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Bank Scam : 100 करोड़ का घोटाला देख RBI ने इस बैंक का कामकाज रोका था, अब MLA आलोक मेहता की जांच हो रही

Fri, 10 Jan 2025 12:12 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली Published by: आदित्य आनंद Updated Fri, 10 Jan 2025 12:12 PM IST
सार

Bihar News: बैंक घोटाले में बिहार सरकार के एक पूर्व मंत्री और लालू परिवार के करीबी राजद विधायक आलोक मेहता की भी भूमिका सामने आई थी। RBI की शुरुआती जांच में करीब पांच करोड़ के गबन का आरोप लगा। जांच शुरू हुई तो घोटाले की राशि 100 करोड़ तक जा पहुंची।

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Bihar News: ED investigating MLA Alok Mehta's property, bank scam, Vaishali, RJD, raid News
राजद विधायक आलोक मेहता फिर से चर्चा में हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में एक बड़ा बैंक घोटाला सामने आया था। यह मामला राष्ट्रीय जनता दल के विधायक आलोक मेहता से जुड़ा था। आज ईडी की टीम आलोक मेहता के 16 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है तो कुछ पुराने मामले फिर से चर्चा में आ गये हैं। बैंक घोटाला भी इसी से जुड़ा मामला था। भारतीय रिजर्व बैंक से रजिस्टर्ड एक कोऑपरेटिव बैंक में करीब 100 करोड़ का घोटाला हो गया था। हजारों निवेशकों के करीब 100 करोड़ की रकम गायब थी। वह भी फर्जीवाड़ा कर। बड़ी बात यह थी इस 100 करोड़ के घोटाले में बिहार सरकार के एक पूर्व मंत्री और लालू परिवार के करीबी राजद विधायक आलोक मेहता की भी भूमिका सामने आई थी। 

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फर्जी कागजातों के सहारे किसानों के नाम पर करोड़ों के लोन बांटे
करीब 35 साल से बैंकिंग कारोबार कर रहे इस बैंक के वित्तीय कारोबार पर जून 2023 में RBI ने रोक लगा दी थी। रिजर्व बैंक की शुरुआती जांच में करीब पांच करोड़ के गबन का आरोप लगा। जांच शुरू हुई तो घोटाले की राशि 100 करोड़ तक जा पहुंची। खुलासा हुआ कि लिच्छवि कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट Ltd और महुआ कोऑपरेटिव कोल्ड स्टोरेज नाम की दो कंपनियों ने बैंक के करीब 60 करोड़ का गबन किया है। इन दो कंपनियों ने अपनी गारंटी पर करोड़ों के लोन की निकासी की थी। फर्जी कागजातों के सहारे किसानों के नाम पर इस को-ऑपरेटिव बैंक ने करोड़ों रुपये के और भी लोन बांटे थे।
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करीब 100 करोड़ के घोटाले की स्क्रिप्ट कई साल पहले तैयार कर ली गई थी
खुलासा ये भी हुआ कि इस कोऑपरेटिव बैंक प्रबंधन ने फर्जी एलआईसी बांड और फर्जी पहचानपत्र वाले लोगों के नाम 30 करोड़ से ज्यादा रकम की निकासी कर ली है। इस पूरे घोटाले के पीछे विधायक आलोक मेहता की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही थी। इस कोऑपरेटिव बैंक और  फर्जी लोन की निकासी करने वाले दोनों कंपनियों से पूर्व मंत्री आलोक मेहता और उनके परिवार से सीधा-सीधा कनेक्शन सामने आया। इसके बाद बैंक के फर्जीवाड़े के शिकार खाताधारकों ने तत्कालीन मंत्री आलोक मेहता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आरोप था कि करीब 100 करोड़ के इस घोटाले की स्क्रिप्ट कई साल पहले तैयार कर ली गई थी। इस घोटाले की शुरुआत विधायक आलोक मेहता के बैंक अध्यक्ष रहते हो चुकी थी। बैंक का प्रबंधन शुरू से इसी परिवार के पास रहा और घोटाले की राशि में से बड़ी रकम जिन कंपनियों में ट्रांसफर की गई, वो भी विधायक आलोक मेहता के परिवार से जुड़ा है।
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घोटाले के पीछे भतीजे ने ही चाचा आलोक का हाथ बताया था
आरोप लगाया जा रहा है कि घोटाले के छींटों से बचने के लिए मेहता ने कुछ समय पहले खुद को बैंक के प्रबंधन और इन कंपनियों से से खुद को अलग कर लिया था। लेकिन, बैंक और इन कंपनियों को बाद में भी उन्हीं के रिश्तेदारों द्वारा चलाए जाने और घोटाले के सामने आने के बाद विधायक आलोक मेहता पर सवाल उठने लगा। विधायक परिवार के इस बैंक के फर्जीवाड़े के शिकार लोग लगातार हंगामा कर रहे। जिंदगी भर की जमापूंजी गंवाने वाले खाताधारकों ने जब विधायक आलोक मेहता के भतीजे संजीव को घेरा था तो उसने इस पूरे घोटाले का काला चिट्ठा खोला था और इस पूरे घोटाले के पीछे अपने चाचा, यानी आलोक मेहता का हाथ बता दिया था। 

गड़बड़ियों के आरोप में आलोक मेहता के पिता पर कार्रवाई भी हुई
बताया जा रहा है कि अपने बड़े रसूख के दम पर पूर्व मंत्री आलोक मेहता के पिता तुलसीदास मेहता ने करीब 35 साल पहले हाजीपुर में वैशाली शहरी कोऑपरेटिव बैंक की शुरुआत की थी। कुछ समय में बैंक में ग्राहकों की भीड़ लगने लगी। साल 1996 में इस बैंक को RBI का लाइसेंस भी मिल गया। पिता की राजनितिक रसूख के दम पर आलोक मेहता (1995 से ही ) बैंक के चेयरमैन बने और लगातार 2012 तक बैंक के प्रबंधन की कमान संभाली। इस बीच 2004 में उजियारपुर से लोकसभा का चुनाव जीत सांसद भी बने, लेकिन आलोक मेहता लगातार बैंक प्रबंधन की कमान संभाले रहे। 2012 में अचानक आलोक मेहता ने बैंक प्रबंधन की शीर्ष कमान अपने पिता तुलसीदास मेहता को सौंप दी और बैंक से खुद को अलग कर लिया। 2015 में भी इस तरह की गड़बड़ी सामने आई थी, जिसमे RBI ने बैंक के वित्तीय कारोबार को बंद करा दिया था। गड़बड़ियों के आरोप में आलोक मेहता के पिता तुलसीदास मेहता पर कार्रवाई भी हुई। लेकिन, तब मामले को सुलझाने के बाद आलोक मेहता के भतीजे संजीव को बैंक की कमान सौप दी गई और संजीव लगातार इस बैंक के चेयरमैन बने रहे।


हाजीपुर के नगर थाना में दो अलग- अलग FIR दर्ज कराई गई
अब आरोप लगाया जा रहा है कि 2012 में भी घोटाले के छीटों से बचने के लिए अलोक मेहता ने आननफानन में बैंक की कमान अपने पिता को सौंप खुद को बचा लिया था और RBI की कार्रवाई की गाज उनके पिता तुलसीदास मेहता पर गिरी थी। बैंक एक बार फिर से घोटाले के आरोपों से घिरा है और इस बार 100 करोड़ का घोटाला सामने दिख रहा है। घोटाले के सम्बन्ध में हाजीपुर के नगर थाना में दो अलग अलग FIR दर्ज कराई गई। इसमे बैंक के अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। बैंक का CEO और मैनेजर फरार हैं और पुलिस और विभाग मामले की जांच कर रही है।
(इनपुट- अभिषेक कुमार, हाजीपुर)

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