Purnea Lok Sabha : आज पूर्णिया में सत्ता का संग्राम; चुनाव के बहाने हो रही चाय पर चर्चा, इन मुद्दों पर बातचीत
Lok Sabha Chunav 2024: 'अमर उजाला' का चुनावी रथ पूर्णिया पहुंच चुका है। सुबह चाय पर चर्चा में आम मतदाता अपनी बात रख रहे। इसके बाद दोपहर में युवाओं के मुद्दों पर चर्चा होगी। वहीं, शाम को राजनीतिक दलों के नेताओं सवाल-जवाब होंगे।
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राष्ट्रीय जनतांतत्रिक गठबंधन के प्रत्याशी संतोष कुशवाहा, राजद प्रत्याशी बीमा भारती और निर्दलीय पप्पू यादव की की टक्कर वाली पूर्णिया लोकसभा सीट पर सबकी निगाहें टिकी हैं। दो दिन पहले यानी 16 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी ने पूर्णिया के रंगभूमि मैदान में एनडीए के लिए वोट मांगने आए थे। इस समय 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' भी बिहार में है और अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत पूर्णिया में लोगों से बातचीत करने के लिए पहुंच चुका है। शहर के पंचमुखी मंदिर के पास चाय पर चर्चा के बहाने वोटरों से उनके मन की बात पूछी जा रही। समझा जा रहा है कि वह चाय की चुस्की के साथ पूर्णिया लोकसभा सीट की किन बातों पर विमर्श कर रहे हैं।
राजनीतिक दलों के नेताओं से सवाल-जवाब होंगे
'अमर उजाला' की टीम आप तक लोकसभा क्षेत्र की असल तस्वीर सामने रखेंगे। यहां के मतदाताओं की उम्मीदें क्या हैं और प्रत्याशी किन मुद्दों को लेकर वोटरों के बीच जा रहे हैं। इसी के तहत सुबह चाय पर चर्चा हो रही। फिर दोपहर को मतदाताओं के मन की बात जानने की कोशिश की जाएगी। अंत में राजनीतिक दलों के नेताओं से सवाल-जवाब होंगे।
सिविल सोसाइटी पूर्णिया के अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि पिछले दो साल से हमलोग पूर्णिया में एयरपोर्ट के लिए आंदोलन कर रहे हैं। पीएम पैकेज 2015 का हिस्सा है पूर्णिया एयरपोर्ट। आठ साल बीत जाने के बाद भी आज तक एक ईंट भी पूर्णिया एयरपोर्ट के लिए नहीं रखी गई है। आज तक न तो केंद्र सरकार और न ही बिहार सरकार ने इस ओर ध्यान दिया है। पूर्णिया में न तो एम्स है और न ही सेंट्रल स्कूल है।
सिविल सोसाइटी पूर्णिया के उपाध्यक्ष अभिमन्यु कुमार मनु ने कहा कि पूर्णिया में रोजगार बहुत बड़ी समस्या है। बेरोजगारी चरम सीमा पर हैं। बाहर रहकर कमाई करते हैं। रोजगार की दिशा में यहां कोई फैक्ट्री नहीं लगी। रोजगार को लेकर आज तक कोई काम नहीं हुआ। पढ़े लिखे लोगों के लिए कोई काम नहीं है। लोकसभा चुनाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि एनडीए की सरकार बनी तो विकास का काम होगा।
पूर्णिया का विकास अब तक नहीं हुआ
अनुज कुमार चांद ने कहा कि पूर्णिया विकास से अछूता है। यहां से दो-दो स्पीकर रहे वो भी दो-दो टर्म। इसके बावजूद पूर्णिया का विकास अब तक नहीं हुआ। एयरपोर्ट के लिए मामूली सा पेंच है। लेकिन, फाइल छूने के लिए कोई तैयार नहीं है। यहां से जनप्रतिनिधियों में क्षमता नहीं है कि वह पूर्णिया के लिए कुछ कर सके। इस कारण हमलोग बहुत दुखी है। हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।
बेरोजगार अब बहुत हद तक कम हुई
संयुक्त सचिव पद से सेवानिवृत हो चुके समाजसेवी अरविंद कुमार झा ने कहा कि बेरोजगारी अब बहुत हद तक कम हुई है। सरकार सभी को सरकारी नौकरी दे दे यह संभव नहीं है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के विकास पर सरकार को फोकस करना चाहिए। बिहार और यूपी के युवा सरकारी नौकरी पर ज्यादा ध्यान देते हैं। गुजरात और महाराष्ट्र में माता पिता अपने बच्चों को व्यापार के लिए प्रेरित करते हैं। हमें नौकरी देने वाला बनना होगा। ताकि खुद को रोजगार देने के साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार दे पाएं। बेरोजगारी की समस्या आने वाले सौ साल तक रहेगा। स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करना होगा। बाढ़ की समस्या के लिए सरकार को ध्यान देना होगा। मक्का के उत्पादन में हमलोग जापान को पीछे छोड़ चुके हैं। फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगनी चाहिए।
वरीय पत्रकार दुर्गाकांत ठाकुर ने कहा कि यहां के जनप्रतिनिधियों में इच्छा शक्ति की काफी कमी है। वह सदन में केवल तालियां बजाने के लिए होते हैं। वह पूर्णिया की समस्याओं को लेकर अपनी जुबान सदन में खोल ही नहीं पाते हैं। पूर्णिया में कारखाने नहीं लगे। इस कारण लोग पलायन कर रहे। एयरपोर्ट अब तक नहीं बना। शहर में नाले की समस्या बनी हुई। इस कारण बारिश में जलजमाव का सामना करना पड़ रहा। जनता की मजबूरी है आखिर क्या करे। इस लोकसभा चुनाव में भी वहीं मजबूरी दिख रही।