक्षा में पास और फेल कराने के इस रैकेट को संचालित करती थी। पति पत्नी की यह जोड़ी बिहार की राजनीति के साथ ही शिक्षा क्षेत्र में भी काफी रसूख रखती थी। 
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उषा सिंह के बारे में हुए एक और चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि उसने फर्जी डिग्रियों के माध्यम से कालेज में शिक्षक की नौकरी पाई ‌थी। वहीं सवाल चुनाव के दौरान आयोग को दिए गए उसके हलफनामे पर भी है। वहीं मामले के दूसरे मुख्य आरोपी बच्चा राय से भी इस दंपति की काफी नजदीकी सामने आई है। 
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मामले की तलाश में लगी एसआईटी ने दो दिन पूर्व लालकेश्वर प्रसाद सिंह और उषा सिंह के घर पर छापामारी की थी। इस दौरान पति पत्नी दोनों फरार मिले, लेकिन पुलिस को उनके घर की तलाशी में काफी महत्वपूर्ण सबूत हाथ लगे हैं। 

जिसके बाद पुलिस का दावा है कि पास और टॉप कराने के इस रैकेट में पति लालकेश्वर के साथ उषा सिंह की भी बराबर की भागीदारी थी। उषा सिंह के लिए बोर्ड का सारा काम उसके दो नजदीकी लोग देखते थे, वो ही शिकार की तलाश करके इनके पास लाते और फिर सेटिंग का सारा खेल चलता था। पुलिस ने अभी तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने उषा सिंह के दो करीबियों को किया गिरफ्तार

Bihar topper scam: lalkeshwar's wife usha singh was also mastermind of scam

पुलिस ने मामले में दो आरोपी संदीप झा और अजीत को भी गिरफ्तार किया है। संजीव झा बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड का सदस्य है तो अजीत पटना कालेज में लेक्चरर है जिसमें लालकेश्वर प्रसाद प्रधानाचार्य हुआ करते थे। बताया जाता है कि ये दोनों दंपति के लिए रैकेट के तौर पर ही काम करते थे और छात्रों से सेटिंग का सारा काम संभालते थे। 

लालकेश्वर और उनकी पत्नी उषा सिंह का बिहार की राजनीति के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी रसूख था। लालकेश्वर बोर्ड अध्यक्ष बनने से पहले जहां पटना कालेज में प्रधानाचार्य पद पर थे वहीं उनकी पत्नी दो बार विधायक रहने से पूर्व और हाल फिलहाल पटना स्थित गंगा देवी महिला महाविद्यालय की प्राचार्या भी थी। 

उनके रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब तक उषा सिंह विधायक रही जब तक वह कालेज से अनिश्चितकालीन छुट्टी पर रहीं और जब इस बार उन्हें जेडीयू से टिकट नहीं मिला तो वापिस कालेज आकर प्रधानाचार्या पद की कुर्सी संभाल ली। 

इसके अलावा वह संस्कृत बोर्ड में भी सदस्य थीं। उषा सिंह के बारे में एक चर्चा ये भी है कि उन्होंने फर्जी डिग्रियों के माध्यम से कालेज में लेक्चरर का पद पाया था जिससे वह प्रधानाचार्या के पद तक पहुंची। मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार उषा सिंह ने उत्तर प्रदेश के जिस विश्वविद्यालय से साल 1976 में एमए किया था वह तो कहीं अस्तित्व में ही नहीं है। 

साल 2010 के विधानसभा चुनावों में दिए हलफनामे में उषा सिंह ने अपनी योग्यता 1973 में गोरखपुर से बीए-बीएड और 1976 में आमोध विश्वविद्यालय से एमए और 1984 में मगाध विश्वविद्यालय से पीएचडी करना बताया है। सवाल उनके एमए करने के लेकर है क्योंकि जिस आमोध विश्‍वविद्यालय से उन्होंने अपनी डिग्री बताई है वो कहीं है ही नहीं।

उषा सिंह की डिग्रियों पर सवाल, फर्जी डिग्रियों से पाई नौकरी

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इसके अलावा उनके द्वारा दी गई एक और जानकारी पर भी सवाल उठ रहा है हलफनामे में दी गई उनकी इस जानकारी पर यकीन करें तो उन्होंने आठ साल की उम्र में दसवीं और दस साल की उम्र में 12वीं की परीक्षा पास कर ली थी। 

सूत्रों के अनुसार उन्होंने 2010 में हिलसा सीट से विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन करते समय अपनी उम्र 49 साल बताई ‌थी। जिसके अनुसार उनका जन्म का वर्ष 1961 बैठता है। वहीं हलफनामे के अनुसार उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा 1969 में और इंटरमीडिएट की 1971 में पास कर ली थी। 

अब अगर उनके हलफनामे पर यकीन किया जाए तो उसके अनुसार उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा मात्र आठ साल में ही पास कर ली थी और इंटर की परीक्षा मात्र दस साल की उम्र में। इसी तरह 1973 में मात्र 12 साल की उम्र में उनकी ग्रेजुएशन और 15 साल की उम्र में उनकी पीजी कंपलीट हो गई थी। 

अब हलफनामे का सच क्या है यह तो उषा सिंह की बता सकती हैं लेकिन वह पुलिस की पकड़ से दूर चल रही हैं। माना जा रहा है कि पति पत्नी की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले से कुछ बड़े रहस्य बेपर्दा हो सकेंगे।

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