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अंतर्कथाः यूं लिखी गई सुशासन बाबू के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की पटकथा

Thu, 19 Nov 2020 05:40 PM IST
मुकेश कुमार झा हरि वर्मा, पटना
हरि वर्मा, पटना Published by: मुकेश कुमार झा Updated Thu, 19 Nov 2020 05:40 PM IST
सार

  • मेवालाल पर सबौर कृषि विश्वविद्यालय में 161 नियुक्तियों में अनियमितता का आरोप
  • सुशील मोदी के सवाल पर तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ ने कराई थी रिटायर्ट जज से जांच
  • चौथी पारी के दूसरे ही दिन बड़ी मुसीबत से उबरे सुशासन बाबू, दिल्ली दरबार का भी हस्तक्षेप

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Bihar education minister Mewalal Choudhary resigns
बिहार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने दिया इस्तीफा - फोटो : social media

विस्तार

बिहार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने कार्यभार ग्रहण करने के कुछ मिनटों बाद ही अपना इस्तीफा सौंप दिया। दरअसल, मेवालाल चौधरी पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। उनके इस बार मंत्रिमंडल में शामिल करने को लेकर ही सवाल उठने लगे थे। मेवालाल नीतीश की इस कैबिनेट के धन्नासेठ मंत्री भी हैं। पहले तो यह माना जा रहा था कि सुशासन बाबू मेवालाल से जुड़े भ्रष्टाचार के पुराने मामले से अनभिज्ञ थे।

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हमलावर विपक्ष
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने जब हमला किया तो मेवालाल का पलटवार था कि मुझ पर आरोप पत्र नहीं, इसलिए चर्चा की चुनौती दी। लालू प्रसाद ने भी सुशासन बाबू और भाजपा को लेकर चुटकी ली- मेवा पर चुप क्यों ? मामला बिहार से दिल्ली तक नजर में आया।
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पहले जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह और बाद में खुद नीतीश कुमार ने मेवालाल चौधरी को बुलाकर समझाया। इधर दिल्ली दरबार ने भी नीतीश कुमार को साफ संदेश दे दिया कि सुशासन के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं। आखिरकार यही संदेश और खुद नीतीश के सुशासन बाबू की छवि ने मेवालाल को इस्तीफे के नतीजे तक पहुंचाया।

इसलिए देना पड़ा इस्तीफा
मेवालाल चौधरी सबौर कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर थे। 2013-14 में सुशील मोदी ने उन पर सबौर कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्तियों में घोटाले का आरोप लगाया था। यह महज संयोग था कि तत्कालीन राज्यपाल जो अभी राष्ट्रपति हैं रामनाथ जी ने रिटायर्ड जज महफूज आलम से पूरे मामले की जांच कराई। उन्होंने 63 पन्ने की अपनी जांच रिपोर्ट में नियुक्ति में घोटाले का आरोपी ठहराया था।


रिपोर्ट के आधार पर सबौर थाने में मामला भी दर्ज है। मेवालाल चौधरी को कुलपति पद से सेवानिवृति के बाद उन्हें 2015 में जदयू से नीतीश कुमार ने टिकट भी सौंप दिया और तारापुर से वह विधायक चुन लिए गए। कुलपति थे तो 2010 में उनकी पत्नी नीता चौधरी भी विधायक बनीं।

मेवालाल को लेकर आईपीएस अमिताभ दास का पत्र भी चर्चा में है। जाहिर है, इस्तीफे के बाद विपक्ष के हमले और तेज हो गए हैं लेकिन इतना तय है कि अपनी नई पारी के दूसरे ही दिन सुशासन बाबू एक बड़ी मुसीबत से उबर गए हैं।

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