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Bihar News: पप्पू यादव का सपना टूटा, मगर दिल खिला; कन्हैया कुमार के कारण राजेश कुमार बिहार कांग्रेस अध्यक्ष

सार

Bihar News : कांग्रेस में अब बदलाव का असल मूड दिख रहा है। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के प्रतिनिधि बताए जाते रहे अखिलेश सिंह की विदाई हो गई। लेकिन, इससे बड़ी बात यह कि निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का सपना टूटा, मगर दिल खिला। कैसे, समझिए...

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Bihar Congress President rajesh kumar mla bihar congress pappu yadav via kanhaiya kumar rajesh rama
अज्ञातवास जैसी स्थिति से बिहार लौटे कन्हैया कुमार से करीब हैं बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

बिहार विधानसभा चुनाव में अब करीब सात महीने हैं। कांग्रेस ने बिहार का अध्यक्ष बदल डाला है। जबरदस्त तरीके से। हिंदू-मुसलमान... दोनों ही धर्मों में अगड़ों को आगे रखने का आरोप झेलती रही कांग्रेस ने सीधे रुख बदलते हुए एक दलित विधायक को बिहार कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया है। मंगलवार रात इसकी घोषणा के साथ निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का दिल टूट गया। वह सामने से नहीं बोल रहे थे, लेकिन उनके समर्थक पूरी उम्मीद लगाए बैठे थे कि कांग्रेस जैसे ही अखिलेश प्रसाद सिंह से कुर्सी छीनेगी तो उनका भाग्य खुलेगा। ऐसा नहीं हुआ। खैर, अखिलेश सिंह की कुर्सी जाना भी पप्पू यादव के जख्मों पर मरहम है। लेकिन, यह भी उनके लिए कम बड़ा मरहम नहीं है कि नए कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार उनके मामले में फिट बैठेंगे। कहा जा रहा है कि राजेश कुमार को कुर्सी दिलाने में कन्हैया कुमार की बड़ी भूमिका है और वह पप्पू यादव के लिए भी सकारात्मक हैं।

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पप्पू यादव बड़े फैक्टर, अखिलेश लगा रहे थे किनारे
अखिलेश सिंह बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे, तभी से यह बात कही जा रही थी कि वह राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के प्रतिनिधि के रूप में इस कुर्सी पर आकर बैठे हैं। राज्यसभा में उनके प्रवेश के समय इस बात को और ताकत मिली। यहां तक सब ठीक चल रहा था, लेकिन अखिलेश सिंह ने अपने सामने किसी को नहीं समझा- यह साफ दिख गया। राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय जाकर अपनी जन अधिकार पार्टी का देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी में विलय करा दिया। सदस्यता की तस्वीरें आ गईं। लेकिन, जब पप्पू यादव बिहार आए तो उन्हें अखिलेश सिंह का साथ नहीं मिला। कहा जाता है कि यादवों में कोई और नहीं दिखे, इस फेर में लालू परिवार ने पप्पू यादव को किनारे रखा और अखिलेश सिंह ने यह पक्का करने में कसर नहीं छोड़ी कि उन्हें पूर्णिया से लोकसभा टिकट नहीं मिले। इस फेर में राजद ने पहले ही महागठबंधन की ओर से औपचारिक घोषणा के पहले बीमा भारती को पूर्णिया के लिए सिम्बल दे दिया। नतीजा यह रहा कि पप्पू यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और वह बगैर कांग्रेस का साथ मिलने की बात कहते हुए सांसद भी चुन लिए गए।
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Bihar Congress President rajesh kumar mla bihar congress pappu yadav via kanhaiya kumar rajesh rama
बुधवार को बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने खड़गे और राहुल गांधी से मिलकर आभार प्रकट किया। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

लोकसभा चुनाव से टकराव, विधानसभा चुनाव के पहले समाधान
बिहार में पप्पू यादव एक फैक्टर हैं, यह कांग्रेस ने निर्दलीय जीतने पर देख लिया। इसके बाद से ही अखिलेश सिंह का विकेट गिरने की बात लगातार चल रही थी। इधर एक महीने पहले जब कांग्रेस ने अपनी युवा टोली से कृष्णा अल्लावरु को बिहार प्रदेश प्रभारी बनाया तो साफ हो गया कि अब प्रदेश अध्यक्ष का चेहरा भी पक्का बदलेगा। अखिलेश विरोधियों और पप्पू समर्थकों ने मिलकर अल्लावरु के सामने इस जमीन को और मजबूत कर दिया। इस बीच 2019 लोकसभा चुनाव में बेगूसराय से भाजपा प्रत्याशी गिरिराज सिंह के हाथों बुरी तरह हारने के बाद बिहार से गायब हुए कन्हैया कुमार को कांग्रेस ने अपने प्रदेश लौटकर काम करने कहा। वह 2024 लोकसभा चुनाव में पूर्वी दिल्ली से मनोज तिवारी के हाथों हारने के बाद संगठन में सक्रिय हो रहे थे। पप्पू यादव का कन्हैया कुमार से अच्छा जुड़ा है और कन्हैया का राजेश कुमार से। कुल मिलाकर समीकरण यह है कि लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव से अखिलेश सिंह का भीतरी-भीतरी टकराव अब विधानसभा चुनाव के पहले समाधान के रास्ते पर आ गया।

इस खबर को पढ़िए - Bihar News : कांग्रेस के बिहार अध्यक्ष बनाए गए विधायक राजेश कुमार, राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह की छुट्टी

इसका असर क्या होगा, यह भी जानना रोचक है
बिहार में कन्हैया कुमार का कितना असर है, यह बेगूसराय में 2019 के लोकसभा चुनाव में दिख गया था। फिर भी कांग्रेस को उम्मीद है तो कुछ तैयारी भी होगी। इसलिए, उस उम्मीद के अलावा पप्पू यादव का फैक्टर देखें तो कांग्रेस ने बीच का रास्ता निकाला है। पप्पू यादव अभी भी निर्दलीय और बाहरी हैं, इसलिए उन्हें अध्यक्ष बनाना मुश्किल होता। बनाने से लालू प्रसाद यादव के साथ टकराव की आशंका भी रह सकती थी। ऐसे में पप्पू यादव मयान में रखी तलवार की तरह हैं, जिन्हें वक्त पर निकाला जा सकेगा। फिलहाल पप्पू यादव, कन्हैया कुमार और कृष्णा अल्लावरु के सहारे राजेश कुमार बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कमर कसेंगे। राजेश कुमार के आने से ज्यादा अखिलेश सिंह के जाने के कारण कांग्रेस से अगड़ों की दूरी होगी, यह 24 घंटे के अंदर दिख चुका है। ऐसे में अब यह तीन बिहारी कांग्रेसी नेता हर तरफ से मैदान तैयार करेंगे। पप्पू यादवों की रहनुमाई की बात करेंगे, कन्हैया अगड़ों-युवाओं को जोड़ने का दावा करेंगे और राजेश कुमार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथी जीतन राम मांझी और चिराग पासवान के वोट बैंक को साधने की काेशिश में लगेंगे। 



बिहार विधानसभा में कांग्रेसी विधायकों की संख्या का क्या होगा?
राजेश कुमार के साथ पप्पू यादव और कन्हैया कुमार साथ आकर अगर प्राथमिक एक काम पूरा करने में कामयाब रहे तो यह साफ हो जाएगा कि अखिलेश सिंह से बेहतर प्रदर्शन आगामी चुनाव में कांग्रेस कर सकती है। दरअसल, बिहार विधानसभा में कागज पर कांग्रेसी विधायकों की संख्या 19 है, लेकिन ताकत उसके पास 17 विधायकों की ही है। बिहार की नीतीश कुमार सरकार के पिछले साल 12 फरवरी को हुए बहुमत परीक्षण और उसके बाद से कांग्रेस के दो विधायक उसके साथ नहीं हैं। महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के भी 77 विधायक होकर 73 साथ हैं। लेकिन, यहां बात कांग्रेस की हो रही है तो उसकी नई टीम के लिए पहला टास्क यही है कि वह उन दो बिछड़े विधायकों सिद्धार्थ सौरव और मुरारी गौतम को वापस लाए। निवर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव से इन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की थी, लेकिन वह अभी पेंडिंग में है।

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