Bihar News: आईएएस अफसर सहित सात के खिलाफ चार्जशीट दाखिल; रिशुश्री के टेंडर घोटाले में क्या-क्या सामने आया?
बिहार टेंडर घोटाले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। रिशु श्री और संजीव हंस समेत सात लोगों पर नकेल कसी गई है। अब सबकी नजर अदालत की कार्रवाई और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर टिकी हुई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बहुचर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने जांच को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाते हुए मुख्य आरोपी रिशु श्री, आईएएस अधिकारी संजीव हंस समेत सात लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। SVU का दावा है कि सरकारी टेंडरों को प्रभावित करने, बिचौलियों के जरिए ठेके दिलाने और अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। एसवीयू के एडीजी पंकज दराद ने बुधवार को प्रेस वार्ता में बताया कि यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) से प्राप्त सूचनाओं और विस्तृत जांच के आधार पर की गई है। उनके अनुसार मामले में जिन लोगों की भूमिका जांच के दौरान सामने आई, उनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। अब आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।
जांच एजेंसी के मुताबिक, रिशु श्री इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख चेहरा था। उसके साथ मुमुक्ष चौधरी, तारिणी दास, उमेश कुमार सहित अन्य आरोपी कथित तौर पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने और पसंदीदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। आरोप है कि बिचौलियों और अधिकारियों के गठजोड़ के जरिए टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया, जिससे सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए। एडीजी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जांच के आधार पर जिन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, उन्हीं के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में किसी नए अधिकारी के खिलाफ फिलहाल जांच का दायरा नहीं बढ़ाया जा रहा है।
रिशु श्री ने पिछले कई वर्षों में बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की
इस बीच आईएएस अभिलाषा शर्मा और योगेश दयाल को बड़ी राहत मिली है। एसवीयू के अनुसार दोनों अधिकारियों के खिलाफ टेंडर प्रक्रिया में सीधे आपराधिक षड्यंत्र या मिलीभगत के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि, उनके खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर अनियमितता और मुख्य आरोपी से कथित रूप से निजी लाभ लेने से जुड़े पहलुओं की जांच में कुछ तथ्य सामने आए हैं, जिन पर विभागीय कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि रिशु श्री ने पिछले कई वर्षों में बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की। एजेंसी के अनुसार उसके विदेश दौरों और करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दौरान मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 90 लाख रुपये और 2.2 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन के साक्ष्य जुटाए गए हैं, जिन्हें आरोप पत्र का हिस्सा बनाया गया है।
आईएएस संजीव हंस और पवन कुमार फिलहाल फरार हैं
एसवीयू ने यह भी बताया कि मामले के आरोपी आईएएस संजीव हंस और पवन कुमार फिलहाल फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं और जल्द ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एडीजी पंकज दराद के अनुसार, ईडी से प्राप्त इनपुट के आधार पर मामला दर्ज कर विस्तृत जांच की गई। अब तक एकत्रित साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद मामले की जांच पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और जरूरत पड़ने पर आगे भी तथ्यों की जांच जारी रहेगी।