पत्नी और बेटी पर धर्मसंकट में फंसे लालू यादव
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बिहार चुनावों में शानदार जीत के बाद बुलंद हौसलों के साथ दिल्ली की सियासत में पैर जमाने की तैयारी कर रहे लालू यादव इस मुद्दे पर धर्मसंकट में फंसते नजर आ रहे हैं। मामला जुड़ा है जल्द ही रिक्त होने वाली राज्यसभा की पांच सीटों से, जिन पर फिलहाल सत्तारूढ़ जेडीयू का कब्जा है।
इनमें से दो सीटों पर लालू यादव अपनी दावेदारी कर रहे हैं तो बाकी की तीन सीटों पर जेडीयू और भाजपा के बीच मुकाबला माना जा रहा है। सीटों का यह बंटवारा ही सभी दलों में खींचतान का कारण बनता दिख रहा है।
राज्यसभा में बिहार कोटे की पांच सीटों पर जल्द ही चुनाव होना है। जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव, महासचिव केसी त्यागी, पवन वर्मा, गुलाम रसूल और आरसीपी सिंह का राज्यसभा कार्यकाल जुलाई में खत्म होने वाला है। जल्द ही इन सीटों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
एक राज्यसभा सदस्य के लिए 41 विधायकों का समर्थन होना जरूरी है। ऐसे में विधानसभा में 80 सीटों के दम पर लालू यादव ने दो सीटों की दावेदारी ठोक दी है।
पत्नी-बेटी में से एक को ही राज्यसभा टिकट देंगे लालू यादव
बेटों को राजनीति में मजबूती से स्थापित करने के बाद लालू यादव की मंशा पत्नी और बेटी को भी राज्यसभा में भेजकर दिल्ली की राजनीति में मजबूती से दस्तक देने की है।
शुरूआती खबरों के अनुसार लालू पत्नी और बेटी को ही राज्यसभा में भेजने के पक्षधर थे, लेकिन परिवारवाद को लेकर लगातार उठती उंगलियों के बीच लालू ने फिलहाल पैंतरा बदल दिया है।
इन दो किरदारों के बीच अब पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और लालू के खास मनोज झा की भी एंट्री हो गई है। माना जा रहा है पत्नी और बेटी में से लालू एक को ही राज्यसभा भेजकर विश्वस्त मनोज झा को भी राज्यसभा भेज सकते हैं।
इससे वो एक तीर से दो निशाने भी साध लेंगे, पहला झा को टिकट देने से पार्टी पदाधिकारियों में भी असंतोष नहीं रहेगा और दूसरा झा के रूप में राज्यसभा में उन्हें एक मजबूत वक्ता भी मिल जाएगा।
दूसरी सीट पर मनोज झा को मिल सकता है मौका
कई मौकों पर मनोज झा मजबूती से पार्टी का बचाव करते रहे हैं तब भी जब लालू यादव के चारा घोटाले में जेल जाने के बाद पार्टी अस्तित्व की लड़ाई से जूझ रही थी। हालांकि मनोज झा की टक्कर में रघुवंश सिंह और जगदानंद सिंह भी हैं। लेकिन फिलहाल झा का नाम ही आगे माना जा रहा है।
इससे इतर लालू की बड़ी समस्या ये है कि वो पत्नी और बेटी में से किसे टिकट दें। राबड़ी देवी फिलहाल बिहार विधान परिषद की सदस्य हैं तो मीसा भारती बीते लोकसभा चुनावों में लालू के खास रहे राम कृपाल यादव से मात खा चुकी हैं। हालांकि विधानसभा चुनावों के बाद एक चर्चा उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चली थी लेकिन इस रेस में वो छोटे भाई तेजस्वी यादव से ही पिछड़ गईं।
जिसको लेकर उनकी नाराजगी की खबरें थीं। जानकारों की मानें तो लालू बेटी मीसा पर ही दांव खेल सकते हैं, उसका प्रमुख कारण ये भी है एक तो वो किसी सदन की सदस्य नहीं हैं दूसरे उच्च शिक्षित होने के साथ साथ अच्छी वक्ता भी हैं।
लेकिन राजनीति के घाघ खिलाड़ी लालू यादव कब कौन सा दांव चल दें ये कौन जान सकता है ऐसे में अब हर किसी की निगाह उनके अगले कदम पर ही है।