बिहार: भाजपा में CM पद के कई दावेदार
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नरेंद्र मोदी के नाम पर ही भाजपा 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। लोकसभा में पार्टी की सफ़लता को देखते हुए पार्टी में विधानसभा को लेकर उत्साह है और मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार भी सामने आ रहे हैं। हालांकि पार्टी ने इस पर खुलकर कोई राय नहीं दी है, पर बिहार की राजनीति पर नज़र रखने वाले मानते हैं कि आने वाले दिनों में चीज़ें दिलचस्प मोड़ ले सकती हैं।
पिछले महीने केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने प्रस्ताव दिया था कि भाजपा को अगला विधानसभा चुनाव सुशील मोदी के नेतृत्व में लड़ना चाहिए। सूत्र बताते हैं कि भाजपा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में इस निजी प्रस्ताव के बाद सन्नाटा छा गया था, जो अब उनकी दावेदारी के रूप में टूट रहा है।
महादलित
बीते शनिवार बक्सर सांसद अश्विनी चौबे ने भागलपुर में केंद्रीय भाजपा नेतृत्व से आग्रह किया कि किसी महादलित को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तय किया जाए।
महादलित समुदाय से भाजपा नेता और पूर्व मंत्री सत्यदेव नारायण आर्य पहले ही अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं। वे कहते हैं कि कार्यकर्ताओं और क्षेत्र की जनता के दवाब पर उन्होंने ऐसा किया।
जबकि गया के विधायक और पूर्व मंत्री प्रेम कुमार 40 साल के अनुभव का हवाला देते हुए कहते हैं कि पार्टी अगर उन्हें मौका देगी तो वे आगे आएंगे।
एक और चाय वाला
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नंदकिशोर यादव ने हाल में ही कहा था कि उन्होंने भी चाय बेची है।
नंदकिशोर कहते हैं कि वे दावेदारी के कयासों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उनके अनुसार उम्मीदवार संसदीय बोर्ड के फ़ैसले से तय होगा।
मगर सूत्रों के अनुसार वरीयता, अनुभव और यादव समुदाय से होने के कारण उनकी दावेदारी काफ़ी मज़बूत है।
अनुशासनहीनता नहीं
क्या पार्टी दावेदारों पर कार्रवाई करेगी? इस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय का कहना है कि न किसी ने दावा किया है और न किसी ने अनुशासनहीनता दिखाई है।
मंगल पांडेय भले दावेदारी की बात से इनकार करें, लेकिन दावेदारी परदे से बाहर आ चुकी है। ऐसी स्थिति बनी क्यों? वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार के मुताबिक़ भाजपा के विस्तार के कारण अन्य दलों वाली स्थिति यहां भी पैदा हो गई है और इसी का उदाहरण है दावेदारी।
सवाल यह है कि अगले साल चुनाव तक इनमें से कितनों की दावेदारी बचेगी और कौन नए शामिल होंगे।