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'बाबू ही हमारे सिस्टम का सबसे ताकतवर आदमी है'

Wed, 24 Aug 2016 03:20 PM IST
सीटू तिवारी/पटना से, बीबीसी हिन्दी के लिए
सीटू तिवारी/पटना से, बीबीसी हिन्दी के लिए Updated Wed, 24 Aug 2016 03:20 PM IST
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Bihar: Babu's more powerfull man of our system
- फोटो : bbc

बीते आठ महीने से पटना के ज़िलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ‘बाबूगिरी’ की उलझनों को सुलझाने में लगे है, दरअसल जिलाधिकारी संजय अग्रवाल ने इस साल की शुरुआत में एक प्रयोग किया है।

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उन्होंने तय किया कि वो खुद भी कभी- कभार बाबू की कुर्सी का काम संभालेंगें। सिर्फ वही नहीं, बल्कि ज़िले के सभी बीडीओ, एसडीओ, डीडीसी और एसडीसी को अपने मातहतों की सीट पर बैठने और काम निपटाने का आदेश है।
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अपने अनुभवों को साझा करते हुए जिलाधिकारी संजय अग्रवाल कहते हैं, “फ़ाइल की ज़िंदगी तो बाबू पर ही निर्भर है, क्लर्क चाहे तो उस फाइल को मार दे या फिर ज़िंदा रखकर उसे अंजाम तक पहुंचाए। बाबू हमारे भारतीय सिस्टम का सबसे पावरफुल आदमी है।”
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ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि आख़िर ये नौबत क्यों आई? संजय अग्रवाल कहते है, “किसी भी आदमी को काम कराना है, तो उसका सबसे पहले क्लर्क से सामना होता है। लेकिन आप देखें तो क्लास तीन के स्तर पर ट्रेनिंग, मोटिवेशन, मानिटरिंग की कमी है। वहां लोग काम नहीं कर रहे, क्योंकि उनकी जवाबदेही नहीं तय की गई है। ऐसे में जब कोई बड़ा अधिकारी उस जगह ठता है, तो वो एक गाइडिंग फोर्स की तरह काम करता है। साथ ही उन पर एक तरह का दबाव भी बनता है।”

Bihar: Babu's more powerfull man of our system

2008 में दरभंगा से रिटायर हुए जिलाधिकारी उपेन्द्र शर्मा के मुताबिक, “सिस्टम में सबका काम बंटा हुआ है। सबकी जवाबदेही तय हो और सख़्ती से, ट्रेनिंग के ज़रिए काम कराया जाए तो फिर काम लंबित होने का सवाल ही नहीं है और यहीं ज़्यादा कारगर तरीका है।”

संजय अग्रवाल भी मानते हैं कि सिस्टम में अगर बाबुओं को ज़्यादा जवाबदेह बना दिया जाए, काम निपटाने के लिए समय सीमा बांध दी जाए और लोगों को इस बात की जानकारी दे दी जाए कि उनका काम किस डेस्क पर होगा, तो आम आदमी की मुश्किलें बहुत आसान हो जाएंगी।

हालांकि संजय अग्रवाल का यह प्रयोग बहुत सफल हो रहा है, ऐसा फिलहाल तो नहीं लगता। 55 साल के बैजनाथ चौधरी दानापुर से आए हैं, वो गोताखोर हैं, 15 साल की उम्र से ही उन्होंने गोताखोरी करनी शुरू कर दी थी। त्यौहारों या किसी ख़ास मौके पर प्रशासन उनकी मदद लेता है, ताकि पानी में डूबने वालों को बचाया जा सके।

Bihar: Babu's more powerfull man of our system

अपनी अर्जी लेकर आए बैजनाथ चौधरी कहते हैं, “पानी से आदमी निकालना आसान है, लेकिन सरकार की ज़ेब से पैसा नहीं।” छह बच्चों के पिता बैजनाथ ने साल 2014 के दुर्गा पूजा, छठ और कार्तिक पूर्णिमा में 29 नाव और गोताखोरों के साथ टीम लीडर के तौर पर अपनी सेवाएं दीं।

इसके लिए सरकार को क़रीब एक लाख 38 हज़ार रुपए देने हैं, लेकिन अभी तक ये राशि बैजनाथ को नहीं मिल पाई है। निराश बैजनाथ कहते हैं, “दानापुर में भागते भागते परेशान हो गए हैं। बाबू भगा देता है पैसा जारी नहीं करता, कोई सरकार आपने देखी है, जो ग़रीब का ही पैसा रख ले। सरकार और ये बाबू तो ग़रीब की सेवा करने के लिए बने हैं ना?”

अनपढ़ बैजनाथ जो सवाल पूछ रहे हैं, शायद उससा जवाब ही पटना के ज़िलाधिकारी और भारत की ब्यूरोक्रेसी दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

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