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Bihar News : जहानाबाद जेल ब्रेक के 18 साल बाद औरंगाबाद में हुआ बड़ा खेला, जानकर हो जाएंगे हैरान

Fri, 09 Feb 2024 11:33 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: आदित्य आनंद Updated Fri, 09 Feb 2024 11:33 AM IST
सार

पुराने भवन को नियंत्रण में रखने के बाद कुछ समय तक तो जेल प्रशासन ने पुलिस की तैनाती रखी लेकिन जेल में कर्मियों की कमी के कारण उन्हें वापस बुला लिया। लिहाजा पुराना जेल सूना हो गया।

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Bihar: Aurangabad Jail case is in discussion these days; Prison administration engaged in investigation
अगलगी के बाद औरंगाबाद जेल की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

15 नवंबर 2005 की रात नक्सलियों ने हमला बोल जहानाबाद जेल ब्रेक को अंजाम दिया था पर 19 साल बाद जो औरंगाबाद में हुआ वह तो गजब का खेला है। खेला ऐसा हुआ कि न तो घटना की अभी ठीक से तारीख मालूम है और न ही अपराधियों का कोई सुराग मिला है। बावजूद पुलिस अंधेरे में तीर दाग रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद यहां से कैदी भागे नहीं क्योंकि मामला ही कुछ और है। दरअसल अपराधियों ने न केवल जेल गेट को फूंका है बल्कि थोक के भाव में लाखों के साजो सामान भी गायब और क्षतिग्रस्त कर दिए। इतना ही नही जेल प्रशासन की लापरवाही से देश की आन, बान और शान तिरंगे झंडे का भी अपमान हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि कल तक तो जेल प्रशासन को भी इसका पता नहीं था। लेकिन, जैसे ही मीडिया के माध्यम से पता चला, वैसे ही जेल प्रशासन ने औरंगाबाद नगर थाना में मामले की प्राथमिकी दर्ज करा दी। अज्ञात अपराधियों को आरोपी बना डाला।

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पुराने औरंगाबाद मंडल कारा का है मामला
दरअसल, मामला औरंगाबाद मंडल कारा का है। मंडल कारा की क्षमता पहले करीब चार सौ कैदियों की थी। वही क्षमता से चार गुणा के लगभग कैदी रहा करते थे। लिहाजा जरूरत पड़ने पर औरंगाबाद मुफ्फसिल थाना के बगल में बड़े परिसर में मंडल कारा का नया भवन बना। भवन बनने के बाद सारे के सारे कैदी जेल पुलिस और अधिकारी 1 मई 2023 को  वहां शिफ्ट हो गए। शिफ्टिंग के बाद भी पुराना मंडल कारा भवन जेल प्रशासन के ही नियंत्रण में रहा। पुराने भवन को नियंत्रण में रखने के बाद कुछ समय तक तो जेल प्रशासन ने पुलिस की तैनाती रखी लेकिन जेल में कर्मियों की कमी के कारण उन्हें वापस बुला लिया। लिहाजा पुराना जेल सूना हो गया। जेल को सूना करने के बाद जेल प्रशासन ने औरंगाबाद नगर थाना को रात्रि गश्ती के दौरान जेल परिसर को देख लेने की जिम्मेवारी देकर पुराने जेल परिसर की सुरक्षा से अपना पिंड छुड़ा लिया।
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Bihar: Aurangabad Jail case is in discussion these days; Prison administration engaged in investigation
जेल हालत देखकर लोग दंग हैं। - फोटो : अमर उजाला

कारा प्रशासन ने इस ओर से पूरी तरह नजरें मोड़ ली
पुराने जेल की सुरक्षा का जिम्मा औरंगाबाद नगर थाना की गश्ती टीम को सौंपने के बाद कारा प्रशासन ने इस ओर से पूरी तरह नजरें मोड़ ली। वहीं पुलिस की गश्ती टीम रात में आती और जेल का बाहर से ही चक्कर लगाकर जाती रही। गश्ती दल ने कभी भी परिसर के अंदर दिन में भी जाकर मुआयना करना मुनासिब नहीं समझा। यही वजह है कि यहां गजब का खेला हो गया। हालांकि जेल प्रशासन ने तो पुराने जेल को लॉक कर रखा था। कहीं से किसी के घुसने की गुंजाईश नहीं थी लेकिन गुंजाईश बनाई गई। पहले पुराने जेल के मेन गेट के बगल में बने सिपाही बैरक की खिड़कियों की सरिया उखाड़ ली गई। फिर खिड़कियों के पल्ले उखाड़ लिए गए। मतलब पुराने जेल परिसर के अंदर जाने का चोर दरवाजा खुल गया।पुराने जेल परिसर के अंदर जाने के लिए चोर दरवाजा खुलते ही असामाजिक तत्वों की पैठ सूने पड़े पूरे जेल के अंदर हो गई। इसके लिए उनके द्वारा चोर दरवाजें से घुसकर पहले जेल के अंदर लोहे के दूसरे मेन गेट का ताला तोड़ डाला गया। फिर उसके  बाद बने लकड़ी के मोटे गेट को आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद बिल्कुल जेल के अंदर मुलाकाती कक्ष, जेलर, जेल सुपरिटेंडेंट कक्ष, महिला-पुरूष कैदी वार्ड से लेकर किचेन, टॉयलेट और जेल की छ्त के उपर जाने समेत परिसर के हर कोने तक जाने के लिए तोड़ ताड़ करते हुए पूरा रास्ता ही खुल गया।

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जेल की जर्जर हालत। - फोटो : अमर उजाला

रास्ता खुलने के बाद ही हुआ खेला 
इस तरह से रास्ता कब खुला, कितने दिन में खुला, इसकी दिन-तारीख तो तय नही की जा सकती लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि यह सब एक दो दिन में तो नही हो सकता। इसमें महीनों जरूर लगे होंगे। इसके बाद संभवतः रात के अंधेरें में संभवतः असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया। असामाजिक तत्व पुराने जेल परिसर के अंदर लगी बिजली वायरिंग के वायर, स्विच बोर्ड, एनसीबी बोर्ड, मोटर स्टार्टर, सोलर पैनल एवं अन्य सामान उखाड़ ले गए। वैसे तो शिफ्टिंग के बाद से पुराने जेल का मेन गेट रोज ही बंद नजर आता है लेकिन मीडियाकर्मियों की नजर अचानक से खुले गेट पर पड़ी। कैम्पस के अंदर कुछ हलचल दिखी। लिहाजा कौतूहल वश मीडियाकर्मी पुराने जेल परिसर के अंदर घुस गए। पता चला कि भवन निर्माण विभाग के लोग है, जो इस पूरे परिसर को किसी दूसरे सरकारी विभाग को सौंपे जाने के लिए सर्वे कर रहे है। इसके बाद जब मीडिया ने पूरे जेल परिसर का चप्पा चप्पा छान मारा। इसके बाद जो सब कुछ उजागर हुआ, वह अब सबके सामने है।

जेल अधीक्षक को भी मीडिया से ही मिली पूरे खेल की जानकारी
पुराने जेल के हाल से रुबरू होने के बाद मीडियाकर्मियों ने जेल अधीक्षक सुजीत झा को कॉल किया। पूरी बात बताई। उनसे उनका पक्ष जानने नये मंडल कारा पहुंचे। इसके बाद जो कुछ उन्होने कहा, वह न केवल अपना दामन बचाने वाला है बल्कि आश्चर्यजनक भी है। जेल अधीक्षक ने कहा कि उनके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। मामले की औरंगाबाद नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। कहा कि शिफ्टिंग के बाद कुछ माह तक जेल पुलिस पुराने परिसर में तैनात थी। बाद में जरूरत पड़ने पर उन्हे यहां बुला लिया गया। इसके बाद पुराने जेल परिसर की सुरक्षा के लिहाज से उन्होने लिखित रूप से औरंगाबाद नगर थाना से गश्ती के दौरान नजर बनाएं रखने का आग्रह किया था। उन्होने तिरंगे का अपमान के बाबत पूछे जाने पर कहा कि शिफ्टिंग के वक्त ही हमने सारे तिरंगें झंडें पुराने जेल परिसर से हटा लिए थे। ऐसा है तो देखना पड़ेगा, पूछना पड़ेगा।

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