बिहार में लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारा तय, कौन कहां से लड़ेगा पर फंसा पेंच
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बिहार में एनडीए के सहयोगी दलों में लोकसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे का फॉर्मूला तो तय हो गया, लेकिन लोकसभा क्षेत्रों को लेकर अब भी पेंच फंसा हुआ है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो भाजपा समेत सभी दल जिताऊ सीटों पर अपना दावा ठोक रहे हैं। ऐसे में कौन किस लोकसभा सीट से लड़ेगा, इस पर पेंच फंस गया है।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य की कुल 40 लोकसभा सीटों में भाजपा और जदयू 17-17 सीटों पर लड़ने को तैयार हैं। लोकजन शक्ति पार्टी (लोजपा) को चार लोकसभा सीटें देते हुए उसके अध्यक्ष रामविलास पासवान को असम से राज्यसभा में भेजने का आश्वासन दिया गया है।
राजद नेता तेजस्वी यादव से अचानक मुलाकात कर राजनीतिक अफवाहों को तेज करने वाली आरएलएसपी के मुखिया उपेंद्र कुशवाला को इस बार दो सीटों से ही लड़ने के लिए तैयार कर लिया गया है। हालांकि कुशवाहा के सामने पिछली बार की तुलना में एक सीट घटन के अलावा अपने वर्तमान सांसद अरुण कुमार के पार्टी छोड़ देने की भी चुनौती है।
कम सीटों पर लड़ रही भाजपा बदले में चाहती है जिताऊ सीटें
माना जा रहा है कि बिहार के क्षेत्रीय और जातीय समीकरण को देखते हुए सभी दल जिताऊ सीटों की ही मांग कर रहे हैं। भाजपा ने जदयू को जोड़े रखने के लिए पिछली बार के मुकाबले कम सीटों पर लड़ने पर सहमति जताई है, लेकिन इसके बदले में उसका रणनीतिक प्रबंधन जिताऊ सीटों को अपने कोटे में बनाए रखने का दबाव बनाने की कोशिश करेगा।
भाजपा मुंगेर, दरभंगा, किशनगंज और खगड़िया जैसी सीटें छोड़ना नहीं चाहती है, लेकिन जदयू की निगाह भी इन सीटों पर है। भाजपा से नाराज सांसद कीर्ति आजाद और शत्रुघभन सिन्हा के बगावती तेवरों को लेकर पार्टी का क्या रुख होगा और उनका मुकाबला कौन करेगा, ये भी तय होना है। उधर, जदयू की कोशिश यादव बाहुल्य बेल्ट की मधेपुरा, छपरा, सारन और सीवान जैसी सीटों से दूर रहने की है।
2014 का गणित
22 सीट जीती थीं भाजपा ने पिछली बार
06 सीट जीती थी लोजपा ने और 1 हारी थी
02 सीट जीती थी आरएलएसपी ने 3 में से
02 ही सीट जीत पाई थी जदयू 40 सीटों में से