बिहार चुनाव 2020: भाजपा के लिए बागियों को थामना होगा मुश्किल, कोसी-सीमांचल में जदयू के खाते में गई सीटों पर आजमाएंगे दमखम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Bihar Election 2020: भाजपा में बगावत तय है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने भले ही पार्टी के बागियों को चेतावनी दी है, मगर जमीन पर इसका असर मुश्किल दिख रहा है। अकेले सीमांचल और कोसी क्षेत्र में ही पार्टी के ढाई दर्जन नेता उन सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, जो समझौते के तहत जदयू के हिस्से में चली गई है।
इन बागी नेताओं का पहला विकल्प लोजपा है। जाहिर तौर पर इससे भाजपा और जदयू के रिश्तों में खटास आ सकती है। सीमांचल और कोसी में बीते लोकसभा चुनाव के दौरान ही समस्या खड़ी हुई थी। पार्टी ने इस क्षेत्र की अररिया लोकसभा सीट को छोड़ कर सभी सीटें जदयू को दे दी, जबकि इनमें से कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर, किशनगंज जैसे जिलों में भाजपा का पुराना और मजबूत आधार रहा है।
चूंकि लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्रों की सीटें जदयू को गई, इसलिए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की प्रभाव वाली कई सीटें जदयू के हिस्से में चली गईं। इससे पहले विधायक या टिकट के दावेदार पार्टी नेतृत्व से बेहद खफा हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने बड़ी मुश्किल से बगावत की बयार थामी थी।
ढाई दर्जन नेता लोजपा के संपर्क में
सीमांचल और कोसी इलाके के लिए सीटों का बंटवारा हो चुका है। इन दो इलाकों के ढाई दर्जन से अधिक भाजपा नेता लोजपा के संपर्क में हैं। कटिहार की कदवा, बरारी, मनिहारी, बलरामपुर, किशनगंज की ठाकुरगंज, पूर्णिया की अमौर, धमदाहा, मधेपुरा की बिहारीगंज, सिंहेश्वर, मधेपुरा, सहरसा की महिषी, सोनवर्षा सीट पर भाजपा प्रदेश नेतृत्व बागियों को मनाने में नाकाम रहा है। इसी प्रकार भागलपुर, खगड़िय, दरभंगा और मधुबनी में जदयू कोटे की सीटों पर भाजपा के बागियों ने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है।
बढ़ सकती है खटास
लोजपा की भाजपा के साथ नीतीश के खिलाफ संबंधी चुनावी रणनीति से जदयू पहले से खफा है। जदयू लगातार बागियों पर नियंत्रण करने और कार्रवाई करने की मांग कर रहा है। सियासी गलियारे में पहले से ही चर्चा है कि नीतीश को कमजोर करने के लिए भाजपा लोजपा का सहारा ले रही है। ऐसी स्थिति में अगर बागी अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद भी नहीं माने तो दोनों दलों के रिश्ते में खटास बढ़ने का अंदेशा है।
फेरबदल से इन सीटों पर बगावत की सुगबुगाहट
मोहिउद्दीन नगर से राजेश सिंह को इस बार भाजपा ने टिकट दिया है। पिछली बार वह इसी सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े थे। फतूहा से सत्येंद्र सिंह को टिकट मिला है, वह पिछली बार लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। उजियारपुर के शील कुमार राय पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन भाजपा से पहली बार टिकट मिला है।
बछवाड़ा से सुरेंद्र मेहता को पहली बार उम्मीदवार बनाया गया है। पिछली बार वह बेगूसराय से विधायक थे। इस बार उनकी सीट बदल गई है और बेगूसराय से कुंदन सिंह को पहली बार टिकट दिया गया है। मनेर से भाजपा ने करीब दो साल पहले भाजपा पार्टी में आए और प्रवक्ता निखिल आनंद को टिकट दिय है।
भागलपुर से भाजपा ने जिलाध्यक्ष रोहित पांडे को पहली बार टिकट देकर उतारा है, जबकि अमनौर से जदयू के पूर्व विधायक मंटू सिंह को पहली बार भाजपा का टिकट दिया गया है। यह सीट इस बार भाजपा के खाते में चली गई है और कुछ दिनों पहले ही वह जदयू छोड़कर भाजपा में आए थे।
उन्हें यह सीट भाजपा के वर्तमान विधायक चोकर बाबा उर्फ शत्रुघ्न तिवारी का टिकट काटकर दिया गया है। इस बार भाजपा से बागी होकर ये निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। सीवान से पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव चुनाव लड़ रहे हैं, वह पहली बार विधायक का चुनाव यहां से लड़ रहे हैं।
इससे पहले वह यहां से सांसद थे, लेकिन यह सीट जदयू के कोटे में चले जाने के कारण उनका टिकट कट गया था। दरौंधा से भाजपा ने पहली बार करनजीत सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। इससे पहले वह यहां के निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं. हाजीपुर से पहली बार अवधेश सिंह को टिकट मिला है, वह पूर्व मंत्री वृशिण पटेल के भतीजे हैं।