Bihar : 21 और 25 साल की औरतों की 18-18 साल की बेटियां! बिहार में चमत्कार के यह तीन उदाहरण देखकर चौंक जाएंगे
AMAR UJALA Exclusive : कोई खुद 21 या 25 साल की हो और उसकी बेटी 18 साल की हो जाए तो आप चौंक जाएंगे, लेकिन बिहार का सरकारी तंत्र नहीं चौंक रहा। प्रमाण वाले उदाहरण के साथ हम ऐसी चौंकाने वाली हकीकत एक जिले की ला रहे, लेकिन यह पूरे राज्य में हो रहा है।
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विस्तार
- इस खबर से जानिए, कैसे योजना का लाभ लेने के लिए बच्चों को कागज पर जन्म दे रहे लोग
- मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत अनुदान हासिल करने के लिए बिहार में यह चमत्कार
- 50-50 हजार रुपये अनुदान राशि जारी करने वाला विभाग कह रहा- कोई ऐसा भुगतान नहीं
- अमर उजाला सारे प्रमाण के साथ सामने ला रहा बिहार में कन्या के जन्म की अलग कहानी
यह खबर पूर्वी चंपारण जिले से है। वहीं, जहां मंगलवार को राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रगति यात्रा करते पहुंचे थे। खबर भले पूर्वी चंपारण से है, लेकिन यह सिर्फ उदाहरण है कि बिहार में ऐसे चमत्कार हो रहे हैं। खबर के विस्तार में जाने से पहले, आइए चमत्कार के तीन उदाहरण पढ़िए...
(1) ग्राम पुरानीडीह प्रखंड कोटवा निवासी 37 साल के राजकुमार शर्मा की तस्वीर आपके सामने है। इनकी पत्नी सुनीता देवी की उम्र सिर्फ 25 साल ही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनकी 18 साल की बेटी भी है और अभी बीते लगन में उसकी शादी भी करनी थी। कैसे हुई होगी, यह सोचने के पहले ऐसा ही दूसरा उदाहरण देखिए आगे।
(2) ग्राम रोहुआ पोस्ट मच्छरगांवा प्रखंड कोटवा निवासी गुड्डू शर्मा की तस्वीर भी आपके सामने है। यह साफ तौर पर नौजवान नजर आ रहे हैं। इनकी पत्नी की उम्र 21 साल है। इनकी भी 18 साल की बेटी है और अभी बीते लगन में उसकी भी शादी करनी थी। इन दोनों उदाहरण से अलग एक तीसरा उदाहरण भी है, वह भी अजूबा।
(3) ग्राम कररिया प्रखंड कोटवा निवासी स्व. सुनील कुशवाहा की पत्नी ऊषा देवी ने जिला प्रशासन में शपथ पत्र देकर वंशावली बनवाई थी कि उन्हें केवल चार बेटे ही हैं। अब अचानक उनकी एक बेटी का 'अवतरण' हुआ, जिसकी पिछले सीज़न में शादी कराने की बात थी।
25 साल की महिला 18 साल की बेटी की मां कैसे बन सकती है? 21 साल की नव-विवाहिता को 18 साल की बेटी कैसे हो सकती है? जिसके वंश में सिर्फ बेटे ही हों, उसकी अचानक एक बेटी कैसे हो सकती है? तो, जवाब है- राज्य सरकार की योजना के तहत। जी हां, यही बात है। इन सभी ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत श्रम विभाग से 50 हजार रुपये का अनुदान हासिल करने के लिए यह चमत्कार किए। कोटवा प्रखंड में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत इन्हें भुगतान भी हो चुका है। इस योजना और इसमें ऐसा घालमेल कर फर्जी कागजातों पर भुगतान सिर्फ इसी प्रखंड का मामला नहीं है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 'अमर उजाला' की टीम ने इसी महीने के सेवानिवृत हो रहे श्रम अधीक्षक अनिल कुमार सिंह ने फोन कॉल पर कहा कि यह सारा मामला गलत है। श्रम विभाग ने कोई गलत भुगतान नहीं किया है। ऐसे में हम सबूत के तौर पर भुगतान की जानकारी भी सामने ला रहे हैं।
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मोतिहारी सहित पूरे बिहार में निर्माण कार्य से जुड़े लोगों का लेबर कार्ड बनाया जाता है। उसी लेबर कार्ड के तहत श्रम विभाग में निबंधित मजदूरों की हादसों में मौत पर चार लाख रुपये, स्वाभाविक मौत पर दो लाख रुपये और दो बेटियों की शादी के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत पचास-पचास हजार रुपये अनुदान के रूप में दिए जाते हैं। पूर्वी चंपारण में कई प्रखंडों में अनुदान दिलाने में खेल हो रहा है। लाभुकों से 50 फीसदी लेकर अपात्र को या बगैर दस्तावेज जांचे भुगतान किया जा रहा है। केवल कोटवा प्रखंड में एक हजार से अधिक फर्जी भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है। हरसिद्धि प्रखंड के सिर्फ एक पंचायत मानिकपुर हसुआहा में करीब 400 लोगों को अनुदान मिला है और उनमें फर्जी की संख्या ही ज्यादा बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि करीब 300 आवेदकों के लिए श्रम प्रवर्तन अधिकारी की ओर से भेजी गई सिफारिश को श्रम अधीक्षक ने रद्द कर दिया है। उनमें भी ऐसी ही गड़बड़ी सामने आने की बात कही जा रही है।
(इनपुट- राजीव रंजन, मोतिहारी)रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
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