तीसरे चरण में दांव पर लगी लालू के बेटों की किस्मत
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12 दिनों के लंबे अंतराल के बाद बिहार में तीसरे चरण के लिए मतदान हो रहा है। सुबह से ही मतदाताओं की भीड़ मतदान केंद्रों पर पहुंचने लगी है। चुनावों के इस चरण को खास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीसरे चरण पर हर किसी की निगाहें टिकी हैं, इसकी बड़ी वजह ये भी है इस चरण में ही यह भी तय हो जाएगा कि लालू की राजनीतिक विरासत किसके हाथों में होगी।
लालू परिवार के लिए यह चरण कितनी अहमियत रखता है इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि लालू की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी हफ्तों से राघोपुर विधानसभा सीट पर बेटे तेजस्वी यादव के लिए प्रचार में जुटी हुई हैं।
राघोपुर सीट पर शिकस्त खा चुकी हैं राबड़ी देवी
तेजस्वी यहां कांटे की लड़ाई में फंसे हैं क्योंकि उनका मुकाबला उस व्यक्ति से है जिसने पिछले चुनाव में उनके परिवार की पारंपरिक मानी जाने वाली इस सीट पर उनकी मां को दस हजार वोटों से शिकस्त दे दी थी।
पूर्व में जेडीयू उम्मीदवार के तौर पर राबड़ी देवी को हराने वाले सतीश यादव इस बार भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। लालू परिवार के लिए इस सीट की कितनी अहमियत है इसका अंदाजा इसी से लग सकता है कि राबड़ी के हारने के बाद भी लालू ने अपने लाडले बेटे तेजस्वी यादव को यहीं से मैदान में उतारा है।
दूसरी ओर महुआ सीट से लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव चुनाव मैदान में हैं। लालू के लिए यह सीट भी बहुत अहम है क्योंकि महुआ पर पूर्व में राजद का ही कब्जा रहा है। लेकिन बीते चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के रवीन्द्र राय ने उनकी पार्टी को इस सीट पर शिकस्त दी थी।
बेटों के लिए लालू यादव ने झोंकी पूरी ताकत
इस बार तेज प्रताप का मुकाबला उन्हीं रवीन्द्र राय से है जो भाजपा के सहयोगी मांझी की पार्टी हम से चुनाव मैदान में हैं। रवीन्द्र राय की क्षेत्र में अच्छी लोकप्रियता मानी जाती है और वह युवा भी हैं। ऐसे में तेज प्रताप के सामने मुकाबला कड़ा है।
इसका अंदाजा लालू यादव को भी है इसलिए वह खुद तो तेज प्रताप के लिए कई सभाएं कर ही चुके हैं उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सभाएं भी यहां करवाई हैं।
तीसरे चरण में छह जिलों की कुल 50 सीटों पर मुकाबला होना है। इनमें से सारण लालू यादव का गढ़ रहा है तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में भी इसी चरण में चुनाव होना है। ऐसे में राजनीति के इन दिग्गजों के सामने अपना किला बचाने की चुनौती तो है ही जीत के लिए विरोधियों के गढ़ में भी सेंध लगानी होगी।