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बिहार में स्वास्थ्य विभाग की खुली पोल: पोस्टमार्टम के बाद नहीं मिला शव वाहन, ठेले पर शव ले गए परिजन

Tue, 13 Oct 2026 05:02 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 13 Oct 2026 05:02 PM IST
सार

छपरा सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव वाहन नहीं मिलने पर परिजन युवक का शव ठेले पर रखकर घर ले गए। युवक की सरयू नदी में डूबने से मौत हुई थी। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

 

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Bihar Health Department Exposed: No Hearse Available After Post-Mortem; Family Carries Body on a Handcart
छपरा सदर अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सारण जिले के छपरा सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। पोस्टमार्टम के बाद शव वाहन नहीं मिलने पर परिजनों को मृतक युवक का शव ठेले पर रखकर घर ले जाना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि शव वाहन के लिए संबंधित सेवा और नियंत्रण कक्ष में संपर्क करने के बावजूद उन्हें कोई सहायता नहीं मिली।

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सरयू नदी में डूबने से हुई थी मौत
मामला रिविलगंज थाना क्षेत्र के दिलिया रहीमपुर स्थित सरयू नदी का है। नगर थाना क्षेत्र के करीमचक मोहल्ला निवासी सनी कुमार दो दिन पहले नदी में नहाने के दौरान डूब गया था। उसकी तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को लगाया गया था। टीम दो दिनों से खोज अभियान चला रही थी। मंगलवार को कड़ी मशक्कत के बाद युवक का शव नदी से बरामद किया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए छपरा सदर अस्पताल भेज दिया।
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फोन करने के बाद भी नहीं मिली मदद
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजनों ने शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस सेवा के 102 नंबर और नियंत्रण कक्ष में फोन किया। परिजनों का आरोप है कि संपर्क करने के बावजूद उन्हें कोई सहायता नहीं मिली और न ही शव वाहन उपलब्ध कराया गया। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी जब शव ले जाने की व्यवस्था नहीं हुई, तो परिजन ठेला लेकर आए। उन्होंने शव को उस पर रखा और घर की ओर निकल पड़े। इस घटना ने अस्पताल में शव वाहन की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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अधिकारियों के बयानों में अंतर
मामले में अस्पताल प्रशासन और एंबुलेंस सेवा के अधिकारियों के बयानों में अंतर सामने आया है। सदर अस्पताल के अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि शव वाहन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पोस्टमार्टम कर्मी की होती है। उन्होंने कहा कि वाहन उपलब्ध नहीं होने के मामले की जांच कराई जाएगी।

वहीं, एंबुलेंस सेवा के एसीओ सत्य प्रकाश ने दावा किया कि उनके मोबाइल पर परिजनों की ओर से कोई फोन नहीं आया था। उन्होंने कहा कि फोन आने पर तत्काल वाहन उपलब्ध कराया जाता है और एंबुलेंस सेवा 24 घंटे चालू रहती है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि परिजनों को शव वाहन क्यों नहीं मिला।

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