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Bihar News : सामूहिक दुष्कर्मों और फर्जी मुठभेड़ से बिहार पुलिस की हो रही फजीहत, सत्ता पक्ष के नेता भी नाराज

Sat, 20 Jun 2026 10:35 PM IST
Krishan Ballabh Narayan न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Krishan Ballabh Narayan Updated Sat, 20 Jun 2026 10:35 PM IST
सार

Bihar : बिहार में हो रही घटनाएं बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रही हैं। उन घटनाओं में कहीं न कहीं पुलिस की लापरवाही, गैर जिम्मेदारी और वर्दी की ताकत का दुरुपयोग दिख ही जाता है। इसका नतीजा है कि सरकार में बैठे लोग ही पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं।

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Bihar Police facing embarrassment over abused and fake encounters bjp party Bihar News
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में तीन ऐसी घटनाएं हुई, जिसमें बिहार पुलिस की जमकर किरकिरी हो रही है। पहली घटना बेगूसराय की हैं, जबकि दूसरी घटना पटना की हैं और तीसरी घटना भोजपुर जिले की है। बेगूसराय में एक महिला के साथ पांच बदमाशों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। बेगूसराय के बाद पटना में दो सगी बहनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है। पीड़िताओं का आरोप है कि उन्हें तिलक समारोह में नृत्य प्रस्तुति के लिए बुलाया गया था, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर ले जाने के बजाय कुछ युवकों ने उन्हें बंधक बना लिया और पूरी रात उनके साथ गन्दा काम किया। लोगों में इस बात का आक्रोश था कि पुलिस ने इस घटना में सिर्फ एक शख्स को हिरासत में लिया, जबकि इस घटना के अन्य आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। 

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क्या है बेगूसराय की घटना?
 बेगूसराय में एक महिला के साथ पांच लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। लेकिन उन वहशियों ने इस घिनौना काम करने के दौरान ऐसा कुकृत्य किया, जिसे देखकर डॉक्टर भी सहम गए। 'अमर उजाला' ने इस खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित किया। इस घटना की पृष्टभूमि भी बिहार पुलिस की लापरवाही से शुरू हुई थी, जिसे अमर उजाला ने प्रमुखता से उजागर किया। खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस प्रशासन की खूब किरकिरी हुई, नतीजतन थानाध्यक्ष पर वरीय अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई की। अमर उजाला ने इस घटना के पीछे की घटना का भी जिक्र किया। 11 जून की घटना के तीन महीना पूर्व उसी पांच आरोपियों पर महिला ने छेड़खानी करने का आरोप लगाया था। महिला और परिजनों ने थाना में इस बात की लिखित शिकायत की। आरोप है कि थानाध्यक्ष मामला दर्ज करने के लिए तैयार नहीं था, लेकिन ग्रामीणों के दवाब में आकर उसे मामला दर्ज करना पड़ा। लेकिन इसके बाद भी थानाध्य्क्ष ने थाना पर से ही सभी आरोपियों को छोड़ दिया और इसी का नतीजा था कि वही पांच आरोपियों ने मिलकर 11 जून की रात को महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इस मामले को लेकर अब भी पुलिस की खूब किरकिरी हो रही है। हालांकि पुलिस की हो रही बदनामी को कम करने के लिए थानाध्यक्ष को फिलहाल निलंबित कर दिया। 
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एनकाउंटर के बहाने पुलिस ने की हत्या 
तीसरी घटना भोजपुर जिले की है जहां शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को पुलिस ने एनकाउंटर के बहाने एक युवक की हत्या कर दी। इस मामले में न सिर्फ बिहार पुलिस की बल्कि बिहार सरकार की भी खूब किरकिरी हो रही है। आलम यह है कि सरकार अपने ही विधायकों, मंत्रियों और नेताओं के सवालों से घिर गई है। मजबूरन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार अब इस मामले की न्यायिक जांच कराने की बात कह रही है। हालांकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले में कहा भी कि भोजपुर पुलिस मुठभेड़ जांच की जिम्मेदारी उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाएगी, जो पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करेंगे।

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सरकार के लोग ही उठा रहे हैं सवाल 
इस मामले में सरकार के ही लोग इस घटना की निंदा करते हुए पुलिस के इस रवैये को दोषपूर्ण बता रहे हैं। कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को बदले की भावना या नकारात्मक मानसिकता के कारण परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून के पालन की जिम्मेदारी सरकार की है और जो भी अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। वहीं इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि यदि पुलिस को कार्रवाई करनी ही थी तो युवक की जान लेने की बजाय उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता था। इससे आरोपी को जीवित पकड़कर कानून के दायरे में लाया जा सकता था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किस परिस्थिति में पुलिस ने ऐसा किया है,यह जांच का विषय है। इसकी जांच की जा रही है। सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी। 


केंद्रीय मंत्री भी नाराज 
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने इस घटना को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस लोमहर्षक घटना से मैं काफी व्यथित हूं। उन्होंने कहा कि भरत भूषण तिवारी की पुलिस प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पण के उपरांत उसकी गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी गई जो हृदय विदारक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है। मैं देश के गृह मंत्री अमित शाह जी से आग्रह करता हूं कि भरत तिवारी की निर्मम हत्या पर संज्ञान लेते हुए हत्यारे बने पुलिस प्रशासन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई कर उच्च स्तरीय जांच का आदेश दें ताकि समाज में गलत संदेश ना जाए। साथ ही मैं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी से आग्रह करता हूं कि हत्यारों को तत्काल 48 घंटे के भीतर जेल भेजकर बिहार में सुशासन होने का परिचय दें। 
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