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Hindi News ›   Bihar ›   Bhagalpur News ›   Bihar: Bolbam is not going to Ajgaibinath temple in the month of Sawan.Bihar News.

Sawan 2023 : भगवान से रूठे भक्त; देवघर के लिए जहां से जल लेते हैं, भोले के उस अजगैबीनाथ मंदिर में वीरानी क्यों

Krishan Ballabh Narayan कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Thu, 06 Jul 2023 12:18 PM IST
सार

Bihar News : देवघर वाले बाबा बैद्यनाथ के पास जाने के लिए कांवरिये भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगाजल उठाते हैं। इस बार भी उठाया। लेकिन, यह पहली बार है जब सुल्तागंज में बाबा भोलेनाथ के सुप्रसिद्ध अजगैबीनाथ मंदिर से भक्त मुंह फेरे हुए हैं।

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Bihar: Bolbam is not going to Ajgaibinath temple in the month of Sawan.Bihar News.
भागलपुर के सुल्तानगंज का अजगैबीनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान भोले को प्रसन्न करने वाला सावन महीना चल रहा है। इस बार अंग्रेजी के दो महीने का सावन है। सावन में झारखंड स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए कांवरिये बिहार में भागलपुर के सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा नदी से जल उठाते हैं। इस बार भी उठा रहे हैं। लेकिन, कुछ बेहद अलग हो रहा। जो सदियों से नहीं हुआ, वह हो रहा है। सुल्तागंज में भोलेबाबा के अजगैबीनाथ मंदिर की ओर भक्त जा ही नहीं रहे। लगता है, जैसे रूठे हुए हों। यहां के पंडे उदास बैठे हैं। मंदिर में सावन के पहले वाली भी रौनक नहीं है। कुछ ही लोग आ रहे हैं, उनमें भी वही जो देवघर में बाबा को चढ़ाने के लिए जल नहीं लेकर निकले हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि भक्तों की ऐसी कमी सावन से पहले कभी नहीं थी। 40 साल तक सावन के हर सोमवार डाक बम के रूप में देवघर जाने वाली कृष्णा माता भी यहीं से गंगाजल लेती रहीं।

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Bihar: Bolbam is not going to Ajgaibinath temple in the month of Sawan.Bihar News.
मंदिर सेवक गुड्डू चौधरी - फोटो : अमर उजाला

भगवान के मंदिर के साथ हो गई राजनीति
वीरानी की वजह जानने के लिए 'अमर उजाला' ने दर्जनों लोगों से बात की। कांवरियों से वजह समझने के पहले अजगैबीनाथ के पुजारी और यहां के सेवकों से बात की। इनका कहना है कि यह मंदिर राजनीति का शिकार हो गया है। मंदिर के सेवक गुड्डू चौधरी बताते हैं कि सावन से पहले इस मंदिर में 500-600 लोग प्रतिदिन आते रहे और सोमवार को यह संख्या 1500 से 2000 हो जाती थी, लेकिन सावन के प्रवेश करते ही यहां लोगों का आना बंद हो गया है। उन्होंने कहा कि सावन में अजगैबीनाथ का मंदिर के साथ साजिश की गई है। यह राजनीति और साजिश की बात भी करते हैं, लेकिन असली वजह नहीं बता पाते।

दो तरह की साजिश के कारण भक्त नहीं आ रहे
स्थानीय लोगों से बातचीत में एक कारण सामने आया, जबकि कांवरियों से बात में दूसरी वजह नजर आयी। सावन के एक दिन पहले और अब पहली सोमवारी के इंतजार के बीच चार दर्जन लोगों से समझने पर दो वजह की पुष्टि हो रही है। पुष्टि इसलिए कि वह भौतिक रूप से भी दिखा। स्थानीय लोगों ने इसे पंडों की साजिश बताया। पुष्टि के लिए 'अमर उजाला' की टीम तीन दिनों तक आवाजाही और गतिविधि को समझती रही। सामने आया कि सीढ़ी घाट की तरफ के पंडा लंबे समय से उस क्षेत्र पर अपना अधिकार जमाये हुए हैं। इधर घाट नमामि गंगे घाट की तरफ दूसरे पंडों का स्थान है। नमामि गंगा क्षेत्र के पंडा अपनी कमाई बढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं को अजगैबीनाथ मंदिर स्थित सीढ़ी घाट की ओर बढ़ने ही नहीं देते हैं। नया और सुंदर के साथ सभी सुविधा वाला घाट बताते हुए कांवरियों को नमामि गंगे घाट की तरफ ही ले जाते हैं और यहीं रोक लेते हैं। यह साफ-साफ दिखा, लेकिन कांवरियों से बातचीत में एक और वजह सामने आई। नमामि गंगे घाट का निर्माण ही इस तरह किया गया है कि कांवरिये जल उठाने के बाद अजगैबीनाथ मंदिर की ओर रुख नहीं कर सकते। जल उठाने के बाद मंदिर की ओर जाने के लिए उलटा मुड़कर जाना पड़ेगा, मतलब पीछे की ओर। देवघर के लिए जल उठाने के बाद पीछे या उलटा मुड़ने पर निषेध होता है, इसलिए कांवरिये आगे निकल जाते हैं और मंदिर पीछे छूट जाता है। 

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अजगैबीनाथ मंदिर में महादेव के साथ उनके शिष्य सिद्धनाथ और केदारनाथ का शिवलिंग। - फोटो : अमर उजाला
पहले यहां पूजा, तभी देवघर में महादेव की पूजा होती है

अजगैबीनाथ मंदिर मनकामना मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भक्तों का कहना है कि इस स्थान पर मांगी मनौती पूरी होती है। इस संबंध में इस मंदिर के महंथ प्रेमानन्द जी के अनुसार "इस स्थान की ऐसी मान्यता है कि सबसे पहले इस स्थान की सरकारी पूजा की जाती है। इसके बाद ही देवघर के महादेव की पूजा होती है।" इस संबंध में अजगैबीनाथ मंदिर में पूजा कर कर रही आयशा, संजना, निर्मला देवी और जनार्दन प्रसाद ने बताया कि अजगैबीनाथ मंदिर में सब दिन श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, खासकर सोमवार, पूर्णिमा और प्रदोष में बहुत भीड़ लगती है, लेकिन सावन महीने में इस बार भक्तों की बेरुखी दुर्भाग्यपूर्ण है।

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