आईएएस की गिरफ्तारी के बाद भड़के अधिकारी, कहा नहीं मानेंगे CM का कोई मौखिक आदेश
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बिहार में पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए बीएसएससी के अध्यक्ष सुधीर कुमार के पक्ष में एकजुट हुई आईएएस एसोसिएशन ने अब मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
रविवार को पटना में हुई बैठक में सुधीर कुमार की गिरफ्तारी को गलत बताते हुए एसोसिएशन ने ऐलान किया कि आईएएस अधिकारी अब कोई भी मौखिक आदेश नहीं मानेंगे चाहे वह आदेश खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही क्यों न दें। एसोसिएशन ने एकजुटता दिखाते हुए सुधीर कुमार के मुकदमे का खर्चा भी खुद वहन करने की बात कही।
बता दें कि बिहार में बीते 5 फरवरी को बिहार कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा का पर्चा लीक हो गया था। जिसमें राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी की रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पेपर रद करते हुए डीजीपी को मामले की जांच के आदेश दिए थे।
बीएसएससी पेपर लीक घोटाले में गिरफ्तार हुए कई अधिकारी
मामले में पटना के एसएसपी मनु महाराज के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने 8 फरवरी को बीएसएससी के सचिव परमेश्वर राम को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा प्रिंटिंग प्रेस के मालिक विनित अग्रवाल और प्रबंधक अजय और पेपर लीक करवाने वाले एक स्कूल के संचालक को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
हंगामा तब खड़ा हुआ जब एसआईटी ने बीएसएससी सचिव आईएएस सुधीर कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। इससे बिहार के आईएएस अधिकारियों में आक्रोश फैल गया। वरिष्ठ आईएएस की गिरफ्तारी के खिलाफ पूरी एसोसिएशन एकजुट हो गई और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
रविवार को पटना में एसोसिएशन की बैठक हुई जिसमें निर्णय लिया गया कि अधिकारी अब सीएम सहित किसी भी वरिष्ठ अधिकारी का मौखिक आदेश नहीं मांगेंगे, जो भी लिखित में दिया जाएगा केवल उसी पर अमल होगा।
मुख्यमंत्री के खिलाफ भड़क रहा अधिकारियों का विद्रोह
यह भी निर्णय हुआ कि कोई भी आईएएस अब बीएसएससी या किसी भी तकनीकी सेवा बोर्ड या उससे जुड़े किसी भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष का पद नहीं संभालेंगे। बैठक के बाद एसोसिएशन के सदस्यों ने राज्यपाल रामनाथ कोविद से भी मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
एसोसिएशन का कहना है कि इस संबंध में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और विपक्ष के नेता सुशील मोदी से भी मुलाकात की जाएगी। एसोसिएशन ने सुधीर कुमार को ईमानदार अधिकारी बताते हुए कहा कि जब तक उनकी रिहाई नहीं हो जाती हम उनके समर्थन में काली पट्टी बांधकर काम करेंगे, मामले की सीबीआई जांच कराने की भी मांग की गई।
बता दें कि इस मामले में बीते 24 फरवरी को सदस्यों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर उन्हें भी अपनी चिंताओं से अवगत कराया था।