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Bihar : जाली नोट का मास्टरमाइंड नेपाल में नहीं, बिहार के इस जिले में रहता है; NIA ने किया खुलासा

Thu, 20 Feb 2025 02:38 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Thu, 20 Feb 2025 02:38 PM IST
सार

NIA Raid : जाली नोट का मास्टरमाइंड लगातार खुफिया एंजेसी को चकमा दे रहा है। जाली नोटों की डिलेवरी वह हमेशा से नेपाल या सीमावर्ती क्षेत्र के बॉर्डर पर जाकर करता था। उसके इस वजह को भी एनआईए ने खुलासा कर दिया है।

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Bihar: NIA conducting raid search fake currency mastermind Rajesh Sahni finance work vaishali bihar motihari
आरोपी राजेश सहनी और घर पर जुटी पुलिस - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

जाली नोट के मामले में जिस वांटेड राजेश सहनी को नेपाल का निवासी समझकर रक्सौल बॉर्डर का सघन जांच की जा रही थी, वह  मोतिहारी के संग्रामपुर के मुरलीचक गाँव का निवासी और एलएनटी कंपनी का फाइनेस कर्मी निकला। यह अहम खुलासा एनआईए की छापेमारी में हुआ है। बीते दिनों 5 सितंबर को मिल्ट्री इंटलीजेंस को खुफिया जानकारी मिली थी कि नेपाल से तीन लोग फेंक करेंसी लेकर रक्सौल के रास्ते जम्मू कश्मीर जाने वाले हैं। तब मोतिहारी पुलिस ने जिले के थाना क्षेत्र के जटवा पुल के पास  इंजीनियर नजरे सद्दाम, मो वारिस एवं जाकिर हुसैन को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान तीनों के बताया था कि नेपाल भोरे रहने वाले राजेश सहनी ने उक्त रुपये दिए हैं । उन रुपयों को कश्मीर के अनंतनाग में पॉल्ट्रीफार्म संचालक मुजफ्फर अहमद वाणी उर्फ सरफराज तक पहुँचना है। राजेश सहनी बिरगंज मुड़ली चौक का रहने वला है। अब देश की कई एजेंसियों के साथ मोतिहारी पुलिस राजेश सहनी को गिरफ्तार करने के लिए  नेपाल बॉर्डर पर अलर्ट मोड पर रखी थी। उसके बाद जब यह हाइप्रोफाइल मामला NIA को ट्रांसफर हुआ तो NIA ने मोबाइल सर्विलांस, सीडीआर, एवं लोकेशन के आधार पर राजेश सहनी को ट्रेस कर लिया। वह मोतिहारी के संग्रामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मुड़ली गांव निवासी शंभु सहनी का बेटा है। अवह फिलहाल वैशाली में एलएनटी फाइनेंस में काम करता है। इसका नेपाल के काठमाण्डु, बंग्लादेश और पाकिस्तान से भी कनेक्शन बताया जा रहा है।

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इस तरीके से खुद को बताता था नेपाल का निवासी 
राजेश सहनी ही इस फेंक करेंसी का मास्टरमाइंड था जो लगातार खुफिया एंजेसी को चकमा देने के लिए नजरे सद्दाम, मो वारिस और मो जाकिर हुसैन को जाली नोटों की डिलेवरी हमेशा से नेपाल या सीमावर्ती क्षेत्र के बॉर्डर पर जाकर करता था। इतना ही नहीं वह भारतीय एजेंसियों  को चकमा देने के नियत से बॉर्डर क्षेत्र में वह मोबाइल का भी इस्तेमाल  करता था, जिससे उसके मोबाइल का लोकेशन कभी भारत तो कभी नेपाल के आसपास दिखता था। खुफिया एजेंसियों को लगता था कि राजेश सहनी नेपाल का निवासी है। वहीं इस धंधे में शामिल लोगों को भी अपना पता हमेशा वीरगंज स्थित मुडली चौक बताता था, ताकि कभी उनके साथी पकड़े भी जाए तो उसका भेद ना खुले।
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 राजेश सहनी इस वक्त भी बार-बार अपनी ठिकाना बदल रहा है।

NIA को छापेमारी से मिले कई अहम सुबूत 
मोतिहारी के संग्रामपुर में NIA के डिप्टी एसपी अभय कुमार सिंह लीड कर रहे थे। स्वतंत्र गवाह के तौर पर एसबीआई के दो मैनेजर को NIA अपने साथ लेकर गई थी। राजेश सहनी के घर के तलाशी के दौरान NIA को मोबाइल, सिमकार्ड और कुछ पेपर मिले है। NIA की टीम सीज करके अपने साथ लेकर गई है। पिछले 5 सितंबर को मिले लीड पर NIA बिहार के भोजपुर, भागलपुर एवं मोतिहारी में एक साथ 5 जगहों पर छापेमारी की थी, जिसमें कई समान जप्त हुए है। इस मामले में नजरे सद्दाम, मो वारिस और जाकिर हुसैन मोतिहारी सेंट्रल जेल में बंद है। वही कश्मीर से गिरफ्तार कर लाया गया सरफराज अभी बेउर जेल पटना में बंद है। अब मुख्य शागिर्द सहनी की तलाश जारी है। राजेश सहनी के गिरफ्तारी के बाद ही नेपाल एवं रक्सौल बॉर्डर पर बैठे आकाओं की जानकारी मिल पाएंगी, जिसका NIA को बेसब्री से तलाश है।

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