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शिक्षकों के लोटा पकड़ने पर मचा बवाल तो बोले बिहार के शिक्षामंत्री- इसमें गलत क्या है?
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Wed, 22 Nov 2017 01:56 PM IST
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K N PRASAD
- फोटो : ANI
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देश स्वच्छता की ओर बढ़ रहा है, खुले में शौच पर प्रतिबंध लगाने के लिए देशभर में नए-नए तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं। पिछले दिनों बिहार स्कूल ऑफ बोर्ड ने सर्कुलर जारी कर कहा है कि शिक्षकों को सुबह और शाम के वक्त ग्रामीण इलाकों में खुले में शौच के लिए जाने वाले लोगों को रोकना होगा और उन्हें जागरूक करना होगा। उस आदेश के बाद बिहार के शिक्षक गुस्से मे हैं।
बोर्ड ने अपने आदेश में कहा है कि शिक्षकों को समाज में इज्जत से देखा जाता है और अगर वे सोसाइटी को जागरूक करेंगे तो समाज जल्दी गंदगी से मुक्त होगा। बोर्ड के इस फैसले के समर्थन में राज्य के शिक्षा मंत्री के एन प्रसाद वर्मा उतर आए हैं।
पढ़ें: हार्दिक पटेल बोले- कांग्रेस ने मानी आरक्षण की मांग, BJP ने दिया था 1200 करोड़ का ऑफर
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उन्होंने कहा कि बिहार बोर्ड का यह निर्णय स्वागत योग्य है इसमें बेकार ही विवादित बनाया जा रहा है। शिक्षकों का समाज में एक आदर होता है। विभाग ने सोचा कि अगर शिक्षक जागरुकता फैलाएंगे तो लोग उन्हे जरूर सुनेंगे और उसपर अमल भी करेंगे। प्रसाद ने आगे कहा कि बोर्ड के इस फैसले का मतलब ये नहीं है कि इस काम के लिए शिक्षकों को पढ़ाना छोड़ना है।
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बोर्ड ने अपने आदेश में कहा है कि शिक्षकों को समाज में इज्जत से देखा जाता है और अगर वे सोसाइटी को जागरूक करेंगे तो समाज जल्दी गंदगी से मुक्त होगा। बोर्ड के इस फैसले के समर्थन में राज्य के शिक्षा मंत्री के एन प्रसाद वर्मा उतर आए हैं।
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उन्होंने कहा कि बिहार बोर्ड का यह निर्णय स्वागत योग्य है इसमें बेकार ही विवादित बनाया जा रहा है। शिक्षकों का समाज में एक आदर होता है। विभाग ने सोचा कि अगर शिक्षक जागरुकता फैलाएंगे तो लोग उन्हे जरूर सुनेंगे और उसपर अमल भी करेंगे। प्रसाद ने आगे कहा कि बोर्ड के इस फैसले का मतलब ये नहीं है कि इस काम के लिए शिक्षकों को पढ़ाना छोड़ना है।
Clicking selfies with defaulters is different matter, personally I didn't like it. We just want teachers to exercise their influence in society & bring awareness.: #Bihar Education Minister on order stating teachers to keep a tab on open defecation defaulters pic.twitter.com/NQPpX7rzF4
— ANI (@ANI) November 22, 2017
खुले में शौच करने वालों को रोकने के साथ निगरानी भी अब शिक्षकों के हाथ
प्रतीकात्मक चित्र
- फोटो : UNICEF
उन्होंने कहा कि डिफॉल्टर के साथ सेल्फी लेना एक अलग मामला है, इस बात को तो मैं व्यक्तिगत रूप से भी पसंद नहीं करता हूं, हमलोग बस इतना चाहते हैं कि शिक्षक अपने प्रभाव का प्रयोग करें और लोगों में जागरुकता लाने में मदद करें।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में बोर्ड ऑफ एजुकेशन ने शिक्षकों को सर्कूलर जारी कर आदेश दिया है कि अब उन्हें खुले में शौच करने वालों को रोकने के साथ -साथ उसकी निगरानी का जिम्मा भी अब शिक्षकों को ही संभालना होगा।
सरकार के बोर्ड ऑफ एजुकेशन की ओर से जारी आदेश में शिक्षकों को सुबह और शाम के वक्त ग्रामीण इलाकों में खुले में शौच के लिए जाने वाले लोगों को रोकने और उनकी निगरानी करने के आदेश जारी किए गए थे। इस काम के लिए स्कूलों के प्रिंसिपल को पर्यवेक्षक बनाया गया है।
सरकार की ओर से दी गई इस जिम्मेदारी से पहले भी शिक्षकों को कई और कामों की जिम्मेदारी दी जा चुकी है। ऐसे में इस फरमान के आने के बाद शिक्षकों में असंतोष पैदा हो गया है और विवाद हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में बोर्ड ऑफ एजुकेशन ने शिक्षकों को सर्कूलर जारी कर आदेश दिया है कि अब उन्हें खुले में शौच करने वालों को रोकने के साथ -साथ उसकी निगरानी का जिम्मा भी अब शिक्षकों को ही संभालना होगा।
सरकार के बोर्ड ऑफ एजुकेशन की ओर से जारी आदेश में शिक्षकों को सुबह और शाम के वक्त ग्रामीण इलाकों में खुले में शौच के लिए जाने वाले लोगों को रोकने और उनकी निगरानी करने के आदेश जारी किए गए थे। इस काम के लिए स्कूलों के प्रिंसिपल को पर्यवेक्षक बनाया गया है।
सरकार की ओर से दी गई इस जिम्मेदारी से पहले भी शिक्षकों को कई और कामों की जिम्मेदारी दी जा चुकी है। ऐसे में इस फरमान के आने के बाद शिक्षकों में असंतोष पैदा हो गया है और विवाद हो रहा है।