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Bihar News : सरकारी अस्पताल की होती किरकिरी, धक्का लगाने के बाद भी स्टार्ट नहीं होता एंबुलेंस
Sat, 22 Jun 2024 07:03 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Sat, 22 Jun 2024 07:03 PM IST
सार
Bihar : रेफर के बाद जब मरीज को एंबुलेंस में चढ़ाने के लिए मरीज के पास एंबुलेंस लाने की बारी आई तो एंबुलेंस स्टार्ट नही हुआ। इसके बाद वहां मौजूद लोगो ने मिलकर एंबुलेंस को धक्का दिया ताकि वह स्टार्ट हो जाए मगर वह स्टार्ट नहीं हुआ।
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एंबुलेंस को धक्का मारकर स्टार्ट करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
औरंगाबाद के सबसे बड़े अस्पताल यानी सदर अस्पताल में व्यवस्था में सुधार के लिए बहुमंजिली ईमारते बन रही है, लेकिन व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नही ले रही है। कुव्यस्थाओं का आलम यह है कि इस अस्पताल में पिछले एक माह में लू के शिकार दो दर्जन से अधिक मरीजों की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हो चुकी है। मौत के पीछे की वजह लू लगना तो है ही, साथ ही इसके लिए अस्पताल की लचर व्यवस्था को भी दोषी ठहराया जाता है। लचर व्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कहने को तो इस अस्पताल में हीट स्ट्रोक वार्ड बनाया गया है लेकिन इस वार्ड में सामान्य मरीज को भी भर्ती किया गया है।
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अस्पताल के सभी एंबुलेंस बन गये हैं खटारा गाड़ी
लचर व्यवस्था की ताजी बानगी एंबुलेंस सिस्टम से जुड़ी है। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि एंबुलेंस को स्टार्ट करने के लिए किस तरह से धक्का लगाया जा रहा है। हालांकि राज्य सरकार अपने अस्पतालों में बेहतर एंबुलेंस सेवा होने का दंभ जरूर भरती है, लेकिन शनिवार की यह ताजा तस्वीर उस दंभ धूल-धूसरित कर रही है। इसके पीछे सीधे तौर पर एंबुलेंस के संचालन की जिम्मेवारी अपने कंधो पर उठाकर रखने वाली एजेंसी दोषी है। इसके सीधे मायने यही है कि एजेंसी का काम सही नहीं है। यही वजह है कि इससे सरकार की भद्द पिटने के साथ ही किरकिरी भी रही है। तस्वीर में साफ देख सकते है कि सदर अस्पताल का एंबुलेंस खटारा गाड़ी बना हुआ है।
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लोगों ने कहा- एंबुलेंस है बीमार
दरअसल यह तस्वीर तब सामने आई जब गंभीर हालत में एक मरीज को सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए रेफर किया। रेफर के बाद जब मरीज को एंबुलेंस में चढ़ाने के लिए मरीज के पास एंबुलेंस लाने की बारी आई तो एंबुलेंस स्टार्ट नही हुआ। इसके बाद वहां मौजूद लोगो ने मिलकर एंबुलेंस को धक्का दिया ताकि वह स्टार्ट हो जाए मगर वह स्टार्ट नहीं हुआ। लोग कभी आगे से तो कभी पीछे से धक्का देकर उसे स्टार्ट करने की कोशिश करते रहे लेकिन सफलता नहीं मिली। लोगो का कहना है कि जिस अस्पताल में एंबुलेंस ही बीमार हो तो वहां से रेफर होने के बाद मरीज का जीवन कितना सुरक्षित होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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