वाट्सएप से सड़क सुधार, अजब-गजब मैसेजों ने अधिकारियों की उड़ाई नींद
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बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने राज्य में सड़कों की दशा सुधारने के लिए वाट्सएप नंबर क्या जारी किया उस पर अजब गजब मैसेजों की बाढ़ आ गई। चार दिनों में 9 हजार के करीब नंबरों से 25 हजार मैसेज और फोटो के रूप में शिकायतें वाट्सएप नंबर पर पहुंच गई।
अधिकारियों के अनुसार इनमें से आधे से ज्यादा मैसेज उप मुख्यमंत्री को उनकी इस पहले के लिए बधाई देने वालों के थे जो इसे तेजस्वी का निजी नंबर समझ रहे थे। आलम ये है कि अधिकारियों को उन फोटो और मैसेज की जांच करने में पसीने छूट रहे हैं जो वाट्सएप पर भेजे गए हैं।
असल में बिहार में खस्ताहाल हो रही सड़कों की दशा सुधारने के लिए लोक निर्माण मंत्री तेजस्वी यादव ने वाट्सएप नंबर जारी कर उन पर खराब सड़कों की फोटो भेजने की अपील की थी। जिससे उन्हें तुरंत ठीक करवाया जा सके।
तेजस्वी की इस अपील ने ऐसा असर किया कि सोमवार शाम तक मात्र चार दिनों में ही इस नंबर पर 8,873 मोबाइल नंबरों से 24,990 मैसेज आ गए। मंत्री के निजी सचिव संजय यादव ने बताया कि इनमें से आधे से ज्यादा मैसेज गैरजरूरी थे जिनमें से इस पहल के लिए मंत्री तेजस्वी यादव को बधाई संदेश दिए गए थे। लोगों को लगा कि यह तेजस्वी का निजी नंबर है। हालांकि वह यह भी कहते हैं कि एक बात तो साफ है लोगों ने उप मुख्यमंत्री की इस पहल का खुले दिल से स्वागत किया है।
बिना पूरी जानकारी के ही सड़कों की फोटो भेज रहे लोग
वो बताते हैं कि लोग अभी यह नहीं समझ पाए हैं कि यह नंबर टूटी और खराब सड़कों की जानकारी देने के लिए है, जिन्हें राज्य निर्माण विभाग द्वारा ठीक करवाया जाएगा। हमें इस संबंध में जितनी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं उन्हें हम ग्रामीण कार्य विभाग, नगर निगम निकायों और अन्य एंजेसियों को भेज रहे हैं जिससे सड़कों में सुधार करवाया जा सके।
वहीं वाट्सएप नंबर पार आने वाली कॉल के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए चंद्रशेखर ने बताया कि काफी संख्या में लोगों ने सड़कों की फोटो तो डाल दी लेकिन उनकी जानकारी नहीं दी कि ये कहां स्थित हैं, 60 फीसदी से ज्यादा फोटो इसी तरह बिना जानकारी के भेजी गई हैं।
उन्होंने बताया कि गुरुवार को मीडिया में यह नंबर प्रसारित होते ही सोमवार तक काफी संख्या में मैसेज आ चुके थे। इनमें से काफी संख्या में शिकायतों की जांच हुई। वो बताते हैं कि एक बार वाट्सएप पर मैसेज आने के बाद हर शिकायत की एक अलग आईडी बन जाती है। इसके बाद उसे उक्त जिले के संबंधित विभाग के अधिशासी अभियंता को भेज दिया जाता है। यह उनकी जिम्मेदारी होती है कि वह हर शिकायत पर गौर करें और उसे सही करवाएं, इसके लिए दो सप्ताह का
समय तय किया गया है।