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Hindi News ›   Bihar ›   Bihar Assembly Election 2020 PM Modi will give development and nationalism issues in campaigning, likely to come out of the circle of local issues

Bihar election 2020: प्रचार में मोदी देंगे विकास और राष्ट्रवाद को धार, स्थानीय मुद्दों के घेरे से जल्द बाहर आने के आसार

Fri, 16 Oct 2020 03:22 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, पटना/ नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, पटना/ नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 16 Oct 2020 03:22 AM IST
सार

  • बिहार चुनाव में फिलहाल स्थानीय मुद्दे हावी हैं।
  • स्थानीय मुद्दों के घेरे से जल्द बाहर आने के आसार, कन्हैया-ओवैसी भी बदलेंगे बयार।
  • महबूबा की रिहाई और फारूक के बिगड़े बोल से अनुच्छेद 370 की गूंज भी सुनाई पड़ेगी।

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Bihar Assembly Election 2020 PM Modi will give development and nationalism issues in campaigning, likely to come out of the circle of local issues
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

विस्तार

बिहार चुनाव में फिलहाल स्थानीय मुद्दे हावी हैं। अगले हफ्ते से स्थानीय मुद्दों पर विकास और राष्ट्रवाद के भारी पड़ने के भी आसार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी 20 अक्तूबर के बाद से चुनाव प्रचार में जुटेंगे। इस बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के अनुच्छेद 370 के मामले में आक्रामक रुख का असर पर चुनाव प्रचार पर पड़ना तय है।

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भाजपा चुनाव को पीएम मोदी और केंद्रीय स्तर के मुद्दों पर लाना चाहती है। ऐसा होने पर भाजपा को सियासी फायदे की उम्मीद है। पीएम अपने भाषणों में अनुच्छेद 370 को रद्द करने, तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने, राम मंदिर का निर्माण शुरू होने जैसी उपलब्धियों का जिक्र करेंगे। इस दौरान उनके भाषण में विकास को भी जगह मिलेगी।
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ओवैसी-कन्हैया लाएंगे बदलाव
विपक्षी महागठबंधन के स्टार प्रचारक कन्हैया कुमार ने अभी एक ही छोटी रैली की है, जबकि ओवैसी ने अब तक कोई रैली नहीं की है। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि इन दोनों नेताओं के मैदान में उतरने के बाद राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों को जगह मिलेगी। कन्हैया ने अपनी छोटी रैली के जरिए राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों को उठाने का संकेत भी दे दिया है, जबकि ओवैसी अल्पसंख्यकों के सवाल पर हमेशा बेहद आक्रामक रुख के लिए जाने जाते हैं।
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चुनाव में कश्मीर का प्रवेश
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के एक बयान के बाद चुनाव में कश्मीर का प्रवेश हो गया, मगर भविष्य में यह मुद्दा और गरमाएगा। पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती अरसे बाद रिहा हुई और रिहाई के साथ ही अनुच्छेद 370 और 35ए के सवाल पर लामबंदी तेज कर चुकी है। इससे पहले फारूक अब्दुल्ला 370 के लिए चीन की चर्चा तक तक कर चुके हैं। मोदी चाय वाले, नीच और राष्ट्रवाद को लेकर ऐसे मुद्दों को लपकना भली-भांति जानते हैं।

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