बिहारः किसान, गार्ड और राजमिस्त्री के बच्चे आईआईटी में
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रविवार को जारी जेईई-एडवांस के नतीजों से एक बार फिर बिहार के बेहद साधारण परिवारों से आने वाले छात्रों की प्रतिभा सामने आई है। पटना के चर्चित ‘सुपर-30’ के तीस में से 28 छात्र सफल रहे हैं। इन छात्रों में सब्ज़ीवाले, किसान, निजी सुरक्षा गार्ड, राजमिस्त्री और मज़दूरी कर घर चलाने वाले लोगों के बच्चे शामिल हैं।
बीते एक दशक से भी अधिक समय से आनंद कुमार के मार्गदर्शन में ग़रीब और साधारण परिवारों के बच्चे ‘सुपर-30’ के बैनर तले आईआईटी की तैयारी करते हुए सफल हो रहे हैं।
वहीं बिहार के गया ज़िले की मानपुर पटवा टोली से इस बार कम से कम 14 छात्रों ने जेईई-एडवांस में कामयाबी पाई है। मानपुर पटवा टोली बुनकरों की बस्ती है, बीते दो दशक से अधिक समय से यहां के छात्र लगातार आईआईटी के साथ-साथ भारत के दूसरे नामी-गिरामी इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिला पा रहे हैं।
यहां के सफल छात्र नवप्रयास के बैनर तले तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स का मार्गदर्शन करते हैं। नवप्रयास के आकाश कुमार ने बताया, ‘‘इस बार सफल रहे छात्रों में से क़रीब आधे साधारण बुनकर परिवारों से हैं।’’
बिहार में कई संस्थाओं के छात्रों ने पाई शानदार सफलता
दूसरी ओर पटना के ईशान तरुणेश गुवाहाटी जोन के टॉपर बने हैं, उन्होंने 33वां रैंक हासिल किया है। ईशान के पिता सुनील कुमार तिरहुत डिवीजन के आईजी हैं।
वहीं मुंगेर में रहमानी फाउंडेशन पटना सहित देश के कुछ दूसरे केंद्रों पर मुस्लिम छात्रों को जेईई-एडवांस की परीक्षा की तैयारी कराता है। फाउंडेशन के पटना स्थित सेंटर ‘रहमानी-30’ के कम-से-कम 18 छात्रों ने रविवार आए जारी रिजल्ट में सफलता पाई है।
इस सेंटर के मैनेजर शब्बीरुल होदा ने बीबीसी को फोन पर बताया, ‘‘कामयाब छात्र बहुत ही साधारण परिवारों से आते हैं, इनमें किसी के पिता अख़बार बेचने वाले हॉकर हैं तो किसी के पिता प्लंबर।’’
बिहार के इन छात्रों की कामयाबी इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के दिनों टॉपर घोटाले को लेकर बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर बहुत सवाल उठे हैं।