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Bihar News: कहलगांव में निकली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, वैदिक रीति से निभाई जाती है रथ यात्रा की परंपरा
Sat, 28 Jun 2025 01:17 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Sat, 28 Jun 2025 01:17 PM IST
सार
भागलपुर जिले के कहलगांव में 158 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथ यात्रा निकाली जा रही है। यह परंपरा 1867 में बने जगन्नाथ स्वामी ठाकुरबाड़ी मंदिर से शुरू हुई थी।
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वैदिक रीति से निभाई जाती है रथ यात्रा की परंपरा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ओडिशा के पुरी के तर्ज पर भागलपुर जिले के कहलगांव में शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई। यह परंपरा लगातार 158 वर्षों से चली आ रही है। नगर स्थित श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर से शाम छह बजे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की शोभायात्रा पारंपरिक वाद्य यंत्रों — ढोल, नगाड़े, शंख और तुरही के साथ प्रारंभ हुई। रथ पर विराजमान तीनों विग्रहों को भक्तगण आस्था के साथ खींचते हुए मौसी के घर तक लेकर गए।
भक्तिमय माहौल में ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारे गूंजते रहे। रथ को खींचने में महिलाओं, बच्चों और पुरुषों ने पूरे श्रद्धाभाव से भाग लिया। रंग-बिरंगे फूलों से सजे रथ पर विराजमान भगवान के दर्शन के लिए सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में श्रद्धालु खड़े थे।
शोभायात्रा महावीर पीढ़ी, थाना रोड, एनएच-80, गांगुली पार्क चौक होते हुए पुराना बाजार से होते हुए जगन्नाथ स्वामी भवन में समाप्त हुई। मंदिर के पुरोहित संजय झा ने बताया कि रथ यात्रा से पूर्व भगवान का विशेष श्रंगार किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उन्हें रथ पर विराजित किया गया।
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8 दिन रहेंगे मौसी के घर
रथ यात्रा के उपरांत भगवान जगन्नाथ मौसी के घर कहे जाने वाले जगन्नाथ स्वामी भवन में आठ दिनों तक विश्राम करेंगे। रथ यात्रा शोभा समिति के अध्यक्ष अनिल गुप्ता ने बताया कि यह परंपरा 1867 से अनवरत चली आ रही है।
अंग्रेजी शासनकाल में हुई थी शुरुआत
कहलगांव निवासी हरिराम साह ने अपने भाइयों डोमन साह और चमन साह के साथ मिलकर 1867 में राधाकृष्ण जगन्नाथ स्वामी ठाकुरबाड़ी मंदिर का निर्माण कराया था। उसी वर्ष से इस मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा प्रारंभ हुई। वासुदेव प्रसाद साह, जो हरिराम साह की आठवीं पीढ़ी से हैं और एक सीनियर अधिवक्ता भी हैं, ने बताया कि यह परंपरा उनकी पीढ़ियों से आज तक निभाई जा रही है। गिरधारी साह हटिया के मालिक दीपक साह भी इसी वंश से आते हैं।
2002 में बना जगन्नाथ स्वामी भवन
2002 में कहलगांव में जगन्नाथ स्वामी भवन का निर्माण कराया गया, जिसका उद्घाटन बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सदानंद सिंह ने किया था। उसी वर्ष मंदिर ट्रस्ट की स्थापना हुई, जिसमें वासुदेव प्रसाद साह अध्यक्ष बनाए गए। इस ट्रस्ट में केशव साह, जयप्रकाश साह, रमेश प्रसाद साह, श्याम चौधरी, प्रेम जायसवाल और संजीव जायसवाल शामिल हैं।
भागलपुर शहर और अन्य इलाकों में भी निकली शोभायात्रा
भागलपुर शहर के बाटा गली, गिरधारी साह हटिया, और सखीचंद घाट से भी भगवान जगन्नाथ की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मंदिर सेवायत सुशील मिश्रा के अनुसार, यह यात्रा भी 100 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा का हिस्सा है। वहीं पीरपैंती स्थित इस्कॉन मंदिर से भगवान की रथ यात्रा ढोल-नगाड़ों के साथ निकली, जो मीनाक्षी मंदिर तक गई। नाथनगर के चंपानगर तांती बाजार स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर से भी पारंपरिक ढंग से रथ यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
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भक्तिमय माहौल में ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारे गूंजते रहे। रथ को खींचने में महिलाओं, बच्चों और पुरुषों ने पूरे श्रद्धाभाव से भाग लिया। रंग-बिरंगे फूलों से सजे रथ पर विराजमान भगवान के दर्शन के लिए सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में श्रद्धालु खड़े थे।
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शोभायात्रा महावीर पीढ़ी, थाना रोड, एनएच-80, गांगुली पार्क चौक होते हुए पुराना बाजार से होते हुए जगन्नाथ स्वामी भवन में समाप्त हुई। मंदिर के पुरोहित संजय झा ने बताया कि रथ यात्रा से पूर्व भगवान का विशेष श्रंगार किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उन्हें रथ पर विराजित किया गया।
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8 दिन रहेंगे मौसी के घर
रथ यात्रा के उपरांत भगवान जगन्नाथ मौसी के घर कहे जाने वाले जगन्नाथ स्वामी भवन में आठ दिनों तक विश्राम करेंगे। रथ यात्रा शोभा समिति के अध्यक्ष अनिल गुप्ता ने बताया कि यह परंपरा 1867 से अनवरत चली आ रही है।
अंग्रेजी शासनकाल में हुई थी शुरुआत
कहलगांव निवासी हरिराम साह ने अपने भाइयों डोमन साह और चमन साह के साथ मिलकर 1867 में राधाकृष्ण जगन्नाथ स्वामी ठाकुरबाड़ी मंदिर का निर्माण कराया था। उसी वर्ष से इस मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा प्रारंभ हुई। वासुदेव प्रसाद साह, जो हरिराम साह की आठवीं पीढ़ी से हैं और एक सीनियर अधिवक्ता भी हैं, ने बताया कि यह परंपरा उनकी पीढ़ियों से आज तक निभाई जा रही है। गिरधारी साह हटिया के मालिक दीपक साह भी इसी वंश से आते हैं।
2002 में बना जगन्नाथ स्वामी भवन
2002 में कहलगांव में जगन्नाथ स्वामी भवन का निर्माण कराया गया, जिसका उद्घाटन बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सदानंद सिंह ने किया था। उसी वर्ष मंदिर ट्रस्ट की स्थापना हुई, जिसमें वासुदेव प्रसाद साह अध्यक्ष बनाए गए। इस ट्रस्ट में केशव साह, जयप्रकाश साह, रमेश प्रसाद साह, श्याम चौधरी, प्रेम जायसवाल और संजीव जायसवाल शामिल हैं।
भागलपुर शहर और अन्य इलाकों में भी निकली शोभायात्रा
भागलपुर शहर के बाटा गली, गिरधारी साह हटिया, और सखीचंद घाट से भी भगवान जगन्नाथ की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मंदिर सेवायत सुशील मिश्रा के अनुसार, यह यात्रा भी 100 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा का हिस्सा है। वहीं पीरपैंती स्थित इस्कॉन मंदिर से भगवान की रथ यात्रा ढोल-नगाड़ों के साथ निकली, जो मीनाक्षी मंदिर तक गई। नाथनगर के चंपानगर तांती बाजार स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर से भी पारंपरिक ढंग से रथ यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।