Flood Relief : मोदी सरकार ने बाढ़ से राहत के लिए बिहार को दी 11500 करोड़ की सौगात, नेपाल में भी बनेगा डैम
राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा कि यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि वित्त मंत्री ने यह घोषणा की है कि त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम एवं अन्य स्रोतों के माध्यम से, केंद्र सरकार कोसी-मेची अंतर-राज्य लिंक परियोजना तथा 20 अन्य मौजूदा एवं नई परियोजनाओं, जिनमें बैराज, नदी प्रदूषण नियंत्रण और सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं।
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बिहार को हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलने पड़ती है। हर साल लाखों लोग विस्थापित होते हैं। इसको लेकर मोदी 3.0 की सरकार ने केंद्रीय बजट में विशेष प्रावधन किया है। बिहारवासियों को बाढ़ से राहत के लिए 11500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी गई है। कोसी इंट्रा स्टेट लिंक समेत अन्य परियोजनाओं के लिए यह रुपये खर्च होंगे। सरकार कोसी नदी से बाढ़ का सर्वे भी करवाएगी। वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा कि बिहार में लोगों को हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। केंद्र सरकार इसको लेकर गंभीर है। बाढ़ से बचाव के लिए हरसंभव मदद किए जाएंगे। नेपाल में इसके लिए डैम बनाना होगा। केंद्र सराकर इसको लेकर वित्तीय सहायता देगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 25 हजार ग्रामीण इलाकों में ऑल वेदर रोड बनाए जाएंगे।
विशेष आर्थिक मदद देने के लिए पीएम और वित्त मंत्री को धन्यवाद
सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार को बाढ़ से बचाव के लिये भी बजट में बड़ा एलान किया गया है। कोशी-मेची नदी जोड़ परियोजना, नदी प्रदूषण न्यूनीकरण और सिंचाई परियोजनाओं के लिये विशेष आर्थिक मदद देने की घोषणा की गयी है, जो स्वागत योग्य है। बिहार के लिये बजट में विशेष प्रावधान के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी को विशेष धन्यवाद देता हूं।
दीर्घकालिक समाधान की दिशा में एक नई एवं बड़ी शुरुआत
राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा कि बिहार के लिए यह एक बड़ा दिन है। यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि वित्त मंत्री ने यह घोषणा की है कि त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम एवं अन्य स्रोतों के माध्यम से, केंद्र सरकार कोसी-मेची अंतर-राज्य लिंक परियोजना तथा 20 अन्य मौजूदा एवं नई परियोजनाओं, जिनमें बैराज, नदी प्रदूषण नियंत्रण और सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं, जिनकी अनुमानित लागत 11,500 करोड़ रुपये है, के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, कोसी नदी की बाढ़ के प्रभाव को कम करने तथा नई सिंचाई परियोजनाओं के लिए सर्वेक्षण भी कराया जाएगा। यह उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ से नुकसान की दशकों पुरानी समस्या के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में एक नई एवं बड़ी शुरुआत है। निश्चित रूप से यह एक स्वागत योग्य कदम है।