Bihar Election 2020: एक सवाल, जिससे परेशान भाजपा और सुशासन बाबू, 36 लाख बेरोजगार किस पर करेंगे एतबार
'युवा हल्लाबोल' की टीम ने पूछा है कि 11.9 फीसदी बेरोजगारी दर और 38.5 फीसदी श्रम भागीदारी के साथ बिहार में कुल 36 लाख 37 हजार बेरोजगार क्यों हैं। महिलाओं में 55.8 फीसदी की भयावह बेरोजगारी दर और उनकी 3.5 फीसदी की चिंताजनक श्रम भागीदारी का जिम्मेदार कौन है...
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बिहार के चुनावी दंगल में सभी राजनीतिक दल एक दूसरे पर हमलावर हो गए हैं। साथ ही वे मतदाताओं को यह दिलासा दे रहे हैं कि उन्हें मौका मिलता है तो लोगों के कष्ट दूर कर देंगे। इन लच्छेदार भाषणों के बीच बिहार के चुनावी माहौल में एक सवाल, जो अभी उठना शुरू हुआ है, उसने सभी नेताओं को परेशान कर दिया है। इस सवाल के कई भाग हैं, लेकिन उनका जवाब न तो भाजपा के दिग्गजों के पास है और न ही सुशासन बाबू यानी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उस बाबत कुछ बोल पा रहे हैं।
ये सवाल बिहार के 36 लाख बेरोजगारों का प्रतिनिधित्व कर रहे 'बोल बिहारी' मुहिम के जरिए पूछे गए हैं। इस मुहिम को चला रहे 'युवा हल्लाबोल' की टीम ने पूछा है कि 11.9 फीसदी बेरोजगारी दर और 38.5 फीसदी श्रम भागीदारी के साथ बिहार में कुल 36 लाख 37 हजार बेरोजगार क्यों हैं। महिलाओं में 55.8 फीसदी की भयावह बेरोजगारी दर और उनकी 3.5 फीसदी की चिंताजनक श्रम भागीदारी का जिम्मेदार कौन है, बोल बिहारी, जवाब दो। यही वो सवाल है, जिसने नेताओं की नींद उड़ा दी है।
'बोल बिहारी' मुहिम की हल्लाबोल टीम बिहार के भागलपुर में आई थी। 'युवा हल्ला बोल' के राष्ट्रीय संयोजक अनुपम ने कहा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में यह माना कि उन्होंने उद्योग लगाने कि कोशिश की, लेकिन लगा नहीं पाए। पांच साल बाद भी अगर 36 लाख युवाओं के पास कामधंधा नहीं है तो इसका जिम्मेदार कौन है। वे किस पर भरोसा करेंगे। ये तो उन्हें बरगलाने वाली बात हो गई। वहीं राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी का यह कथन भी हास्यास्पद है कि अगर उन्हें मौका मिला तो बेरोजगारी दूर करेंगे।
वहीं 'बोल बिहारी' के चौंकाने वाले आंकड़े इन बयानों के बाद और प्रासंगिक हो गए हैं। राज्य में कुल 36 लाख 37 हजार बेरोजगार होना बिहार के विकास पर धब्बा और बड़े प्रश्नचिन्ह की तरह हैं। 11.9 फीसदी बेरोजगारी दर के साथ बिहार की गिनती देश के सबसे पिछड़े राज्यों में होती है। इससे भी भयावह संकेत महिलाओं की बेरोजगारी दर को लेकर है। यह दर 55.8 फीसदी तक पहुंच चुकी है। महिलाओं में श्रम भागीदारी तो मात्र 3.5 फीसदी है। सवाल ये है कि बिहार की महिलाओं को क्या रोजगार का हक नहीं है।
ये बुनियादी सवाल हैं, लेकिन इनका जवाब कोई भी नेता नहीं दे रहा है। सवाल के दूसरे भाग में पूछा गया कि बेरोजगार युवा नौकरी के लिए सड़कों पर लाठी डंडे खा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चार लाख से ज्यादा सरकारी पद खाली पड़े हैं। आज ये सवाल हर बिहारी को पूछना चाहिए कि सरकार इन रिक्त पदों को क्यों नहीं भर रही है।
रिक्त पदों का ब्यौरा देखा जाए तो स्वास्थ्य विभाग में ही तीन चौथाई पद खाली हैं। इनमें 7800 डॉक्टर, 13800 नर्स और 1500 फार्मासिस्ट के पद हैं। कानून व्यवस्था के पैमानों पर बिहार की हालत देश में सबसे बुरी मानी जाती है। इसके बाद भी 50 हजार से ऊपर पुलिस विभाग में पद खाली हैं। शिक्षा विभाग में 2,75,255 शिक्षकों के पद खाली हैं। अनुपम के मुताबिक, बेरोजगारी देश का सबसे गंभीर मुद्दा है। इसे लेकर युवाओं में भारी आक्रोश है। सरकार की इस विफलता पर चुनाव के दौरान समीक्षा होनी चाहिए। प्रत्याशियों और दूसरे बड़े नेताओं से ये सवाल पूछ रहे हैं, मगर कोई जवाब देने को तैयार नहीं।
'रेशमनगरी' कहा जाने वाला भागलपुर आज अपनी पहचान खोता जा रहा है। 'युवा हल्ला बोल' की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य अजित यादव ने 'बोल बिहारी' मुहिम के जरिए भागलपुर सुल्तानगंज में श्रावणी मेला कॉरिडोर और 'शिवा सर्किट' की मांग उठाई। पर्यटन उद्योग की असीम संभावनाओं के बावजूद यह क्षेत्र सरकारी उदासीनता का शिकार है।
पांच साल पहले प्रधानमंत्री ने आरा की जनसभा में सवा लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की थी। इसी के अंतर्गत भागलपुर के पास विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की बात कही गई थी और 1550 करोड़ की लागत से एक मेगा स्किल विश्वविद्यायल बनना था, जिसमें एक लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पैकेज पूरा कर देने की बात कही है, लेकिन पांच साल बाद न तो केंद्रीय विश्वविद्यालय का कोई अता पता है और न ही मेगा स्किल विश्वविद्यालय का।
नेशनल कोऑर्डिनेटर गोविंद मिश्र ने 'मॉडल एग्जाम कोड' के तहत सभी रिक्त पदों को भरने की मांग उठाई। हाईकोर्ट अधिवक्ता और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य अतुल झा ने शिक्षा, शिक्षक और शिक्षा गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं बाबत नेताओं को घेरा। ऋषव रंजन का कहना था कि स्मार्ट सिटी के नाम पर जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है। भागलपुर का चुनाव यहां की गंदगी को साफ करने पर नहीं होता है तो इससे बड़ी शर्मिंदगी बिहार के लिए और कुछ नहीं हो सकती।