Bihar Hooch Tragedy...Repeat!: पेट दर्द और दिखने में दिक्कत के बाद सीवान में दो की मौत, पांच ज्यादा गंभीर
पेटदर्द और कम दिखने की शिकायत के बाद दो लोगों की मौत के साथ बिहार में फिर जहरीली शराब से मौत की आशंका सामने आई है। सीवान सदर अस्पताल में दो की मौत के साथ एक दर्जन के बीमार होने की जानकारी है। आठ ज्यादा गंभीर में चार की आंखों की रोशनी चली गई है।
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पेटदर्द और आंखों से कम दिखने की शिकायत के बाद दो लोगों की मौत के साथ बिहार में एक बार फिर जहरीली शराब से मौत की आशंका सामने आई है। सीवान सदर अस्पताल में दोनों की मौत की पुष्टि के बाद भी एक दर्जन लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आ रही है। मृतकों की पहचान सीवान जिले के नबीगंज थाना क्षेत्र के बाला गांव निवासी लक्ष्मण प्रसाद के 40 वर्षीय पुत्र जनक बीन उर्फ जनक प्रसाद और 50 साल के नरेश बीन के रूप में हुई है। बाला गांव के दो लोगों की मौत के बारे में उसी गांव के जिला परिषद् सदस्य रमेश कुमार ने मोबाइल पर बातचीत में बताया की गांव के कुछ लोगों ने जहरीली शराब पी थी। अभी दर्जनों लोग बीमार हैं। पूरे गांव को पुलिस ने घेर लिया है। आठ लोग ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। इनमें से चार की आंखों की रोशनी चले जाने की जानकारी सामने आ रही है। गंभीर रूप से बीमारों में छह शंकर मांझी, जितेंन्द्र मांझी, राजू मांझी, धुरेन्द्र मांझी, दुलम राम, सुरेंद्र राउत, राजेश राउत और मुन्ना मांझी के नाम सामने आए हैं।
सीवान सदर अस्पताल का गेट बंद
दो लोगों की जहरीली शराब से मौत की सूचना पर सदर अस्पताल पहुंची प्रशासन की टीम ने इमरजेंसी वार्ड को अंदर से लॉक कर दिया। किसी को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। पत्रकारों को भी जाने पर रोक लगा दी गई है। पीजीआरओ अभिषेक कुमार चंदन ने बताया कि एक ही मौत हुई है और मामले की जांच की जा रही है। जबकि अंदर से आ रही खबरों के अनुसार दो की मौत की पुष्टि डॉक्टर कर चुके हैं। रात 9 बजे तक सदर अस्पताल में जुटती भीड़ को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने सीवान सदर अस्पताल के मुख्य द्वार को बंद कर दिया है। पौने दो घंटे से दरवाजे को नहीं खोला जा रहा है, ताकि कोई अंदर की खबर नहीं ला सके।
पिछले महीने जहरीली शराब से मौतों की खबर आने के बाद पुलिस-प्रशासन पर आंकड़ों को छिपाने और मौतों के पीछे ठंड या बीमारी बताने की बातें सामने आई थीं। इस बार रविवार की रात जैसे ही आंखों से नहीं दिखने की शिकायत के साथ लोगों के बीमार पड़ने की जानकारी फैली तो पुलिस-प्रशासन ने नबीगंज में कैंप लगा दिया। पुलिस की निगरानी में ही लोगों को सदर अस्पताल भेजा गया। सदर अस्पताल में भी लोगों को जानकारी देने पर रोक थी। पत्रकारों को कोई सूचना नहीं दी जा रही थी। मौतों के साथ बीमारों के बारे में भी जानकारी देने की जगह खंडन किया जा रहा था।