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खगड़िया में मरीजों के लिए 100 बेड और 200 कमरों की व्यवस्था लेकिन वेंटिलेटर और एंबुलेंस की कमी

Sat, 23 May 2020 10:51 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: अनवर अंसारी Updated Sat, 23 May 2020 10:51 AM IST
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Bihar Khagaria district 100 beds 200 rooms in place for Coronavirus Patient but need ventilator and ambulance
वेंटिलेटर - फोटो : facebook

पूरा देश वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जद्दोजहद कर रहा है। प्रवासी कामगारों के गृह राज्यों में पहुंचने से भी संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। ऐसा ही मामला बिहार के खगड़िया जिले में सामने आया। राजधानी पटना से 170 किलोमीटर पूर्व में स्थित खगड़िया में 14 दिनों के भीतर कोविड-19 संक्रमितों की संख्या 0 से बढ़कर 96 हो गई। 

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जिले में कोरोना वायरस से दो लोगों की मौत हुई, जिसमें से एक मृतक हाल ही में दिल्ली से लौटा था और उसे गंभीर बीमारियां थी। वहीं, दूसरी मौत मुंबई से वापस आए मधुमेह संबंधी बीमार व्यक्ति की हुई। इसके अलावा सभी मरीजों में हल्के लक्षण हैं और इन्हें आइसोलेशन और क्वारंटीन की जरूरत है। 
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जिले में स्थानीय प्रशासन ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कमर कसी हुई है। स्थानीय प्रशासन ने जिले में एक स्वैब जमा करने वाले केंद्र, निमोनिया के लक्षण वाले मामलों के लिए एक लेवल-2 का 100 बेड सुविधा वाली जगह और एक प्रशिक्षण संस्थान के दो भवनों में 200 एकल कमरों का एक लेवल-1 देखभाल केंद्र स्थापित किया है।
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इतनी सारी सुविधा होने के बाद भी खगड़िया को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसमें वेंटिलेटर और आईसीयू की सुविधा का नहीं होना। साथ ही जिले में केवल दो निजी अस्पतालों का होना। इसके अलावा, 135 पोस्ट की जगह होने के बावजूद केवल 37 सरकारी डॉक्टरों का होना और 17 एंबुलेंस में से एक में केवल सामान्य लाइफ सपोर्ट उपकरण होना जैसी समस्याएं भी प्रशासन को परेशानी में डाल रही हैं।

जिले में 50 हजार प्रवासी मजदूरों की आने की संभावना है। जिला अधिकारी आलोक रंजन घोष ने कहा है कि जिले में कम से कम 10 वेंटिलेटरों, 200 बेड, एक हजार पीपीई किट, 20 डॉक्टरों और चार बीएलएस एंबुलेंस की जरूरत है। 


घोष ने कहा कि अभी तक तो हालात ठीक थे, लेकिन प्रवासी मजदूरों के लौटने से मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहने की जरूरत है। हमारे यहां श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के संचालन के बाद से मामलों में बढ़ोतरी होनी शुरू हो गई है। अभी तक 31,500 मजदूर वापस लौटे हैं और 8000 के करीब एक सप्ताह के भीतर जिले में पहुंचेंगे।

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