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Hindi News ›   Bihar ›   Bihar News : JDU Sunil Pandey, LJP Hulas Pandey role in bhumihar caste leader Brahmeshwar Mukhiya murder case

Brahmeshwar Mukhiya: हुलास पांडेय भी भूमिहार, फिर क्यों इस तरह खटके ब्रह्मेश्वर मुखिया; सारे किरदारों को जानें

Sun, 17 Dec 2023 12:11 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Sun, 17 Dec 2023 12:11 PM IST
सार

Bihar News : एक बार फिर ब्रह्मेश्वर मुखिया का नाम खबरों में है। बिहार में जातीय जनगणना के खिलाफ खड़ी होने वाली भूमिहार जाति के वर्चस्व की लड़ाई लड़ने वाले ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या में भूमिहार जाति के ही नेता को मुख्य अभियुक्त माना गया। क्यों?

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Bihar News : JDU Sunil Pandey, LJP Hulas Pandey role in bhumihar caste leader Brahmeshwar Mukhiya murder case
निर्दलीय तक रहे हुलास अब चिराग पासवान के साथ हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में एक समय था जब भूमिहार जाति और किसानों के नेता के रूप में ब्रह्मेश्वर मुखिया का नाम आने लगा था। 1 जून 2012 के अहले सुबह अहले सुबह टहलने निकले ब्रह्मेश्वर मुखिया को अपराधियों ने गोलियों से भून डाला। इस मामले में बिहार के पूर्व एमएलसी सह बाहुबली नेता हुलास पांडे का नाम आया था। अब सीबीआई के द्वारा कोर्ट में जो फाइल चार्जसीट की गई है उसमें मुख्य आयुक्त हुलास पांडेय को ही बनाया गया है। चार्ज सीट में लिखा गया है कि हुलास पांडे हत्या का षड्यंत्र किये और मुखिया जी की हत्या करवाए।

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माले और रणवीर सेना की लड़ाई में ब्रह्मेश्वर मुखिया का नाम सबसे ऊपर 
कहा जाता है कि माले और रणवीर सेना की लड़ाई में ब्रह्मेश्वर मुखिया का नाम भूमिहार जाति के नेता के रूप में आने लगा था। भोजपुरी और बक्सर ही नहीं बल्कि बिहार के जितने भी जिला में भूमिहार समाज हैं, सभी ब्रह्मेश्वर मुखिया को अपना नेता मानने लगा था। साथ ही बिहार के स्वर्ण समाज के किसान के लिए भी यही नाम था। कई मामलों में 9 साल की सजा काटकर आरा मंडल कारा से बाहर निकलने के बाद ब्रह्मेश्वर मुखिया की पहचान एक स्वच्छ और साफ छवि के नेता में होने लगी थी। ऐसा माना जाने लगा था कि बिहार की राजनीति में ब्रह्मेश्वर मुखिया की वजह से एक बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है, जिसकी तैयारी भी  शुरू हो चुकी थी। तभी 1 जून 2012 को ब्रह्ममेश्वर मुखिया की हत्या हो गई। ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या की खबर सुनकर पूरा बिहार जलने लगा था।
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बढ़ते कद को लेकर हुई थी हत्या 
ब्रहमेश्वर मुखिया हत्याकांड में पांडे भाइयों का नाम आया था, पहले सुनील पांडे का और फिर हुलास पांडे का। पहले सुनील पांडे पर हत्या के शक की सुई घूमी और उसके बाद पुलिस जांच में सुनील पांडेय के बाद उनके छोटे भाई हुलास पांडेय का नाम आया। अब जब चार्ज सीट दाखिल की गई है तो हुलास पांडे को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है। नाम नहीं छापने की शर्त पर आरा के एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि ब्रह्ममेश्वर मुखिया की हत्या भूमिहार जाति के नेता बनने के वजह से हुई। इनका कहना है कि हुलास पांडे के द्वारा भूमिहारों के नेता बनने के लड़ाई को लेकर ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या कराई जा सकती है, लेकिन हत्या के बाद पांडे भाइयों का कद बढ़ा नहीं बल्कि कद और छोटा हो गया। बिहार के पूरे भूमिहार समाज में हुलास पांडे को लेकर विरोध शुरू हो गया और अब कोई भी भूमिहार हुलास पांडे को अपना नेता नहीं मानता है। भूमिहारों में बढ़ते कद और पकड़ को लेकर ही ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या कराई गई थी।

ब्रह्मेश्वर मुखिया को राजनीति में इंट्री करने से रोकना था 
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय था, जब बिहार में भूमिहारों का दो गुटों हो गया था। एक बड़ा गुट ब्रह्मेश्वर मुखिया के साथ था तो दूसरा छोटा ग्रुप पांडेय भाइयों के साथ था। दूसरे गुट में छोटे बड़े कई भूमिहार अपराधी थे, जिसका नेतृत्व पांडेय भाइयों के द्वारा किया जा रहा था। माना जाता है कि उसी के बीच ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या कर भूमिहारों का नेता बनने की कोशिश की गई। ब्रह्मेश्वर मुखिया के जेल से निकलने के बाद अपने पुराने लोगों को एकत्रित करने की शुरुआत होने लगी थी। किसानों का एक बड़ा संगठन बनाकर पूरी तरह से राजनीति में उतरने का प्लान लगभग तैयार हो गया था। इसी प्लान को तत्काल रोकने के लिए संभवतः हत्या की गई थी क्यों कि यह संगठन और मीटिंग सफल हो जाता तो पूरे बिहार में ब्रह्मेश्वर मुखिया को राजनीति में आगे बढ़ने से रोक पाना यकीनन असंभव था।

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