Bihar Politics : नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार जा रही या टिकेगी? फिलहाल समझें विधानसभा का गणित
Bihar News : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार की महागठबंधन सरकार की अस्थिरता की खबरों को जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने के बाद हवा मिल गई। अब भाजपा ने अपने विधायकों को पटना बुला लिया है। ऐसे में विधानसभा का गणित समझें।
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विधानसभा चुनाव के बाद भी बदला गणित
बिहार विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या वही नहीं है, जो 2020 चुनाव परिणाम में रहा था। भाजपा ने तब 74 सीटें जीती थीं। इसके बाद उसने उप चुनाव में राजद से कुढ़नी विधानसभा सीट छीन ली। इन दोनों को मिलाकर भाजपा की संख्या 75 होती है, लेकिन इस बीच उसने विकासशील इंसान पार्टी के तीनों विधायकों को अपनी पार्टी में मिला लिया। चूंकि, तीन ही विधायक थे इसलिए दल-बदल के कारण उनकी सदस्यता कायम रही। इस तरह भाजपा के पास अभी 78 विधायक हैं। राजद ने 2020 के विधानसभा चुनाव में 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उसमें से वह कुढ़नी सीट उप चुनाव में हार गई। इस तरह उसके 74 होते, लेकिन बोचहां सीट उप चुनाव में उसके नाम रही। इस तरह उसके विधायकों की संख्या वापस 75 होती। लेकिन, राजद ने असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के पांच में से चार विधायकों को अपने साथ कर लिया। इस तरह राजद की संख्या 79 है अब। जहां तक तीसरे नंबर की पार्टी जदयू का सवाल है तो उसने 43 सीटों पर चुनाव जीता था। इसके बाद बहुजन समाज पार्टी के एक और लोजपा के एक विधायक को अपने साथ कर लिया। इस तरह उसके पास 45 विधायक हैं। इसके अलावा एक निर्दलीय भी साथ है।
बचे बाकी दलों का गणित भी देखें
ओवैसी की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इकलौते विधायक के रूप में विधानसभा में हैं। कांग्रेस के 19 विधायक अपनी जगह पर जमे हैं। सीपीआईएमल के 12, सीपीआई एम के दो, सीपीआई के दो और हम के चार विधायक भी हैं। इस तरह 243 विधायकों वाले बिहार विधानसभा का पूरा गणित है। इसमें ओवैसी की पार्टी किसी तरफ नहीं है। बाकी, हम अब भाजपा के साथ है। शेष वामदल सरकार के साथ भी हैं और नहीं भी।