{"_id":"5f92d3cc099b6e1ff56648e1","slug":"bihar-election-2020-rural-voters-of-nalanda-want-employment-from-chief-minister-nitish-kumar","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्रामीणों की अपील, नीतीशजी अब रोजगार पर ध्यान दें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्रामीणों की अपील, नीतीशजी अब रोजगार पर ध्यान दें
Sat, 24 Oct 2020 06:05 AM IST
अनिल पांडेय
मनीष मिश्र
मनीष मिश्र
Published by: अनिल पांडेय
Updated Sat, 24 Oct 2020 06:05 AM IST
सार
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गांव कल्याण बिगहा से अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट
- ग्रामीणों ने कहा- गांव-देहात में बिजली, सड़क, पानी दे दिया, अब बस रोजगार दे दीजिए
- गांव से निकले इंजीनियर बेटे व ईमानदार सीएम की छवि से गौरवान्वित हैं लोग
- युवा बोले-सीएम के गांव से होने भर से नौकरी नहीं मिल जाएगी, नीतीश जी के सामने सिफारिश नहीं चलती।
- वह अगर घूसखोर और भ्रष्ट होते तो मुझे नौकरी मिलना आसान हो जाता, लेकिन वह वैसे नहीं हैं।
विज्ञापन
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिहार के दूसरे गांवों के उलट नालंदा जिले के कल्याण बिगहा गांव जाने की सड़कें बिल्कुल चकाचक हैं। गांव में लगी पानी की टंकी, अस्पताल, पावर स्टेशन और बीच में पार्क यह अहसास कराते हैं कि यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पैतृक गांव है।
विज्ञापन
कल्याण बिगहा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा कराए गए कायापलट से गांव के लोग खुश हैं लेकिन लोगों ने गांव से निकले इंजीनियर बेटे से अब रोजगार पर ध्यान देने की अपील की। गांव के बीच में एक पक्के तालाब की सीढ़ियों पर बैठे निरंजन सिंह कहते हैं, पढ़ने से लेकर बिजली, सड़क, पानी तक हर तरह की व्यवस्था नीतीश जी ने बिहार के हर गाँव में कर दी है, बस अब रोजगार के क्षेत्र में काम करने की जरूरत है। हमारी मुख्यमंत्री से मांग है कि अब बेरोजगारों को रोजगार देने की दिशा में काम करना चाहिए।
विज्ञापन
शाम के समय इसी बीच तालाब के सामने बने मंदिर की झालरों के साथ गांव की स्ट्रीट लाइट्स भी जल उठती हैं। एक ईमानदार नेता के रूप में नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए निरंजन बताते हैं, नीतीशजी किसी की सिफारिश नहीं सुनते, हम उनके गांव से हैं लेकिन अगर हम नौकरी के लिए सिफारिश लेकर जाएंगे, तो कान पकड़ कर फेंकवा देंगे। हाँ, अगर समाजिक भलाई के काम के लिए जाएंगे तो बुलाकर पूछेंगे।
विज्ञापन
रोजगार मिले तो आदमी कर्ज में न फंसे
इसी बीच भीड़ से शिकायती लहजे में पास खड़े महथर गांव में रहने वाले एक बुजुर्ग शिवशंकर कहते हैं, आज आदमी जितना भी कमाता है, कर्ज में चलता जाता है, रोजगार मिले तो आदमी कर्ज में नहीं फंसे। अगर आदमी बाहर कमाने नहीं जाएगा, तो कर्ज में फंस जाएगा। यहां रोजगार नहीं है। ये जो भी बना है अमीरों के लिए बना है, गरीबों के लिए कुछ नहीं है।
ग्रामीण शिवशंकर की बात को बीच में ही काटते हुए एक सज्जन बोल पड़ते हैं, ये जो बोले एकदम झूठ बात बोले, पहले दूसरे गांव में जाने लिए कमर तक पानी से गुजरना पड़ता था, आज देखिए एकदम पक्की सड़क है, टंकी है, अस्पताल है। हम कैसे कहें कि नीतीश कुमार विकास नहीं किए। अब लोग हर घर में सरकारी नौकरी खोज रहे हैं, तो वो कैसे देंगे?
नीतीशजी के सामने सिफारिश नहीं चलती
शाम के वक्त कल्याण बिगहा गांव में पूरी चहल-पहल दिखती हैष बीएससी की पढ़ाई करने वाले लाल टीशर्ट पहने युवा पीयूष पटेल बोलते हैं, बिहार में रोजगार की बहुत दिक्कत है, हमारी सीएम से मांग है कि कुछ सुधार करें। यह पूछने पर कि मुख्यमंत्री के गांव से हैं तो नौकरी पाने में आसानी होगी? पीयूष बोलते हैं, सीएम के गाँव के होने भर से नौकरी नहीं मिल जाएगी। नीतीश जी के सामने सिफारिश नहीं चलती। वह अगर घूसखोर और भ्रष्ट होते तो मुझे नौकरी मिलना आसान हो जाता, लेकिन वह वैसे नहीं हैं।
तीन बार जरूर आते हैं गांव
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने गांव तीन बार जाते हैं। माता, पिता और पत्नी की पुण्यतिथि पर। गांव में बने पार्क में बच्चे खेल रहे हैं। उसी के सामने नीतीश के कामकाज से नाखुश एक दूसरे बुजुर्ग की बात सुनकर धर्मवीर सिंह घर से बाहर आ जाते हैं, और उनमें कहासुनी होने लगती है। बुजुर्ग धर्मवीर सिंह, नीतीश कुमार पर आरोप लगाने वाले बुजुर्ग से कहते हैं, जिसने इतना किया गांव में उसके बारे में झूठ बोलोगे तो पाप लगेगा। अस्पताल में एक से एक तरह की दवा है, फिर भी झूठ बोलते हैं। गांव के चारों तरफ रिंग रोड बनी हुई है। अब जनसंख्या इस हिसाब से बढ़ रही है तो किसी की औकात है कि सभी को रोजगार दे पाए। नीतीश को वोट देना है दीजिए, नहीं देना है तो न दीजिए, पर वो इंसान झूठ नहीं बोलता। आज यहां आज झूठ का कारोबार है। मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार को 100 में 100 नंबर देने की बात कहते हुए धर्मवीर कहते हैं, दो बार हारने के बाद 1985 में विधायक का चुनाव जीतने वाले नीतीश कुमार की गांव-समाज के लोगों ने बहुत मदद की।
अगला चरण रोजगार का हो
धर्मवीर सिंह मुख्यमंत्री को सुझाव देते हैं कि जिन गरीबों के पास रोजगार नहीं है, मुख्यमंत्री जी उस पर ध्यान दें। रोजगार का इंतजाम होना चाहिए। बिहार में बड़े कारखाने लगने लायक इन्फ्रॉस्ट्रक्चर नहीं हैं, लेकिन छोटे उद्योग तो लग सकते हैं। यहां खेती ही एक साधन है, उसमें ही सैकड़ों उद्योग लग सकते हैं। युवाओं को रोजगार मिलेगा और किसान का भी पेट भरेगा। धर्मवीर सिंह को भरोसा है कि नीतीश कुमार इसमें भी कामयाब होंगे, अब बिहार में सिर्फ रोजगार और उद्योग का काम रह गया है। जितना भी गांव-देहात में विकास होना था, वह कर चुके हैं। थोड़ा बहुत बच रहा है वह भी हो जाएगा। नीतीश जी ने भरोसा भी दिया है कि अगला चरण उसी पर केंद्रीत होगा।
नीतीश जैसा तेज और राजनेता नहीं देखा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कामकाज को लेकर समर्थन और विरोध की बहस के बीच कल्याण बिगहा गांव के बाहर एक मोड़ पर बैठे बुजुर्ग धर्मराज पांडेय अपनी लड़खड़ाती आवाज में कहते हैं, नीतीश पढ़ने में बहुत तेज थे, उनके जैसा न राजनेता हुआ है, न ही होगा। देखिएगा इस बार भी उनकी ही सरकार बनेगी क्योंकि दूसरा विकल्प ही नहीं है।
‘पहले जो करीब थे, आज एक भी उनके पास नहीं’
अपने हाथों से नीतीश कुमार को खाना खिलाने वाले कल्याण बिगहा गांव के छोटे सिंह नीतीश कुमार से मायूस हैं। वह कहते हैं, सामाजिक काम ठीक कर रहे हैं, लेकिन आर्थिक काम उन्हीं का कर रहे हैं, आगे पीछे लगे रहते हैं। विधायकी दो बार हारे, कल्याण बिगहा का एक आदमी आगे पीछे नहीं घूमता था। चुनावों में किस बूथ पर गोली नहीं चलाई, बस बच गए यही काफी है। जब जीने पर कुछ नहीं कर रहे, तो मर जाते तो क्या करते? आज तक यह बात किसी से नहीं की लेकिन आज पता नहीं कैसे निकल गई।
नीतीश कुमार से मुलाकात पर छोटे सिंह कहते हैं, जब यहां आने पर नहीं मिलते, तो वहां जाने पर कैसे मिलेंगे? एक बार मिलने गए थे पर हम लोगों से मिले ही नहीं। उन्हें बताओ कि गांव से आए हैं, तो कोई फर्क नहीं पड़ता, जो उनकी खिलाफत करता है, उसी को समर्थन करते हैं। हम लोग रैय्यत के रैय्यत ही रह गए।
छोटे सिंह की इस बात पर निरंजन सिंह कहते हैं, “जो लोग उनका विरोध कर रहे हैं वो अच्छी ज़िंदगी नहीं जीना चाहते हैं, हमेशा कठिनाई से ही गुजरना चाहते हैं। रही बात नीतीश कुमार के विरोध की तो कोई भी यह कह दे कि एक भी चीज 15 साल पहले से बनी हुई थी, सिर्फ कल्याण बिगहा ही नहीं, किसी भी गांव में जाकर आप पता कर लीजिए, 15 साल पहले की कोई भी चीज अगर आप को दिख जाए तो कहिएगा।